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करौली का मदन मोहन मन्दिर

मदान मोहन मन्दिर[संपादित करें]

इतिहास[संपादित करें]

मथुरा जिले का प्रसिद्ध मन्दिर। मदन मोहन जी का मन्दिर उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा ज़िले के वृन्दावन नगर में स्थित एक वैष्णव संप्रदाय का मन्दिर है। मदन मोहन जी का यह मन्दिर पुरातनता में गोविन्द देव जी के मंदिर के बाद आता है। यह एक हिन्दू मन्दिर है जो राजस्थान के करौली जिले में स्थित है।

यह मन्दिर अरावली के पहाडों के तट पर स्थित है। इस मन्दिर के संरक्शक देवता श्री कृष्ण हैं। भगवान श्री कृष्ण को ही यह मन्दिर समर्पित है। यह माना जाता है कि श्री गोपाल सिंह जी के दौलताबाद की लडाई में जीत के बाद उनको एक सपना देखा जिसमें भगवान श्री कृष्ण ने उनकी अमेर वाली मूर्ती करौली में लाकर स्थपित करें।इसलिए करौली के राजा ने मूर्ती को करौली के इस मन्दिर में प्रतिष्ठापित किया। यह भी कहा जाता है कि मुगलों से भगवान श्री कृष्ण के मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिए दो मूर्तियों को वृंदावन से लाया गया और उनमें से एक को करौली और दूसरे को जयपुर में रखा गया।

मान्यताएं[संपादित करें]

यह कहा जाता है कि गोवर्धन यात्रा पूरा करने के लिए मदन मोहन जी क यह मन्दिर और गोविन्द देव जी के मन्दिर क यात्रा करना अनिवार्य है। यह करौली जिले के चारों धामों में से एक है। अन्य तीन कैला देवी मन्दिर, मेहँदीपुर बालाजी मन्दिर एवं श्री महावीरजी मन्दिर हैं।भक्त प्रसाद के रूप में लड्डू और कचौरी का भोग चढाते हैं जिसे जुगल प्रसाद कहा जाता है।यह एक व्यक्ति के द्वारा दिन में एक बार ही किया जाता है।भक्त बहुत बडी मात्रा में अमावस्या के दिन में इकट्ठा होते हैं।

इस मन्दिर में भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा की दो मूर्तियाँ हैं।जो तीन और दो फीट ऊँची हैं। इस मन्दिर के निर्माण में करौली के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। उन पत्थरों की वास्तुकला मन को मोहने वाली है।साथ ही यह मन्दिर मध्ययुगीन कला को बहुत ही श्रेष्ठतर रूप से दर्शाता है। मन्दिर के गर्भगृह के चककरदार पथ पर चित्रों की एक बडी सन्ख्या पाया जा सकता है।मन्दिर की वस्तुकला के सुंदरता को गर्भगृह, चौक और यहाँ के बडे जगमोहन में दिखाया गया है।

त्योहार[संपादित करें]

भगवान श्री राधा और श्री कृष्ण से सम्बन्ध रखने वाले त्योहारों को यहाँ के लोगों के द्वारा बडे ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यहाँ आने वाले पर्यटक जन्माष्ट्मी , राधा अष्टमी, गोपष्ट्मी और हिंडोला में भाग ले सकतें हैं। इसके साथ ही यहाँ पर अमावस्या में स्थानीय लोगों के अलावा बाहर से आये हुए पर्यटको> के लिये भी मेला का आयोजन किया जाता है।

यह भव्य मन्दिर काली घाट के पास स्थित है, जो मुल्तान के कपूर रामदास द्वारा बनाया गया था। यह आज वृंदावन में सबसे पुराना विद्यमान मंदिर है। यह मंदिर संत चैतन्य महाप्रभु के साथ बारीकी सम्बध रखता है। भगवान मदन गोपाल की मूल छवि औरंगजेब के शासन के दौरान सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान में करौली को मंदिर से स्थानांतरित कर दिया गया था। आज, छवि की एक प्रतिकृति मंदिर में पूजा जाता है।

यह प्राचीन और भव्य मन्दिर पर्यटकोँ के लिये एक अच्छी पर्यटक स्थल है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

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[2]

  1. madhanmohanmandir.blogspot.com
  2. www.radha.name/images-gallery/.../karoli-karauli-madan-mohan-temple