सदस्य:Neha Clare Minj/sandbox

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                                                                 || मेरी क्युरी ||

पारिवारिक जीवन[संपादित करें]

भारत में एवं विश्व के अनेक देशो में अनगिनत महिलाओं ने अपनी उपलब्धियों से अपने देश का नाम रौशन किया है। कुछ महिलाएं अपने कार्य तथा अपनी सोच के कारण हर किसी के र्लिए प्रेरणा स्रोत हैं। जनहित और राष्ट्र कल्याण के लिए अपने प्राणों की भी परवाह न करने वाली मैडम क्युरी समस्त विश्व के लिए एक आर्दश उदाहरण हैं। लिंग और सिमाओं से परे हर किसी के लिए मैरी क्युरी प्रेरणा स्रोत हैं। मेरी स्क्लाडोवका क्युरी जीसका लघु नाम मेरी क्युरी था उनका जन्म ७ नवम्बर १८६७ को और देहान्त ४ जुलाई १९३४ को हुई थी। माता पिता सुयोग्या अध्यापक थे। माँ अध्यापिका तथा पिता प्रोफेसर थे। माता-पिता की शिक्षाओं का असर मैरी क्युरी पर भी पड़ा। वे बचपन से ही पढाई लिखाई में तेज थीं। मेरी ने रेडियम की खोज की थी। विज्ञान की दो शाखाओं (भौतिकी एवं रसायन विज्ञान) में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक हैं। वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबल पुरस्कार प्राप्त किया। बड़ी बेटी आइरीन को ११३५ में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को १९६५ में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।


मेरी क्युरी

जीवन कथा[संपादित करें]

मेरी का जन्म पोलैंड के वारसा नगर में हुआ था। महिला होने के कारण तत्कालीन वारसाँ में उन्हें सीमित शिक्षा की ही अनुमति थी। इसलिए उन्हें छुप-छुपाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करनी पड़ी। उन्होंने वारॅसा क्लान्डेस्टिन फ्लोटिंग यूनिवर्सिटी से शिक्षा ग्रहण की और वारॅसा में ही वैज्ञानिक प्रशिक्ष्ण लेना शुरु किया। १८९१ में २४ साल की आयु में उन्होंने पेरिस में पढ़ रही अपनी बहन ब्रोइस्तवा के साथ पढने की ठानी, और वही उन्होंने अपनी उच्चतम डिग्री भी प्राप्त की और काफी प्रभावशाली वैज्ञानिक काम भी किये। बड़ी बहन की आर्थिक सहायता की बदौलत वह भौतिकी और गणित की पढ़ाई के लिए पेरिस आईं। उन्होंने फ्रांस में डॅअक्टरेट पूरा करने वाली पहली महिला होने का गौरव पाया। उन्हें पेरिसविक्ष्वविधालय में प्रोफ़ेसर बनने वाली पहली महिला होने का गौरव भी मिला। यहीं उनकी मुलाक़ात पियरे क्यूरी से हुई जो उनके पति बने।

पुरस्कार प्राप्तकर्ता[संपादित करें]

इस वैज्ञानिक दंपत्ति ने १८९८ में पोलोनियम की महत्त्वपूर्ण खोज की। [1]

   कुछ ही महीने बाद उन्होंने रेडियम की खोज भी की। चिकित्सा विज्ञान और रोगों के उपचार में यह एक महत्वपूर्ण क्रांतिकारी खोज साबित हुई। १९०३ में  मेरी क्यूरी ने पी-एच डी पूरी कर ली। इसी वर्ष इस दंपत्ति को रेडियोएक्टिविटी की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला और उन्होंने फिजिक्स में मिले नोबेल पुरस्कार को अपने पति पिअर क्यूरी के साथ और फिजिस्ट हेनरी बेस्कुएरेल के साथ बाटा।[2]
१९११ में उन्हें रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रेडियम श्के शुध्दीकरण (आइसोलेशन आफॅ प्योर रेडियम) के लिए रसायनशास्त्र का नोबेल पुरस्कार भी मिला। उनकी उपलब्धियों में रेडियम की खोज और उसका विकास भी शामिल हैं। विज्ञान की दो शाखाओं में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली वह पहली वैज्ञानिक मां की दोनों बेटियों ने भी नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। बड़ी बेटी आइरीन को १९३५ में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ तो छोटी बेटी ईव को १९६५ में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला।[3]
मेरी क्युरी

सफलताए[संपादित करें]

फ्रेंच नागरिको के अनुसार मेरी क्यूरी ने कभी भी अपनी पहचान को नकारात्मक नही बनाया वे हमेशा से ही फ्रेंच नागरिको को प्रेरणा बनी हैं। क्यूरी ने अपनी बेटी को भी पोलिश भाषा का ज्ञान दिया और कई बार उन्हें पोलैंड भी लेकर गयी थी। उनके द्वारा खोज गये पहले केमिकल एलिमेंट को भी उन्होंने पालोनियम ही नाम दिया, लेकिन फिर स्थानिक देशो ने १८९८ में उसे अलग कर दिया था। ६६ साल की उम्र में फ्रांस के सांटोरियम में अप्लास्टिक एनीमिया को वजह से १९३४ में उनकी मृत्यु हो गयी। मेरी क्युरी का सफर इतना आसान नही था, शुरुवात से उन्होने संघर्ष किया था। घर की आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु अध्ययन काल में ही कुछ बच्चों को ट्युशन पढाती थी। वैवाहिक जीवन में भी पति की असमय मृत्यृ ने उनकी जिम्मेदारियों को और बढ़ा दिया। दो बेटियों का भविष्य और पति द्वारा देखे सपनो को सफल बनाना, मेरी क्युरी का उद्देशय था। शोध कार्य के दौरान एकबार उनका हाँथ बहुत ज्यादा जल गया था। फिर भी मेरी क्युरी का हौसला नही टूटा। उनका कहना था कि, "जिवन में कुछ भी नहीं जिससे डरा जाए, आपको बस यही समजझने की ज़रुरत है।" मैडम क्युरी आज भले ही इस संसार में नही हैं किन्तु उनके द्वारा किये गए कार्य तथा समर्पण को विश्व कभी नही भूल सकता, आज भी समस्त विश्व में मेरी क्युरी श्रद्धा की पात्र हैं तथा उनको सम्मान से याद करना हम सबके लिए गौरव की बात हैं।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. https://www.nobelprize.org/nobel_prizes/themes/physics/curie/
  2. https://www.nobelprize.org/educational/nobelprize_info/curie-edu.html
  3. https://www.nobelprize.org/nobel_prizes/chemistry/laureates/.../marie-curie-facts.html