सदस्य:NivedRajeev/प्रयोगपृष्ठ/01234

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योव्ला संयुक्त अरब अमीरात( यु.ए.ई ) का एक परमपरागत नृत्य रूप हैं । योव्ला नृत्य रूप विविध अमीरातों में विशेष अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता हैं । अरब अमीरति संस्कृति की कई सविशेषताएँ हम योव्ले में देख सकते हैं । यह नृत्य रूप सिर्फ मर्दें प्रदर्शित करते हैं । साधारण रूप में तीन से अधिक मर्दों का संघ ही इसकी प्रदर्शन में शामिल होते हैं । इस नृत्य रूप में कलाकार बंदूकों का और डंडों का इस्तेमाल करते हैं । कुल मिलकर योव्ला अरब संस्कृति का प्रतीकात्मक लोकनृत्य रूप हैं ।

प्रस्तुति[संपादित करें]

इस नृत्य रूप में कलाकार बन्दूक और डंडे हाथों में पकड़कर, यह दोनों चीज़ों को दाये और बाये दिशाओं में खुमाकर धीरे से नाचना शुरू करते हैं ।नृत्य शुरू होने के बाद नृत्य संघ का एक या दो या तीन कलाकार आगे आकर, बन्दूक हाथ में पकड़कर, हाथों को ऊपर की दिशा की और फैलाकर उसे बेहद तेज़ी से घुमाता है और उसी समय संघ के दुसरे कलाकार डंडे को अपने कँधों पर रखकर सिर को ऊपर नीचे करते हैं । सभी कलाकारों की एक हाथ डंडा पकड़ने केलिए और दूसरी हाथ पास के कलाकार की दूसरी हाथ पकड़ने केलिए इस्तेमाल किया जाता हैं । इस नृत्य रूप के सभी चाल चलन पूरी वर्णात्मकता से होती हैं जो इसे और सुन्दर बनता हैं । इसमें कलाकारों का भाव अतीव प्रतिकर और ख़ुशी से भरा होते हैं । शुरुआत में आगे आये कलाकार वापस अपने नृत्य संघ के साध जुड़ जाता हैं और संघ से किसी और एक या दो या तीन कलाकार आगे आकर इसी तरह नाचना शुरू करते हैं ।

संगीत[संपादित करें]

इस नृत्य रूप में परंपरागत अरब संगीत का इस्तेमाल किया जाता हैं । इसमें फिड़जीरी और सावत संगीतों के सामान पारम्परिक अमीराती संगीतों का प्रयोग होता हैं । ऐसे अमीराती संगीत शाखाओं में एक मुख्य गायक अरबी कविता बेहद सुन्दर तरीके से गाते हैं और एक गायक संघ उनके साध उसी पंक्ति को दो या तीन बार दोहराते हैं ।

संगीत उपकरणें[संपादित करें]

फिड़जीरी संगीत में कई अरबी संगीत उपकरणों का इस्तेमाल होता हैं । बुज़ुक, खिम्ब्री, खांबस जैसे तार संगीत उपकरणों और कमंजः, राबबह जैसे वायु संगीत उपकरणों का इस्तेमाल इसमें होते हैं । गीत की ताल को दिखने केलिए बंदिर,दफ़,नखरे जैसे संगीत उपकरणों का उपयोग होता हैं ।

वेश भूषा[संपादित करें]

योव्ला करते वक्त कलाकार 'कंदुरा' नामक पोशाक को पहनते हैं । 'कंदुरा' अरबी मर्दों का परंपरागत पोशाक का नाम हैं । यह एक तरह का लम्बा कमीज है जो साधारण रूप में सफ़ेद रंग का होता हैं । कंदुरे के साथ साथ कलाकार 'कहफियेह' भी अपने सिर पर पहनते है जो अरबों का परम्परागत पोशाक का भाग होता हैं । योव्ला करते वक्त कलाकार अपने गर्दन में एक तरह का अरबी दुप्पट्टा भी पहनते है जिसमे अमीरति प्रतीकों की चित्र बनाए गए हैं ।

सांस्कृतिक महत्व[संपादित करें]

योवला नृत्य में साधारण रूप से अपने देश के प्रति प्रेम और आदर की भावनाये प्रकट होते हैं । फिड़जीरी संगीत रूप के द्वारा सुन्दर अरब कवितायेँ ही गए जाते हैं । देश के प्रति प्रेम और आदर के साथ साथ देश के राजा, राजकुमार आदि विशिष्ट व्यक्तित्वों के प्रति आदर सम्मान भी प्रकट किया जाता हैं । संयुक्त अरब अमीरात के आलावा और अरब देशों में प्रसिद्ध और कई नृत्य रूपों से योवला समानताएं दर्शाती हैं । उसमें से सबसे महत्वपूर्ण नृत्य रूप हैं अरदाह । अरदाह भी पुरुषों का कालरूप हैं । योव्ला नृत्य रूप अरदाह से बहुत जुडी हैं । पर दोनों में अंतर भी बहुत हैं । जैसे योव्ला में बन्दूक और डंडों का इस्तेमाल होते हैं वैसे अरदाह में तलवारों का इस्तेमाल होती हैं । योव्ले में कलाकार एक ही दिशे की और अपनी नज़र लगाकर नाचते हैं पर अरदेह में कलाकार एक दुसरे को देखकर नाचते हैं । दोनों में उपयुक्त संगीत एक ही जैसा हैं और कलारूप की मुख्य उदेश्य भी एक ही हैं । योव्ले में डंडों और बंदूकों का उपयोग इसलिए किया जाता हैं क्योंकि अरबों का संस्कृति युद्ध और शूरता से जुडी हैं । अरबों की संस्कृति की यही विशेषता हम योव्ले जैसे कलारूपों में देख सकते हैं ।

सन्दर्भ[संपादित करें]