सदस्य:Arpita agrawal

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नयनतारा सहगल[संपादित करें]

Nayantara Sahagal,Indian writer in English language,India.jpg

नयनतारा सहगल का जन्म 10 मई, १९२७ को भारत के सबसे प्रमुख राजनीतिक परिवारों में से एक में हुआ था । उनकी मां विजयालक्श्मी पंडित भारत के प्रथम यू.एन् राजदूत महिला थी। नयनतारा सहगल, अंग्रेज़ी में मान्यता प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला लेखक में से एक है. वह जवाहरलाल नेहरूजी की बहन विजया लक्ष्मी पंडित की बेटी है तथा नेहरु जी की भतीजी. यद्यपि वह नेहरू-गांधी परिवार का हिस्सा थी, तथपि उन्होने खुद सफलता की राह की खोज की। उन्की दो बार शादी हो चुकि थी. बाद में उन्होने एक भारतीय सिविल सेवा अधिकारी एन मंगल राय से शादी की जिनकी मृत्यु २००३ में हो गई थी। ' रिच लाइक अस' जैसे उपन्यास के लिए उन्हे साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था। उनका पहला उपन्यास, 'ए टाइम टू बी हैप्पी', भारतीय स्वतंत्रता की सुबह प्रस्तुत करता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि[संपादित करें]

यह कही जा सकती है कि राजनीति उसके खून में है. जवाहरलाल नेहरू उनकी मां के भाई थे। उनके पिता की मृत्यु तब हुई थी जब उन्होने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए जेल मे बिमरी हो गयी थी। यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना उनके प्रत्येक उपन्यास के लिए पृष्ठभूमि बनाती है. सहगल के पास भारतीय राजनीतिक आंकड़े का ज्ञान है, क्योंकि उन्होंने अपने बचपन का अधिकांश समय आनंद भवन में बिताया था जो इलाहाबाद के नेहरूओ का पैतृक घर था. उनके जन्म और उनकी परवरिश के कारण, सहगल पश्चिमी-शिक्षित भारतीय के लिए एक आदर्श प्रवक्ता हैं जो भारत के साथ सम्वाद करने मे कठिनाईओ का सामना करता है। यह देश के प्रती उन्की चिंता है, जिसने उन्हे अपने चचेरी बहिन इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल के विरुध में विरोध किया, जब ज्यादातर भारतीय लेखकों ने चुप रहना पसंद किया था।

विचार[संपादित करें]

उनके अन्य उपन्यासों के अनुसार, सहगल ने सुझाव दिया है कि विवाह सिर्फ एक संबंध नहीं है, बल्कि इसका मतलब पुरुष महिला को समान पदों पर सहयोग देना है। वह मानव संबंधों में एक बुनियादी ईमानदारी का होना ज़रुरी समझती है अवम उस्के लिए अनुरोध करती है, चाहे वह पुरुष और स्त्री या शासक और शासन के बीच हो. भारत में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता ' के विरोध में पुरस्कार अस्विकार करने के सहगल के इस फैसले पर लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे है, क्योंकि लेखिका ने १९८४ में सिख दंगों के सिर्फ दो साल बाद यह पुरस्कार स्वीकार किया था ।लेखिका नयनतारा सहगल फिलहाल" नरेंद्र मोदी सरकार के देश की सांस्कृतिक विविधता कायम न रख पाने के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने के अपने रूख के लिए खबरों में हैं। वह महिलाओं को पहचान के लिए अपनी खोज में लगे, पारंपरिक भारतीय समाज के शिकार के रूप में देखती है।

उपन्यास[संपादित करें]

नयनतारा सहगल ने १९७२ से १९७५ तक अंग्रेजी के लिए साहित्य अकादमी बोर्ड के सलाहकार के रूप में कार्य किया । कांग्रेस के पुस्तकालय में उनके द्वारा चौबीस कार्य जमा है। उन्हे नागरिक अधिकारों के लिए 'पीपुल्स यूनियन' के उपाध्यक्ष के पद पर आयोजित किया गया है । उन्होने ' मेमोइर प्रिसन् ' और ' चॉकलेट केक ', जो १९५४ में प्रकाशित किया गया था के साथ शुरुआत किया था, अवम अन्य राजनीतिक लेखन प्रकाशित किये-'फ्रीदम मूवमेन्त इन ईन्दिया ' और ' इंदिरा गांधी ', ' हर रोड टू पावर '। इन सब के अलावा उन्होने निबंध भी लिखे और जागरुकता फैलाई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

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[2]

  1. https://www.ndtv.com/india-news/writer-nayantara-sahgal-returns-sahitya-akademi-award-1228565
  2. https://www.indiatoday.in/who-is-what-is/story/who-is-nayantara-sahgal-why-did-she-return-her-sahitya-akademi-award-266854-2015-10-07