सदस्य:Abishekrl15156/कुमारास्वामी खामराज

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कुमारास्वामी खामराज

जन्म 15 जुलाई, 1903
विरुधुनगर, मदुरै, तमिलनाडु
मृत्यु 2 अक्टूबर, 1975
राजनैतिक दल कांग्रेस

मुख्यमंत्री=मदुरै (तमिलनाडु) पुरस्कार=भारत रत्‍न,1976

हस्ताक्षर Abishekrl15156/कुमारास्वामी खामराज's signature


कुमारास्वामी खामराज की प्रतिमा

कुमारास्वामी खामराज(१५ जुलाई १९०३ - २ अक्तुब्र्र्र १९७५)।१९६० के दोरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे ।वे १९६४ से १९६७ के बीच कांग्रेस के अध्येक्श रह चुके थे और लाल बहादुर शास्त्री को भारत के प्रधान मंत्रि बनने में उनका मुखय योगदान रहा है ।खामराज १०५४-१९६३ के दोरान तमिलनाद्दु के मुखयम्ंत्रि रहे एवं १९५२ - १९५४ तथा १९६७ - १९७५ के दोरान भारतीय संसद के सदस्य रहें ।वे अपनी सरलता एवं सत्यनिष्ठा के लिए जाने जाते है ।वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय थे।जवाहरलाल नेहरू की मुत्यु के बाद उन्होंने पार्टी का सफलतापूर्वैक संचालन किया ।तमिलनाडु जो कि उनका जन्मस्थान था, वहाँ आज भी लोग उन्को याद करते है क्योंकि उनहोंने ग्रामिण गरीबों को शिक्शा एवं मुफ्त में दोपहर के खाने की योजना शुरू की थी ।वर्ष १९७६ में उनको भारत के सर्वोच्च सम्मान "भारत रत्न "से सम्मानित किया गया ।

प्रारम्भिक जीवन[संपादित करें]

कुमारास्वामी खामराज का जन्म १५ जुलाई १९०३ में तमिलनाडु के विरूदुनगर में हुआ था ।उन्के माता - पिता का नाम सिवगामी एव्ं कुमारस्वामी था ।वास्तव में उनका नाम कामाक्षी था परन्तु बाद में कुमारास्वामी खामराज हो गया क्योंकि वह स्त्री का नाम लगा रहा था ।

राजनीति में प्रवेश[संपादित करें]

भारतिय स्वशासन अभियान के दौरान उन्होंने जुलूस में भाग लेना शुरू किया तथा सार्वजनिक बैट्टकों को भाग लिया।समाचार पत्रों को पडने के जारिए खामराज को राजनीति में रूपि बद गई ।जलियानवाला बाग हत्याकांड उसके जीवन में मुख्य माडे लेकर आया।उन्होंने तय कर लिया कि उनके जीवन का मुख्य उद्द्द्देश्य राश्त्रिय स्वतंत्रता संग्राम में लेकर विदेशी शासन को खत्म करना था।१८ साल के उम्र में,वे सक्रिय राजनीति बन गए एवं कांग्रेस के लिए पूणैकालिक कामिक बन गए ।जब गांधि ने २१ सितम्बर १९२१ को मधुरे का दोरा किया तब कुमारास्वामी खामराज ने पहली बार बैटक में उनसे मुलाकात की । उन्होंने गॉंव-गॉंव कांग्रेस का प्रचार प्रसार किया ।उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया ।खामराज ने मद्रास में ब्रिटिश शासन के विरूद सभी आंदोलन तथा प्रदर्शन में भाग लिया ।कुमारास्वामी खामराज को सबसे पहले जून १९३० में जेल भेजा गया ।कुमारास्वामी खामराज को ब्रिटिश के विरूद आचरण पर ६ बार जेल भेजा गया जो कि ३,००० दिन से ज्यादा था ।

मुख्य मंत्री के रुप मे योगदान[संपादित करें]

१३ अप्रैल १९५४ को कुमारास्वामी खामराज मद्रास प्रान्त के मुख्य मंत्री बने।इस राज्य ने शिक्षा एवं व्यापार के क्षेत्र में उन्नति की ।गरीब विद्यार्थियों के लिए नए स्कूल खोले गए ।जिसमें बच्चों को तीन किलोमीटर से अधिक की दूरी स्छूल के लिए ना हो।स्छूलों में अटटि सुविधाएं दो गई ।कोई गांव ऐसा नहीं था जिसमें प्रार्थमिक विद्धालय ना हो तथा कोई पंचायत ऐसि नहिं थी ग जिसमें हाई-स्छूल ना हो ।कुमारास्वामी खामराज ने अशिक्षा उन्नमूल्न के लिए ग्यारहवीं तक शिक्षा मुप्पत की ।उन्होंने मुप्पत अपराहन भोजन की स्कूलों में व्यवस्था की तथा स्छूल की वर्दि भी मुप्पत में प्रदान करावि यह कार्य करते समय जाति , वर्ग - विशेण तथा किसि प्रकार के वर्ण को ध्यान में न नहीं रखा गया । कुमारास्वामी खामराज मेरिना बीच में रखि गई प्रतिमा राज्य में शिक्षा की उन्नति को दर्शिति है । स्छूलों में विदिर्याथियों कि सौख्यथा को तो ध्यान में रखा हो गया तथा साथ ही साथ इसके अलावा शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए कई प्रयास किए गए । सन १९५९ में कुमारास्वामी खामराज एवं महामहिम बिश्णुराम मोधि (राज्यपाल) के प्रयासों से मद्रास में आईआईटै की ह्थापना हुई । कुमारास्वामी खामराज के कार्यकाल में कई बडी सिंचाई योजनाएं बनी । भवानी , मणि मुथार , आरनी , वैगै , अमरावती , सातानूर , क्रिशनगिरि , पुलबंडि , पारंबिकुलम एवं नेयूरू में कई बांध एवं सिंचाई तथा नहरें बनाई गई । किसानों को लम्बि अवधि हेतु २५% अनुदान पर लोन दिए गए । किसान , जिनके यास सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध नहिं थि , उनको विध्युत पम्प एवं आईल ईजिन क्ंतों में दिए गए । इनके शासनकाल में राज्य में उध्योगों हेतु बदी पूणि लगाई गई । इनके शासनकाल में नैवेलि लिग्नाइट कारपोरेशन , बि हेच ई एल त्रिछि में , मनाली तेल शोधक खारखाना , ऊटी में हिंदुस्थान फोटो फिल्म्स फच्तोर्य, छेन्नै में शल्य क्रिया हेतु उपकर्णो कि फच्तोर्य , छेन्नै मे रेल्वे कोच फच्तोर्य तथा काग्ज , चीनी , रसायन एवं सिमेंट की फच्तोर्य इनके राज में ल्ग्गई गई ।

कुमारास्वामी खामराज की योजना[संपादित करें]

कुमारास्वामी खामराज तीन बार मुख्यमन्त्रि रहे । उनहोंने १९५७ एव्ं १९६२ मे चुनाव जीता ।कुमारास्वामी खामराज ने देखा कि कांग्रेस पार्टि धीरे - धीरे अपना अस्थित्व रेवा गई है।इसलिए २ अक्तूबर १९६३ गानधी जयंती के दिन उन्होंने तमिलनाडु के मुक्यमनत्रि के पद को त्याग कर दिय।उन्होंने कहा कि सबी कांग्रेस के ज्येष्ठ मन्त्रियों को अपने पद से इस्तीफ़ा देकर अपनी शक्ति एवं कार्य कांग्रेस पारी को पुनर्जीवित करने के लिये लगाए।उन्होंने १९६३ में नेहरू जी को पट सुझाव दिया कि कांग्रेस के ज्येष्ठ मन्त्रियों को अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा देकर अपनी शक्तियों को संगटन के पुनर्जीवित कार्य में लगये।पट सुझाव को खामराज योजना कहा जने लगा।जिसके कारण कांग्रेसियों को संगटन के कार्य करने हेतु प्रेरणा मिली।६:केन्द्राय मंत्री जिसमें लाल बहादुर शास्त्री,जगजीवन राम,मोरारजी देसाई,बीजु पटनायक,स क पाटिल अन्य मनत्रियों ने अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया।प्रधान मंत्री नेहरू ने महसूस किया कि अपनी-अपनी ओर से सेवाओं की राष्ट्र का आवशयकता हे अत:उनहोनें इस्तीफ़ा नही दी ।नेहरू जी ने पट महसूस की कि खामराज जी में असामान्य क्षमता और दृष्टि थी।इसका इसतेमाल किया जाए।इसी वरित परिपेक्षम में खामराज को दिल्लि बुलाकर कांग्रेस संगट्टन का अध्यक्ष बनाया गया।खामराज ९ अक्टूबर १९६३ को कांग्रेस पारटी के अध्यक्ष चुने गए।

राष्ट्रीय राजनीति[संपादित करें]

1964 में नेहरू की मृत्यु के बाद खामराज जी ने सफलतापूर्वक अशांत समय में पार्टी का मार्गदर्शन की।भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में वे अगले स्वयं प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया और अगले दोनों प्रधानमंत्रियों को 1964 में लाल बहादुर शास्त्री और नेहरू की बेटी इंदिरा गांधी को 1966 में इस भूमिका के लिए सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।उनको इस कार्य के लिये १९६० के दशक में "किंग मेकर" के रूप से जाने लगे।कांग्रेस के 1969 विभाजन के दौरान वे तमिलनाडु में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (संगठन) के नेता बन गए। उन्होंने 1975 में अपनी मृत्यु तक कांग्रेस (ओ) के नेता के रूप में बने रहे।

मृत्यु[संपादित करें]

खामराज जी अपने घर में गांधी जयंती के दिन पर (2 अक्टूबर 1975) नींद में निधन हो गए, जो संयोग से अपने इस्तीफे की 12 वीं सालगिरह थी। वह 72 वर्ष की आयु में में निधन हो गए।

महानता[संपादित करें]

खामराज यादगार

उन्हें मृत्यु के पश्चात 1976 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न के उपाधि से सम्मानित किया गया।तमिलनाडु में उनको शिक्षा के पिता के रूप में याद किया जाता है।चेन्नई का घरेलू हवाई उड़ान अड्डे के टर्मिनल को"कामराज टर्मिनल" नाम दिया गया है। चेन्नई समुद्र तट के मरिना बीच सड़क "कामराज सालाई"के रूप में जानी जाती है। उनके सम्मान में मदुरै यूनिवर्सिटी को खामराज यूनिवर्सिटी के नाम दिया गया है।बैंगलोर के उत्तर परेड रोड और नई दिल्ली में संसद मार्ग उनके सम्मान में उन्के नाम पर है।

लोकप्रिय संस्कृति[संपादित करें]

2004 में इन्के बारे में खामराज के शीर्षक से एक तमिल फिल्म खामराज के जीवन इतिहास के आधार पर बनाया गया था।फिल्म के अंग्रेजी संस्करण 2007 में डीवीडी पर जारी किया गया था।

संदर्भ[संपादित करें]

[1]

[2]

  1. https://en.wikipedia.org/wiki/K._Kamaraj
  2. Kamaraj: The Life and Times of K. Kamaraj Book by Jeyaraman Bala