सदस्य:Deepsi1610434/प्रयोगपृष्ठ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
चीन के टकलामकान में धूल का चक्रवात
टकलामकान रेगिस्तान

टकलामकान[संपादित करें]

टकलामकान के नाम की उत्पत्ति[संपादित करें]

टकलामकान विश्व का एक विशाल मरूस्‍थल है टकलामकान मरुस्थल मध्य एशिया में स्थित एक रेगिस्तान है। इसका अधिकाँश भाग चीन द्वारा नियंत्रित शिंजियांग प्रांत में पड़ता है। शिंजियांग जनवादी गणराज्य चीन का एक स्वायत्तशासी क्षेत्र है। ये एक रेगिस्तानी और शुष्क इलाक़ा है इसलिए इस की आबादी बहुत कम है । शिंजियांग की सरहदें दक्षिण में तिब्बत और भारत , दक्षिण-पूर्व में चिंग हई और गांसू , पूर्व में म्ंगलिया , उत्तर में रुस और पक्ष्चिम में क़ाज़क़स्तान , किरगिज़स्तान , ताजिकिस्तान , अफ़ग़निस्तान और पाकिस्तान से मिलती हैं । भारत क अक्साई चिन क इलाका भी , जिस पर चीन का क़ब्ज़ा है , प्रशासनिक रुप से शिंजियांग में शामिल है । टकलामकान दक्षिण से कुनलुन पर्वत श्रृंखला ,पश्र्चिम से पामीर पर्वतमाला और उत्तर से तियन शान की पहाड़ियों द्वारा घिरा हुआ है। भूवैज्ञानिकों में 'टकलामकान' के नाम के स्रोत को लेकर मतभेद है। कुछ कहते हैं कि यह अरबी भाषा के 'तर्क' यानी 'अलग करना' और 'मकान' यानी 'जगह' के मिश्रण से बना है। यह दोनों शब्द अरबी से उइगु़र भाषा में भी आये हैं और हिंदी में भी। दुसरे विशेषज्ञों की राय है कि यह तुर्की भाषाओं के 'तक़लार माकान' से आया है, जिसका अर्थ है 'खंडहरों की जगह'। यह अफ़वाह भी आम है कि 'टकलामकान' का मतलब 'अन्दर जाओगे ताे बाहर कभी नहीं निकलोगे ' या फिर ' माैत का रेगिस्तान ' है, लेकिन यह महज़ ग़लत अवधारणाएं हैं ।

भूगोल[संपादित करें]

टकलामकान का कुल क्षेत्रफल ३,३७,००० वर्ग किमी है,जिसमें तारिम द्रोणी भी शामिल है। तारिम द्रोणी या तारिम बेसिन मध्य एशिया में स्थित एक विशाल बंद जलसंभर इलाका है जिसका क्षेत्रफल ९०६,५०० वर्ग किमी है । वर्तमान राजनतिक व्यवस्था में तारिम द्रोणी चीनी जनवादी गणराज्य द्वारा नियंत्रित शिंजियांग उइग़ुर स्वराजित प्रदेश नाम के राज्य में स्थित है । तारिम द्रोणी का अधिकतर क्षेत्र रेगिस्तानी है और हलकी आबादी वाला है । यहाँ अधिकतर लोग उइग़ुर और अन्य तुर्की जातियों के है । टकलामकान के उत्तरी और दक्षिणी छाेराें से रेशम मार्ग की दो अलग शाखाएँ निकलती हैं, क्योंकि प्राचीन यात्री इस रेगिस्तान के बीच से निकलने से कतराते थे। इसमें ८५% इलाक़ा हिलती हुए रेत के टीलों का है और यह दुनिया का दूसरा सब से बड़ा खिसकने वाले रेतीले टीलों का रेगिस्तान है। चीन ने २०वीं शताब्दी में इसके दक्षिणी भाग में स्थित ख़ोतान नगर से उत्तरी भाग में स्थित लुनताई शहर के बीच एक सड़क बना दी है जो बीच रेगिस्तान से गुज़रती है। पिछले कुछ सालों से कुछ उपजाऊ इलाके भी रेत की चपेट में आ गए हैं और टकलामकान थोड़ा सा फैल गया है।

मौसम[संपादित करें]

टकलामकान एक ठंडा रेगिस्तान है क्योंकि साइबेरिया से समीप होने से यहाँ सर्द हवाएँ आसानी से पहुँच जाती हैं। सर्दियों में यहाँ तापमान -२० डिग्री सेंटीग्रेड तक गिर जाता है, हालांकि शुष्क परिस्थितियों की वजह से यहाँ ज़्यादा बर्फ़ नहीं गिरती। फिर भी सन २००८ में पूरे टकलामकान में बर्फ़ की एक परत जम गई थी।

इतिहास और संस्कृति[संपादित करें]

टकलामकान के अंदरुनी भाग में पानी बहुत कम है और इसमें  प्रवेश करना ख़तरनाक है। फिर भी इसके इर्द-गिर्द के कुछ शहरों में ओएसिस थे जहाँ रेशम मार्ग पर चल रहे यात्री सस्ताने के लिए रुकते थे। इनमें से बहुत से नगर अब खँडहर बन चुके हैं। इतिहासकारों को यहाँ खोजने पर तुषारी, प्राचीन यूनानी, भारतीय और बौध्द प्रभाव के चिन्ह मिलते हैं।

संदर्भ[संपादित करें]

    • Warner, Thomas T. (2004). Desert Meteorology. Cambridge University Press, 612 pages. ISBN 0-521-81798-6.