सदस्य:Ankitaghosh09/बंगाल की संस्कृति और परंपरा

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पश्चिम बंगाल की संस्कृति भारत में सबसे अमीर संस्कृतियों में से एक माना जाता है। इन वर्षों में, पश्चिम बंगाल की संस्कृति को आधुनिकता और परंपराओं का सही मिश्रण के रूप में उभरा है। हुगली, पूर्वी हिमालय की खूबसूरती, सुंदरबन की विविधता और चाय बागानों की ताजगी यह सब मिलकर बंगाल का बहुत ही मुक्या हिस्सा बानते हैं। बंगाली संस्कृति का जड़ उसकी बंगाली संगीत, बंगाली सिनेमा और बंगाली साहित्य में भी है। स्वादिष्ट बंगाली व्यंजनों भी हमारे देश की संस्कृति का बहुत ही अहं हिस्सा है।

बंगाल की प्रसिद्द्ध् दुर्गा पूजा

बंगाल की इतिहास[संपादित करें]

बंगाल की वर्तमान संस्कृति का जङ राज्य के इतिहास में है। बंगाल में कई राजाऒं का राज होने के कारण वाहं के इतिहास में अनेक संस्कृतियौं की मिलावट दिखाई देती है। वहां मौर्यों, गुप्त और पलस का शासन रहा था। सेना के राजवंश बंगाल को कुतुब-दीन-आइबक जो दिल्ली के सुल्तान थे, से हार गए थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद, बंगाल, स्वतंत्र प्रशासन को चलाने के मुस्लिम राज्यपालों की मदद लेने लगा। १९४७ में भारत की आजादी के साथ, बंगाल के पूर्व और पश्चिम बंगाल में विभाजित किया गया था।

बंगाल के धर्म[संपादित करें]

भारात के लघभग सारे धर्मौं के लोग बंगाल में निवास करते हैं। लेकिन यहाँ हिंदू और मुस्लिम वर्चस्व अभी भी तस है। राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय में ईसाई, बौद्ध, सिख और जैन शामिल हैं। मेलों और त्यौहारों बंगाल के सभी धर्मों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कहा जाता है कि बंगाल में, हर मौसम में, हर क्षेत्र और हर अवसर के लिए एक त्योहार है।, दुर्गा पूजा, दीवाली और ईद के अलावा, छोटे संप्रदायों विभिन्न मेलों और दरगाह का भी आयोजन करते हैं।

बंगाल में नाटक और फिल्में[संपादित करें]

बंगाल के लोक नाटक को "जात्रा" के नाम से जाना जाता है। कोलकाता वाहाँ की सिनेमा का सबसे मुख्या शहार है और उसे "टौलीवूड" के नाम से जाना जाता है। सत्यजीत रे, ऋत्विक घटक, मृणाल सेन, तपन सिन्हा जैसे पुराने निर्देशक बंगाल से थे। उन्हें अकादमी पुरस्कार से सम्मनित किया गाया था। इस जगह ने हमें अपर्णा सेन, बुद्धदेव दासगुप्ता, गौतम घोष, कौशिक गांगुली, रितुपर्णो घोष, अंजन दत्त जैसे समकालीन निर्देशक भी दिये हैं।

पोशाक[संपादित करें]

बंगाली महिलाओं को पारंपरिक साड़ी और सलवार कमीज पहनती हैं। युवा और पेशेवर महिलाऍं पश्चिमी पोशाक भी पहनती हैं। लङकों पर धोती, पंजाबी, कुर्ता, शेरवानी, पायजामा और लुंगी शादियों और दुर्गा पूजा, सरस्वती पूजा और ईद जैसे त्योहारों के दौरान देखे जाते हैं। किसी भी अन्य महानगर की तराह, कोल्काता में, जातीय परिधानों हैं और पश्चिमी परिधानों का एक मिश्रण है।

बंगाल का भोजन[संपादित करें]

बंगाल की मिटठाई

वाहाँ का मूल भोजन उबले हुए चावल और रोटी हैं जोकी अनेक प्रकार की सब्जियों के साथ परोसी जाती हैं। उनके साथ मछली, मटन और चिकन के अंडे और मांस को भी परोसा जाता है। याहाँ की मिटठाईयाँ पूरे देश में बहुत प्रसिद्ध हैं जैसे - दोई, संदेश, कालो जामुन, आदि। मछली प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। याहाँ ४० से ज़्यादा मीठए पानी वाली मछलियाँ हैं जैसे - झींगा, सहित , केकड़ों, कस्तूरी, सूखे समुद्र में मछली, रुई (रोहू) आदि पाए जाते हैं। नमक पानी की मछली "हिल्सा" बंगालियों के बीच बहुत लोकप्रिय है। मुगल के बिरयानी, कबाब, एंग्लो-इंडियन, कॉन्टिनेंटल, चाइनीज, लेबनान, थाई और अन्य प्रांतीय खानो के कारण युवा पीढ़ी को खाने के लिए अन्य प्रकार का भोजन मिलने लगा है।

संदर्भ[संपादित करें]

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  1. http://www.indianmirror.com/culture/states-culture/westbengal.html
  2. http://www.bharatonline.com/west-bengal/culture/
  3. http://bengalnet.tripod.com/culture_traditions.htm