सदस्य:Harsh K. Jha/प्रयोगपृष्ठ

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साँचा:Syed Zahid Jagirdar is President of Ekta Yuva Manch and Social Worker.


Syed Zahid Jagirdar

President of the Ekta Yuva Manch
कार्यकाल
2019

जन्म 1 मई 1994 (1994-05-01) (आयु 26)
Kalegaon, Taluka - Ahmedpur, Latur
राजनीतिक दल Ekta Yuva Manch
निवास Kalegaon, Taluka, Ahmedpur, Latur

Syed Zahid Jagirdar (उर्दू: سید زاہد جاگیردار ) (born 01 May, 1994), is an Indian Social Worker, Politician, activist and Founder of Ekta Yuva Manch. <ref>[https://www.facebook.com/syedzahid.jagirdar

He studying at Swami Ramanand Teerth Marathwada University, Nanded. Studied for he BA at Swami Vivekand Senior College, Shirur (taj.) Ahmedpur. <ref>[https://www.facebook.com/sd.jd.355

Awaaz Foundation

आवाज़ फाउंडेशन एक समाजसवी और गैर सरकारी संस्था है जिसका मुख्य कार्यालय मुंबई में है | इस संस्था ने वातावरन के सुरक्षा के लिए लोगो में प्रदुषण के खिलाफ जागरूकता लाने का काम किया है | इसने सरकार के कई महत्त्वपूर्ण फैसलों को प्रबावित किया है |

आवाज़ फाउंडेशन की शुरुआत २१ फरबरी २००६ में सुमैरा अब्दुकली ने की | आज तक फाउंडेशन ने कई PIL धकिल की है जिनमे से एक का मकशद धनी प्रदुषण के खिलाफ करि कानून की संरचना है |

आवाज फाउंडेशन ने पटाखों और होली के रंगों की भारी मात्रा में मौज़ूद धातु का मापन किया to रंगो में जहरीले भारी धातुओं का उच्च स्तर पाया। स्वयंसेवी फैज अब्दुलुलिया द्वारा आयोजित एक संवेदनशील मीटर जो कि भारी धातुओं का तुरन्त सतह संपर्क के माध्यम से पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। 2013 में, जो खतरनाक रसायन नियमों तहत प्रतिबंधित हैं , आवाज फाउंडेशन ने अपने पैकेजिंग पर पटाखे के सभी रासायनिक पदार्थों का पूर्ण खुलासा करने की मांग की है। यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार होगा।

ध्वनि प्रदुषण[संपादित करें]

ध्वनि प्रदुषण एक खतरनाक परिस्थिति है , जो कानो और दिमाग से जुड़ी कई समस्या पैदा कर सकती है | जिनमे ह्यपरटेंशन , आक्रामकता , दिल के रोग शामिल है |समाज विरोधी व्यवहार जैसे पटाके जालना रात के वक्त ऊँचे आवाज़ में लाउडस्पीकर बजाना , आदि भारत में बहुत संवेदनशील वक्त्व है | भारत के प्रमुख त्योहारों के दौरान उत्पन्न होने वाली ध्वनि के सामान दुनिया में कोई परस्थिति नहीं कर सकती | आवाज़ फाउंडेशन ने 12 नवंबर, 2007 को मुंबई उच्च न्यायालय में शोर प्रदूषण नियम, 2000 के कार्यान्वयन के लिए एक जनहित याचिका दायर की थी, जो शैक्षणिक स्थानों, अदालतों, अस्पतालों और धार्मिक स्थानों के आसपास साइलेंट जोन के विषय में विचार करने को था |

2009 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त शोर कानूनों के कार्यान्वयन की आवश्यकता स्वीकार कर ली और भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय के केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड द्वारा अधिसूचित शोर प्रदूषण नियमों को लागू करने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के परिणामस्वरूप, महाराष्ट्र सरकार ने शुरू में अधिसूचित और फिर राज्य में नगरपालिका निकायों को शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और अदालतों के करीब 100 मीटर (330 फीट) के क्षेत्र को मौन क्षेत्र के रूप में निर्धारित करने के लिए कहा, लेकिन धार्मिक क्षेत्रों के आसपास के क्षेत्रों को छोड़ दिया। स्थानों को मौन ज़ोन के रूप में स्थापित करने केलिए आवाज़ फाउंडेशन ने एक बार फिर न्यायालय को अनुरोध किया। 6 अगस्त 2009 को, गृह मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार के प्रधान सचिव, एक हलफनामे में अदालत को बताया कि मुंबई शहर में 1,313 धार्मिक स्थानों की पहचान की गई थी और बीएमसी तीन महीने के भीतर मौन ज़ोन बोर्ड को लगाएगी।

रेत खनन[संपादित करें]

आवाज़ फाउंडेशन और बीएनएचएस ने जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन में पहली बार, तटीय रेत खनन के खिलाफ जागरूकता पैदा की, अक्टूबर 2012 में हैदराबाद में भारतीय दलों के ग्यारहबे सम्मेलन में उन्होंने कहा की सक्शन पंप छोटी अवधि में रेत की एक बड़ी मात्रा को निकाल सकता है और बहुत जल्दी किसी इलाके की साडी रेत ख़त्म कर सकता है | रेत खनन एक ऐसे खंड में ऐसे ढेरो खनिकों की संख्या के कारण भारी मात्रा में रेत निकाल सकता है। ठाणे क्रीक में, सैकड़ों श्रमिक रेत खनन नौकाएं एक साथ काम करती हैं।

यह 13 वर्षीय लड़का मुंबई के निकट एक अवैध रेत खनन ऑपरेशन में पिछले 3 सालों से खनन करता है |

अवैध रेत खनन मुंबई जैसे शहरों के आसपास व्यापक है जहां निर्माण के लिए जमीं आवश्यक है। अक्सर भारत में राजनेताओं और अवैध रेत खनन के बीच एक कड़ी होती है। आवाज़ फाउंडेशन ने तटीय पारिस्थितिकी प्रणालियों और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के निवास के संरक्षण के लिए भी काम किया है, और बिना अपरिहार्य समुद्री बांध के खनन के लिए समुद्री संरक्षण कार्यकलापों में काम किया है। रेत खनन एक ऐसा अभ्यास है जो कई देशों में पर्यावरण संबंधी समस्या बनता जा रहा है। आवाज़ फाउंडेशन ने महाराष्ट्र और गोवा राज्य में अवैध रेत खनन के बारे में जन जागरूकता बढ़ा दी है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • Times Of India: NGO Awaaz Foundation 1600–1947 (2009),
  • Awaaz Foundatin : Awaaz Foundation - Welcome
  • एच.डब्ल्यू कोच, प्रशिया का इतिहास (1987) ISBN 0-582-48190-2