सदस्य:Mahika1997/प्रयोगपृष्ठ/2

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

अर्थशास्त्र[संपादित करें]

भारतीय रुप्या.

विषय वस्तु[संपादित करें]

अर्थशास्त्र वह ज्ञान का अंश है जो सामाजिक विज्ञान का वर्णन करते हुए, पैसों के उपयोग के बारे में हमें ग्यान देती है। अर्थशास्त्र के दो मूल भाग होते है-व्यष्‍टि अर्थशास्त्र और व्यापक अर्थव्यवस्था। अर्थशास्त्र मनुश्य के उन कार्यों का अधययन करता है जो वह जीवन की साधारण दिनचार्य में करता है तथा वह हर एक प्रयास, जो सुखी जीवन के लिये आवश्यक भौतिक साधन जुटने में करता है। हम विषय-वस्तु को लेकर कई अनेक विषयों में उपयोग कर सकते है; जैसे-सांख्यिकी, गणित विद्यया, व्यापारी विद्यया, आदि में प्रासंगिकता दिखाती है। यह विषय मनुश्य धन के उत्पादन के बारे में तथा मनुश्य किस तरह उपभोग करता है, उस विशय को विस्तार में बताता है। अर्थशास्त्र के कई उपखन्ड है जैसे- नियामक अर्थशास्त्र, व्यवहार अर्थशास्त्र, आर्थिक विकास, आर्थिक संकट, राजनीतिक अर्थव्यवस्था, मांग और आपूर्ति, वित्त उद्योग, बैंकिंग क्षेत्र, बाजार प्रणाली, आदि जैसे भाग्य को पढ़ने को मिलता है। यह विशय कई सदियों से प्रासंगिक बनता चले आ रहा है और कई सदियों तक जाना जयेगा। [1]

अर्थशास्त्र राष्ट्रीय आय, रोजगाम्र का निर्धरण, आर्थिक विकास के बारे में हमें बताता है। इस संदर्भ में, अर्थशास्त्र हमें यह बात बताता है कि किस वस्तु का उत्पादन करना है और किस मात्रा मे इस्त्माल करना चाहिये। मांग के अनुरूप हमें उपभोक्ता का सर्वेक्षण करके हमें उनकी मांग को मन में रखते हुए, हमें उत्पादन को उत्पादित करने का प्रयास करना चाहिये। उपभोक्ताओं कई तरह की वस्तुओं की मांग करते है जिसको पूरा करने का प्रयास उत्पादनों के हाथ में रह्ता है। यह चीज़ें दो तरह की होती है-वस्तु और सेवावस्तु वह चीज़ है जो साकार चीज़ें है, जैसे- कार, टेलीविजन, पेन, पेपर, खान-पान आदि। यह चीज़े उपभोक्ताओं से ज़्यादातर खरीदी जाती है। सेवाएं समाज में वस्तुओं से द्वितीयक है। सेवांए अमूर्त होते है और कई तरह के होते है, जैसे-बैंकिंग, वित्तीय, रेस्तरां सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी, रसद, आदि। अतः यह दो मूल चीज़ें अर्थशास्त्र की बुनियाद बनाती है जो मांग और आपूर्ति के अवधारण को इस्तमाल करके हमारी अर्थव्यवस्था देश में सभी दौर विकास फैलाता है। [2]

अमरीका, चीन और भारत की जीडीपी.

भारत की अर्थशास्त्र[संपादित करें]

अर्थशास्त्र भारत में विस्तृत महत्व रखती है। भारत विश्व में, प्रमुख अर्थव्यवस्था में से एक है जो तेज गति से बढ़ रही है। आज कल भारतीय रिजर्व बैंक में, नियमो के अनुसार, विमुद्रीकरण भारत मे काले धन की स्थिति का हल बन सक्त है ताकि भरत मे भ्रष्टाचार की स्थिति का हल खोज कर सकते है। प्रधान मंत्रि, नरेंद्र मोदी जी के भारत का दर्शन अद्वितीय है। उन्हें भारत में इतना बदलाव लाना चाहते है कि भारत की अर्थशास्त्र विश्व की प्रमुख अर्थशास्त्र में से एक हो।

प्रख्यात भारतीय अर्थशास्त्री[संपादित करें]

जिस तरह भरत की अभी प्रगति हो रही है, अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत कुछ सालों में चीन की अर्थव्यवस्था की भी कब्जा करने का कर्य कर सकती है। भारत का विकास दर, अभी उच्च दर से बढ़ रहा है। भारत में कारोबार शुरू होने के नाते, भारत की नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (जी डी पी) विश्व में तीसरे पद पर खडी है। भारत में विदेशी निवेश सबसे ज़्यादा है और यह हमारे अर्थशास्त्र को एक अलग पद पर डाल देता है। भारत सूचना प्रौद्योगिकी के प्रमुख निर्यातक है और यह भारत में नकदी आने का प्रारूप है, और यह बढ़ती सेवा क्षेत्र के वजह से भारत मे बदलाव ला रही है। [3]

रघुराम राजन.
मनमोहन सिंह.

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान[संपादित करें]

अर्थशास्त्र के आर्थिक विद्वान कई देशों से है जो इस विषय में सक्रिय योगदान लाते आ रहे है। भारत के अमर्त्य सेन जी ने भी विश्व के जाने माने अर्थशास्त्र के विषय में कई शोध पत्र लिखे है जो आज भी अर्थशास्त्र में उसका अध्ययन किया जाता है। अर्थशास्त्र में कई आर्थिक लोगों ने योगदान दिया है जो सालों से हम उनका प्रयोग करते आ रहे है। वह लोग है- जे पी मौरगन, जॉन मेनार्ड कीन्स, पॉल क्रूगमैन, फ्रेडरिक हायेक, जॉन टेलर, विलियम व्हाइट, विलियम बुइटर, चार्ल्स कैलोमीस, गैरी ग्रॉर्टन, ओलिवियर ब्लांकार्ड, डगलस डायमंड, एडम स्मिथ, डेविड रिकार्डो, कार्ल मार्क्स आदि।

इन अर्थशास्त्र के प्रतिष्ठित व्यक्ति के अलावा, रघुराम राजन भी भारत के नाम को रोशन किया था जब वह वित्त मंत्रि थे। उन्होंने दारिद्रता के विशय में, कई हल की खोज करते हुए, भारत में गरीब लोगों की स्थिति को समझते हुए कई मौद्रिक नीति का परिचय किया था। रघुराम राजन ही नही, बल्कि मनमोहन सिंह ने भी भारत के संकट को दूर करने का कर्य किया था जब १९९१ के संकट ने भारत को कर्ज़ के सर्पिल में लपेट लिया था। अतः अर्थशास्त्र कई स्तरों पर प्रासंगिक है और हमारे देश के बदलाव के निरीक्षण करने के लिये सक्षम करती है। रघुराम राजन ऐसे व्यक्ति थे जिसने अर्थशास्त्र को भारत में सफल किया था। उनकी नीतियों द्वारा भारत की स्तिथि को और भारत में गरीबी सुधारने में सफल रहे है। [4]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. https://en.wikipedia.org/wiki/Economics
  2. https://www.investopedia.com/terms/e/economics.asp
  3. https://hindividya.com/indian-economy-essay/
  4. https://www.biographyonline.net/people/famous/economists.html