सदस्य:Elizabeth Mathew. TEP/भाषा और संस्कृति के आपसी संबंध

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भाषा और संस्कृति के संबंध-आमतौर पर यह माना जाता है कि भाषा और संस्कृति के बीच एक गेहरा सा संबंध हैं। हम यह भी कह सकते है कि भाषा संस्कृति का एक मौखिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। संस्कृति और सांस्कृतिक को बनाए रखने और संबंधों को संप्रेषित करने के लिए भाषा प्रयोग किया जाता है। Kramsch’s (2002) भाषा के परिभाषा देते हुए कहते है की " भाषा सिर्फ जानकारी का आदान - प्रदान केलिए इस्तमाल नही किया जाता है बल्कि एक प्रतीकात्मक प्रणाली केलिए भी।

संस्कृति भाषा में[संपादित करें]

ह्मारी मूल्यों और मानदंडों भाषा मे पाए जाते है और जैसे संस्कृति मे बदलाव पाए जाते है या फिर संस्कृति ही बदल जाती है उसी तरह हमीरी भाषा बदल जाती है, उदाहरण हम इस संबंध जनजाति दन्म के लोग मे देख सकते है। इन लोगो को शहरो या फिर गाँव मे बोले भाषा अपने समझ मे नही आती सिर्फ वो भाशा जो उनके जनजाति के पितरों ने उन्हे सिखाया है सिर्फ उसी भाशा से वे भात करते है। इसी वजह से उनके संस्कृति बाकी दुनिया से बिल्कुल अलग है। किसी दो जनजाति के भाषा और संस्कृति कभी मिलता- जुलता नही। एक और उदाहरण यह भी हो सकता है कि हमारा ही देश मे अनेक भाषाए पाइ जा सकती है, और जो लोग उस भाषा अपने घरो मे बात करते है उनका अपने ही संस्कृति है, जैसे कपडे वह पहनते है। खाना खाते है, त्योहार मनाते है आदी सब उनके संस्कृति पर निर्भर करती है निरपेक्ष जिस धर्म से वे आते है।

भाषा की मुल्य[संपादित करें]

Elizabeth Mathew. TEP/भाषा और संस्कृति के आपसी संबंध
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अलग संस्कृतियो क प्रभव्

इतिहास के पनो हमे यह सिखाती है कि, जैसे विदेशो ने भारत, अफ्रीका और छोटे- छोटे देशो पर खबज़ा लेकर अपना हुकुम चलाए थे। क्योकि अंग्रेज़ो ने सिर्फ एक भाषा मे बात कि तो उनको लगा की वही सबसे बडी जाती इस दुनिया मे प्रस्तुत थी। भारत मे भाषा और संस्कृति के आधार पर ही वह भारतियो के आपस नफरत पेधा की, धर्म भी शामिल थी, परंतु क्योकि विदेशो का भाषा सबसे अलग थी वह आसानी से पुरी दुनिया हड्प ली थी। इस द्वारान बाकी लोग अंग्रेज़ो से प्रसन्न होकर अंग्रेज़ो की तरह बने की प्रयोग कर रहे थे। तब जाकर उनके भाषा जाकर पडी ताकी उनके उठ-बेठ, खाना-पीना, बाते करना, आदी करते करते उनके संस्कृति भी अपना लिया। भारत पूरी तरह से अंग्रेज़ियो की संस्कृति अपनाया नही पर धीरे धीरे हम धेख सकते है कि किस तरह आज के लोग अपने खुद की भाषा बूल गए है और् धिरे धिरे अपने खुद की संस्कृति बूले है और अंग्रेज़ियो की अपना रही है। इससे हम इस निष्कर्ष मे पहुंचते है कि हम उसी संस्कृति के नियम मानते है जिसकी भाशा हमे अछी तरह से बोलना आती है क्योकि हम हमारि पह्चान अपनी भाशा से संबंधित करते है। सारि दुनिया अपने भाषा के साथ जो संस्कृति आती है उसकी सम्मान करती है। हमारे मां-बाप वो पहले लोग है जो ह्मे भाषा सिकाते है और वो संस्कृतियो जो भाशा से संबंधित हैए।

सन्दर्भ[संपादित करें]

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  1. https://www.google.co.in/search?q=Relationship+to+language+and+culture&rlz=1C1GGRV_enIN751IN751&oq=Relationship+to+language+and+culture&aqs=chrome..69i57j0l5.4600j0j7&sourceid=chrome&ie=UTF-8#/
  2. https://www.google.co.in/search?q=Relationship+to+language+and+culture&rlz=1C1GGRV_enIN751IN751&oq=Relationship+to+language+and+culture&aqs=chrome..69i57j0l5.4600j0j7&sourceid=chrome&ie=UTF-8# /