सदस्य:Isha225/पंजाब की संस्कृति

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'पंजाबी परंपरागत पोशाक'

पंजाब की संस्कृति

पंजाब शब्द का उत्पन्न 'फारसी' भाषा के शब्द 'पंज' (जिसका मतलब गिनती का पांचवां अंक) ॵर शब्द 'अब' (जिसका मतलब नदी) को मिलाकर हुआ है, इसी कारण पंजाब को 'पाँच नदियों की भूमि' भी कहा जाता है।वह पाँच नदियाँ झेलम नदी, चिनाब नदी, रावी नदी, व्यास नदी ॵर सतलुज नदी हैं।'पंजाबी' शब्द के दो अर्थ होते है, जिसमे पहले तो 'पंजाबी' उन लोगों को बुलाय जाता है जो कि पंजाब शहर मे रहते है या वहां के रहने वाले हैं ॵर दूसरे मतलब से 'पंजाबी' उन लोगों को बुलाया जाता है जो कि पंजाबी' भाषा बोल सकते हैं।

मध्य और आधुनिक युग[संपादित करें]

पंजाब की संस्कृति मध्य युग के समय से ही बड़ी विविध पाई गई है, जो कि इनसान के जाति, समुदय, धर्म और गावों पर आश्रित है।'भारत आर्यन' की संस्कृति मध्य युग के समय की सबसे पहली संस्कृतियों मे से एक है, जो कि पंजाब मे मुख्य तौर पर पाई जाती है।किसी समय पर ब्राह्मण ॵर क्षत्रिय जाति के लोग पंजाब मे मुख्य तौर पर रहते थे जो कि हिन्दू धर्म का पालन करते थे।दूसरी सबसे बड़ी संस्कृति जो कि पंजाब मे पाई जाती है वो है 'जाट-गुर्जर' संस्कृति।यह दूसरी संस्कृति ग्रामीण काव्य, कृषि ॵर पूर्वजों की पूजा पर आधारित है ॵर एक तरह से आधुनिक पंजाब को दरशाती है। आधुनिक पंजाब के ज़्यादा तर लोग 'सिख' धर्म के अनुयायी है।पंजाब पर कई सदियों से आर्थिक कारणो की वजह से आर्यन, यूनानी, अरब, फारसी, अफगान, मंगोल ॵर युरोपिय के द्वारा आक्रमण किए गए हैं।जिसकी वजह से हमे प्रवासियों की संस्कृतियों का हलका सा प्रभाव आधुनिक पंजाब की संस्कृति मे दिखाई देता है।

पंजाबी नृत्य और संगीत[संपादित करें]

'भांगड़ा' पंजाब का सबसे प्राचीन ॵर प्रचलित पंजाबी नृत्य है।'भांगड़ा' नृत्य को पंजाब मे कई त्योहारों पर किया जाता है, जैसे कि शादियों पर, अच्छी फसलें उगने के समय या फिर किसे के जन्म दिन के समय पर।ढोलक के बजने पर पंजाब के लोगों मे एक तरह से 'भांगड़ा' नृत्य करने का उत्साह उठने लगता है।'भांगड़ा' के साथ-साथ 'गतका', 'डंकारा' ॵर 'गिदा' भी पंजाब के मशहूर नृत्य है।पंजाबी लोक संगीत मे सबसे महत्वपूर्ण साधन ढोलक है। इन्ही ढोलकों के बजने के साथ स्त्रियाँ 'बोलियाँ' संगीत गाती है।पंजाबी गानों को बहुत से पश्चिमी संगीतकारों ने सराहा है, जिसके कारण इन पश्चिमी संगीतकारों ने पंजाबी संगीत ॵर पश्चिमी संगीत को मिलाकर कई नए आधुनिक संगीत बनाए है।इस तरह से पंजाबी संगीत को दुनियाँ भर मे एक नए मुकाम पर पहुँचाया है।

पंजाबी परंपरागत पोशाक[संपादित करें]

पंजाब की परंपरागत पोशाक पुरुषों के लिए 'कुरता-पजामा' है 'ॵर स्त्रियों के लिए 'सलवार-कमीज़' जिसके साथ एक रंग-बिरंगा 'दुपट्टा' भी पहना जा सकता है। 'सिख' पुरुषों मे 'कुरता-पजामा' के साथ पगड़ी भी पहनी जाती है। पंजाब की कला और शिल्प को भी दुनिया भर मे सराहा जाता है। 'फुलकारी', 'लाख का काम', ॵर 'कागज से कलाकृतियां बनाना' यह सभी पंजाब की कला और शिल्प को दरशाते है।

पंजाबी भाषा और सहित्य[संपादित करें]

पंजाबी भाषा को 'गुरुमुखी' लिपी मे लिखा जाता है। लगभग '१३०० लाख' लोग मुख्य रूप से पश्चिमी पंजाब ॵर उत्तरी पंजाब के रहने वाले पंजाबी भाषा मे बात करते है।पंजाबी सहित्य मे तीन एेसी प्रमुख प्रेम प्रसंगयुक्त महाकाव्य कविताएं है जो कि लोक प्रेम कहानियों पर आधारित हैं जैसे कि -'हीर रांझा' जो कि कवी 'वारिस शाह' ने लिखी है, 'सोहणी माहीवाल' ॵर 'मिर्जा साहिबा'।'फारीदूदीन गंजशेखर', बाबा गुरुनानक' ॵर 'बुलेह शाह' पंजाब के कुछ प्रमुख कवियों के नाम हैं। सिख' धर्म मे 'गुरु ग्रंथ साहिब' को सबसे पवित्र पंजाबी ग्रंथ मानते हैं।

पंजाबी खाना[संपादित करें]

पंजाब मे 'दूध' उत्पादों को लगभग सभी तरह के खाने को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।दही, छाछ ॵर लस्सी तीनों को सुबह, दुपहर ॵर रात के भोजन के साथ लिया जाता है। पंजाबी खाने मे ज़्यादा तर गेहूँ का इस्तेमाल होता है ॵर बहुत विशेष अवसर पर ही चावल बनाए जाते हैं। आगर कभी चावल बनते हैं तो उनको 'राजमाँ' के साथ खाना पंजाबियों को बहुत पसंद है। भले ही पंजाबी खाने मे ज़्यादा चटनियां नहीं बनती फिर भी उसकी जगह 'घी' को हर खाने के साथ बड़े ही शौक से खाया जाता है।पंजाब के सबसे खास पकवानो मे 'दाल-मक्खनी' ॵर 'मुर्ग मक्खनी ' का नाम सबसे पहले नम्बर पर आता है। इन दोनो पकवानो को 'मक्खन नान', 'लच्छा परांठा' ॵर 'रूमाली रोटी' के साथ पंजाबी बड़े शौक से खाते है।परांठों की अगर बात की जाए तो एेसा कोई भी परांठा नहीं है जिसको पंजाबियों ने न बनाया हो।हर तरीके का परांठा चाहे वो 'आलू का परांठा' हो 'मूली का परांठा', 'प्याज़ का परांठा ', 'पनीर का परांठा' या 'कीमे का परांठा', जो भी परांठा आजकल दुनिया भर मे मिलता है उन सभी परांठों की शुरुआत पंजाब से ही हुई थी।सर्दियों के महिनों मे पंजाबी खाने मे चावल-मटर या गुड़-चावल बनाए जाते हैं।'पिनियाँ' जो कि एक तरह की मिठाई होती है, वह सिर्फ़ सर्दियों के महिनों मे ही बनाई जाती है।'पिनियों' के इलावा भी बहुत सी पंजाब की मिठाइयाँ जैसे कि 'काजू-कतली', 'खोया', 'जलेबियाँ' ॵर 'गाजर का हलवा' पूरे भारत मे ही नही दुनियाँ भर मे बनाई जाती हैं ॵर शौक से खाई जाती हैं।