सदस्य:Ashwin8558/प्रयोगपृष्ठ/1

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परिचय[संपादित करें]

थाईपूसम एक ऐसा त्योहार है जो तमिल समुदाय के लोग थाई के महीने में मनाते हैं। यह एक हिंदू त्योहार है जो थाई के महीने की पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। यह त्योहार भारत के इलावा और भी अन्य देशों में मनाया जाता है जहाँ कहीं भी हिंदू तमिल समुदाय के लोग पाए जाते हैं। कुछ अन्य देश जहाँ पर यह त्योहार मनाया जाता है उनके नाम हैं; श्रीलंका , मलेशिया , मारिशस , सिंगापुर , साउथ अफ्रीका तथा और भी अन्य देश जहाँ भी हिंदू तमिल समुदाय के लोग पाए जाते हैं। इस त्योहार की तिथि तमिल कलेंडर द्वारा ही तय करी जाती है। यह आमतौर पर जनवरी या फरवरी के महीने में ही मनाया जाता है।

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थाईपूसम का महत्व[संपादित करें]

इसके साथ-साथ कई देशों में तो इस त्योहार के नाम पर राष्ट्रीय अवकाश देकर इसका महत्व और भी बढ़ा दिया है। मलेशिया , श्रीलंका तथा मारिशस जैसे देशों में इस त्योहार के नाम पर सरकारी छुट्टी घोषित है। एक बार सिंगापुर में भी इस त्योहार के नाम पर सरकारी छुट्टी दी गई थी किंतु उसके बाद से इस त्योहार का नाम वहां की छुट्टियों में से हटा दिया गया था। थाईपूसम शब्द दो शब्दों के जोड़ से बना है, थाई तथा पूसम। थाई का अर्थ है कि महीने का नाम तथा पूसम का अर्थ है तारे का नाम। यह एक ऐसा तारा है जो इस त्योहार के समय सबसे ज्यादा दूरी पर स्थित होता है।

रहस्य[संपादित करें]

थाईपूसम त्योहार को भगवान कार्तिकेय के सम्मान में मनाया जाता है, जो कि भगवान शिव तथा पार्वती के पुत्र हैं। माना जाता है कि भगवान कार्तिकेय ने ताड़कासुर की बुरी सेना को नष्ट करने के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया था जिसके कारण इस त्योहार की महत्वपूर्णता और भी बढ़ चुकी है। इस चीज़ के इलावा इस त्योहार के साथ और भी अन्य महत्वपूर्ण चीज़ें जुड़ी हुई हैं जिनके बारे में केवल गिने-चुने लोग ही जानते हैं। इस त्योहार के साथ ऐसी कहानियों के जुड़े होने के कारण ही इस त्योहार का महत्व लोगों के मन में बहुत बढ़ चुका है। ऐसा भी कहा जाता है कि ४८ दिनों के उपवास के दौरान कई श्रद्धालु अपने शरीर को कटार आदि की मदद से छेद करते हैं, माना जाता है कि यह भी इस अद्वितीय त्योहार की एक प्रकार की कला है जो कई लोग आज भी करते हैं। कुछ लोग तो ऐसा करने के बाद कई भारी वाहनों को भी खीचने की प्रतिक्रिया करते हैं, जैसे कि ट्रैक्टर को खींचना या इससे भी अधिक भारी वाहनों को खींचने का कार्य करना आदि। कई भक्त तो ऐसे होते हैं जो अपनी जीभ में छेद करते हैं ताकि वह पूरी तरह प्रभु की भक्ति में लीन हो सकें तथा अच्छे से अपने भगवान को खुश कर सकें। ऐसे सभी कार्य इस त्योहार को कमज़ोर दिल वालों के लिए एक चिंता का विषय बन गए हैं क्योंकि वे लोग इन सब कार्यों को सही नहीं मानते। यह त्यौहार एक परंपरा के मुताबिक था, माना जाता है कि असुर (या अधिक विशिष्ट सूरापडमैन) और देवताओं के बीच लड़ाई में से एक के दौरान अनुमान लगाया गया था। एक बिंदु पर, उत्तरार्द्ध पहले कई बार हार गए थे। देवता असुरा बलों के हमले का विरोध करने में असमर्थ थे। निराशा में, उन्होंने शिव से संपर्क किया और उन्हें एक सक्षम नेता देने के लिए अनुरोध किया, जिनके मकसद के नेतृत्व में वे असुरसों पर विजय प्राप्त कर सकें। उन्होंने स्वयं को आत्मसमर्पण कर दिया और शिव से प्रार्थना की शिव ने शक्तिशाली योद्धा, स्कंद, अपनी शक्ति या अचिन्ता शक्ति का निर्माण करके उनके अनुरोध को मंजूरी दी थी। उन्होंने एक बार में दिव्य ताकतों के नेतृत्व ग्रहण किया, उन्हें प्रेरित किया और असुरा बलों को पराजित किया और उस दिन को पहचानने के लिए त्योहार , थाईपूसम बनाया।

पौराणिक महत्वता[संपादित करें]

स्कंद पुराणम के अनुसार, मुरुगन के पौराणिक कथा, और थुरुगुगुगल जो मुरुगन पर ईश्वरीय वचन हैं, शैवम सिद्धांतों का पालन करते हैं। मुरुगन शिव के प्रकाश और ज्ञान का प्रतीक है और भक्त उनके सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रार्थना करते हैं, क्योंकि वह बुराई का दैवीय विजय प्राप्तकर्ता है। थाईपूसम त्योहार का मकसद ईश्वर से अपनी कृपा को प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करना है ताकि बुरे लक्षण नष्ट हो जाएं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]