सदस्य:प्रेम जनमेजय

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जन्मः18मार्च1949,इलाहबाद     शिक्षा: एम ए, एम लिट्, पीएच डी

शिक्षा, साहित्य एवं भाषा के क्षेत्र में प्रेम जनमेजय एक सुपरिचित नाम है। इन्होंने न केवल हिंदी  व्यंग्य साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है अपितु दिल्ली विश्वविद्यालय में 40 वर्षो तक तथा यूनिवर्सिटी आॅफ वेस्ट इंडीज में चार वर्ष तक अतिथि आचार्य के रूप में हिंदी  साहित्य एवं भाषा शिक्षण माध्यम को नई दिशाए दी हैं। त्रिनिदाद और टुबैगो में इन्होंने शिक्षण के माध्यम के रूप में ‘बातचीत क्लब’ ‘हिंदी निधि स्वर’ नुक्कड़ नाटकों  का प्रयोग किया जो सफल रहा।  इनके द्वारा आंरभ किए गए ‘बातचीत क्लब’ आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दस वर्ष तक श्री कन्हैयालाल नंदन के साथ सहयोगी संपादक की भूमिका निभाने के अतिरिक्त एक वर्ष तक ‘गगनांचल’का संपादन भी किया है। इनके द्वारा लिखित ‘जहाजी चालीसा’ का लोकार्पण त्रिनिदाद और टुबैगो के  तत्कालीन प्रधानमंत्री  बासदेव पांडेय ने किया था। सन् 2002 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की अकादमिक समिति के अध्यक्ष एवं सयोजन समिति के सदस्य थे। भोपाल में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन के ‘विदेशों मेंहिंदी  शिक्षण ’ सत्र के अध्यक्ष थे। 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन के‘प्रवासी संसारःभाषा एवं संस्कृति’ बीज वक्ता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

रूसी सांस्कृतिक केंद्र दिल्ली की संस्था ‘इंडो रशियन लिटरेरी क्लब’ के महासचिव के रूप में प्रेम जनमेजय ने न केवल हिंदी साहित्य पर अपितु रूसी साहित्य पर अनेक संगोष्ठियों का सफल संचालन एवं संयोजन किया साहित्य अकादमी, सांस्कृतिक संबंध परिषद् एवं अक्षरम् के संयुक्त तत्वावधन में आयोजित‘प्रवासी हिंदी उत्सव -2006, 2007 एवं 2008 की अकादमिक समिति के संयोजक के रूप में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका,लंदन, न्यू यार्क, मलेशिया, नेपाल, बाली आदि में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में महत्वपूर्ण अकादमिक भूमिकाएं निभाईं हैं।

प्रकाशित कृतियांः                                                                     

व्यंग्य संकलन -राजधनी में गंवार , बेर्शममेव जयते , पुलिस ! पुलिस ! , मैं नहीं माखन खायो आत्मा महाठगिनी , मेरी इक्यावन व्यंग्य रचनाएं , शर्म मुझको मगर क्योें आती ! डूबते सूरज का इश्क, कौन कुटिल खल कामी,मेरी इक्यावन श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएं, ज्यों ज्यों बूड़े श्याम रंग, संकलित व्यंग्य, कोई मैं झूठ बोलया, लीला चालू आहे! भ्रष्टाचार के सैनिक ।                                                 

नाटक:‘प्रेम जनमेजय के दो व्यंग्य नाटक’                                                             

संस्मरणात्मक कृति  : मेरे हिस्से के नरेंद्र कोहली                                                           

संपादन  : पिछले 12 वर्ष से प्रसिद्ध्र  व्यंग्य पत्रिका ‘व्यंग्य यात्रा’ के संपादक एवं प्रकाशक। बींसवीं शताब्दी उत्कृष्ट साहित्य:व्यंग्य रचनाएं , नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित ‘हिंदी हास्य व्यंग्य संकलन ’ श्रीलाल शुक्ल के सहयोगी संपादक, हिंदी व्यंग्य का समकालीन परिदृश्य, मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचना ,श्रीलाल शुक्लःविचार विश्लेषण एवं जीवन , ‘व्यंग्य सर्जकः नरेंद्र कोहली, ‘उत्कृष्ट व्यंग्य रचनाएं’, दिविक रमेशः आलोचना की दहलीज पर’ ,हंसते हुए रोना’, हिंदी व्यंग्य का नावक: शरद जोशी, ‘ खुली धूप  में नाव पर - रवीन्द्रनाथ त्यागी’, हिंदी व्यंग्य की धर्मिक पुस्तकः हरिशंकर परसाई।

सम्मान / पुरस्कार: शरद जोशी राष्ट्रीय सम्मान (मध्य प्रदेश  सरकार) पं0 श्रीनारायण चतुर्वेदी सम्मान ( उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान) , हरिशंकर परसाई स्मृति पुरस्कार, दुष्यंत कुमार अलंकरण ,  हिंदी अकादमी साहित्यकार सम्मान ( दिल्ली सरकार) , पं0 बृजलाल द्विवेदी साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान, शिवकुमार शास्त्री  व्यंग्य सम्मान ,‘व्यंग्यश्री सम्मान’, कमला गोइन्का व्यंग्यभूषण सम्मान, आचार्य निरंजननाथ सम्मान, भारत भास्कर शिखर सम्मान, ‘नई धारा ’ रचना सम्मन, हिन्दी हिंदी निधि  भारतीय विद्या संस्थान, त्रिनिडाड एवं टुबैगो आदि।                                                                                            संपर्क: 73 साक्षर अपार्टमेंट्स ए-3 पश्चिम विहार नई दिल्ली -110063