सदस्य:Akashkmishra/प्रयोगपृष्ठ/1

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Durga Temple at Rajnagar.jpg

बिहर कि संस्कृति[संपादित करें]

बिहार की सनस्क्रति सदियों पुरानी है।इसका नस्ली समूह भारतीय आर्यन से आता है।बिहार की भाषा जिससे आम तोर पे बिहारी माना जाता है उसमे कई भाषा आते है जैसे की मगही बज्जका भोजपुरी मैथिलि और उर्दू।ये माना जाता है की बिहार सबसे पुराने बसे हुए जगह में से है और देश की तीसरी सबसे बड़ी राज्य है।बिहार की सनस्क्रति और परनापारा काफी बड़ी मानी जाती है और इससे काफी सारि कलाओ का घर भी माना जाता है।बुद्धिज़्म का जनम बिहार में ही हुआ था और उधर ही मौर्या रजवानाश का भी जन्म हुआ था।बिहार में बहुत सारे राष्ट्रजन और अंतर्राष्ट्रीय दूरदर्शन नाला है जैसे की दद बिहार सहारा बिहार और एटीव् बिहार.२००८ दो दूरदर्शन नाला बिहार के लिए ही बनाए गए थे जो भोजपुरी भाषा में थे।बिहार में काफी सारे रेडियो नाला भी है जैसे कि आल इंडिया रेडियो जिसका केन्द्र कई जगह पे है,ज्ञान वाणी,रेडियो मिर्ची और रेडियो धमाल।

चित्र करि[संपादित करें]

बिहार अपने चित्र् कला के भी प्रसिद्ध है।यहाँ की चित्र्करी जिसका नाम मिथला पेंटिंग है जो मधुबनी पेंटिंग के नाम से प्रसिद्ध है।इन् कित्रो का ख़ास बात ये है की ये कीटर चावल के बने रंगों से बनते है।कहते है की इस चित्र् करि का सुरुवात रामायण के समाये हुआ था जब राजा जनक के भगवन राम और रिता के विवाह के चित्र् दीवार पे बनवाये थे।

मिष्ठान,फल् और खेती[संपादित करें]

बिहार अपने मिठाई के लिए काफी जाना जाता है।बिहार के कुछ प्रचलित मिठाइ में है माल पुआ,बासुंदी,राबड़ी,काले जामुन,मोती चूर के लडडू,मिठा खाजा,टिल बर्फी,पैदा,माखन का खीर,ठेकुआ,लक्तो,खुरमा,पोस्ता दाना का हलवा और लसर।लिट्टी चोखा और सत्तू काफी प्रचलित है बिहार में।बिहार में सुभे का नास्ते में सत्तू ज़ज़ूर होता है।बिहार में तरह तरह के पराठे भी बनते है।बिहार की अधिकांश लोग खेती से जुड़े होते है।चावल,गेहू,मसूर,मक्का,चिन्नी फिर फल में आम,केला,लीची उनके प्रमुख फसल में से है।बिहार में रेशम का उत्पाती भी होता है।

लेखक,गीत् और कवि[संपादित करें]

बिहार से काफ़ी बड़े हिंदी लेखक निकले जैसे कि जानकी बल्लभ शश्री,राजा राधिका रमण सिंह,शिव पूजन सहाय,दिवाकर विद्यार्थी,गोपाल सिंह,शंकर दयाल सिंह,बाबा नागार्जुन और भी कई लेखक बिहार से है।बहुत सरे उर्दू विद्वान् लेखक और कवि भी बिहार से है जैसे की शाद अज़ीमाबादी जमील मज़हरी मौलाना शबनम कमली कैफ अज़ीमाबादी इनाम आज़मी और बिस्मिल अज़ीमाबादी जिन्होंने काफी प्रचलित ग़ज़ल सरफ़रोशी की तमना अब हमारे दिल में है लिखा था।बिहार से हिंदुस्तानी पारम्परिक संजीत में बहुत सारे योग दान रहे है.बिहार से बहुत सारे बड़े गायक निकले है जैसे कि बिस्मिल्लाह खान,मॉलिक्स जो दरभंगा घराने के थे और मिश्रास जो बेट्टा घराने के थे।बिहार के बहुत सारे परनापारिक लोग गीत है अलग अलग औसर पे गया जाता है जैसे की शादी,जनम दिवस और उत्सव पे।बिहार में नाट्यशाला के अलग अलग रुप है जैसे की बिदेसिअ,रेश्मा चुहरमल,बिहुला बिसहरी,बहुरा गोरिन,राजा सलहेस,समां चकेवा और डॉम कच।ये नाट्यशाला के रूप अंग नामक जगह से जनम लिए है।बिहार के नाटयशाला के उद्धार में सतीश आनंद नामक व्यक्ति का काफी बड़ा हाथ था।

उत्सव[संपादित करें]

बिहार बहुत सारे उत्सव काफी अचे बनाया जाता है।इनमे से एक उत्सव छठ है।छठ में सूर्य देवता की पूजा की जाती है।छठ को डाला छठ भी कहा जाता है।ये उत्सव साल में दो बार मनाया जाता है।एक बार गर्मी के मौसम में जिसे चैती छठ कहा जाता है और दूसरी बार दीपावली के एक हफ्ते बाद जिससे कार्तिक छठ कहा जाता है।छठ ये दोरान लोग उपवास रखते है जिसमे वे पानी तक नहीं पीते।ऐसे ही एक और उत्सव जो बिहार के मिथिलांचल में मनाया जाता है वो है समां चकेवा जिस्से समां चकेबा के नाम से भी जानना जाता है।ये एक हिन्दू उत्सव है जिसमें बहन अपने भाई के पूजा करती है।बिहार में और बहुत सारे उत्सव बनाये जाते है जैसे तीज चित्रगुप्त पूजा बुद्ध पूर्णिमा रामनवमी मकर संक्रांति जो एक फसल काटने का उत्सव होता है और सोनपुर मेला जहां जानवरों का मेला लगता है और ये मेला १५ दिन तक चलता है।

पहनावा[संपादित करें]

आज कल के ज़माने नए ज़माने के कपडे काफी प्रचलित हो चुके है बिहार पर फिर अभी मूल कपड़ो का भाव नहीं भूले।पुरुष के कपड़ो में आता है धोती कुरता और खरौन।महिला के कपड़ो में आता है सारी जिसका सीधा अंचल तरीका काफी प्रचलित है।आज कल महिलाओं में सलवार कमीज भी काफी प्रचलित है बिहार में। [1]

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  1. https://en.wikipedia.org/wiki/Bihari_culture
  2. https://commons.wikimedia.org/wiki/Main_Page