सदस्य:प्रखर वक्ता

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

परिचय-प्रसन्न सोनी मध्य प्रदेश के सीधी जिले सहित देश के प्रसिद्द एवं सक्रिय रंगकर्मी हैं, जो कि पिछले 18 वर्षों से रंगमंचीय क्षेत्र में सक्रियता से कार्य कर रहे हैं|

व्यक्तिगत जीवन- प्रसन्न सोनी का जन्म 4 फरवरी, 1987 को मध्य प्रदेश के सीधी जिले में हुआ|। माता-स्वर्गीय श्रीमती शान्ति देवी, जो कि गृहणी एवं पिता स्वर्गीय श्री नन्हेलाल सोनी, शासकीय विद्यालय में शिक्षक एवं प्रसिद्द गायक थे।

शिक्षा-प्रसन्न सोनी की प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी गृह नगर सीधी में ही सम्पन्न हुई| प्रसन्न ने बी.कॉम. एवं समाजशास्त्र से एम.ए किया है|

रंगयात्रा- प्रसन्न सोनी को कला उनके पिता से विरासत में मिली है। इसीलिए उनका रुझान बचपन से ही नाट्य विधा की ओर रहा है। वर्ष 2000 में 13 वर्ष की आयु में ही रंगमंच से जुड़ाव हुआ। तब से लेकर अब तक यह यात्रा अनवरत जारी है। सीधी में गुरु अशोक तिवारी के साथ अभिनय की शुरुआत करते हुए, नट बुन्देले भोपाल में श्री अलखनन्दन से रंगकर्म की बारीकियाँ सीखीं। इसके पश्चात् दिल्ली रंगमंच की ओर प्रस्थान किया, जहाँ एक वर्ष श्री राम सेन्टर रंगमण्डल, एवं दो वर्ष राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमण्डल, में बतौर कलाकार के कार्य किया। साथ ही दो बार इण्डोनेशिया में आयोजित ‘बाण्डुंग इन्टरनेशनल आर्ट फेस्टिवल’ में मंचन किया है।

रंगअनुभव-देश के प्रतिष्ठित रंग निर्देशकों जैसे-राजिन्दरनाथ, रंजीत कपूर, अलखनन्दन, अनुराधा कपूर, कीर्ति जैन, विवेक मिश्रा, आलोक चटर्जी, इरफान सौरभ, समीप सिंह, अनिल चैधरी, अशोक तिवारी इत्यादि के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही संस्कृति मन्त्रालय भारत सरकार द्वारा रंगमंच के क्षेत्र में कनिष्ठ अध्येतावृत्ति (जूनियर फेलोशिप) भी प्राप्त हो चुकी है।

निर्देशन-आपके द्वारा निर्देशित नाटकों में-कस्बा, दंगे जब भी होते हैं, गुड़ गोबर गंज डेज, दास्तान-ए-लैला मजनूँ, थैंक्यू बाबा लोचनदास, सैंया भये कोतवाल, मोहनदास, आनन्द रघुनन्दन, तोता बोला, अहल्या, अकाल में उत्सव और भँवरा बड़ा नादान इत्यादि हैं।

अभिनय-प्रसन्न ने सैंया भए कोतवाल, चंदा बेड़नी, ताम्रपत्र, भगवद्अज्जुकम्, महानिर्वाण, अजातघर, धूर्तसमागम, जिस लाहौर नई वेख्या वो जम्याई नई, टीन की तलवार, गुड़ गोबर गंज डेज़, संध्या-छाया, ख़ामोश अदालत ज़ारी है, आदमज़ात, चेख़व की दुनिया, पंचलैट, लैला मजनूँ दफ़ा दो सौ बान्नवे, थैंक्यू बाबा लोचनदास, बारह सौ छब्बीस बटा सात, राजा का बाजा, माटी की गाड़ी, इत्यादि में मुख्य भूमिका एवं अन्य कई नाटकों में भी विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं का निर्वहन किया है।

लेखन-भँवरा बड़ा नादान (प्रस्तुत पुस्तक), प्रेम जलधारा (प्रकाशनाधीन), हिरण खिलौना (आगामी नाटक)

वर्तमान में अपने गृहनगर सीधी में ही स्वयं की नाट्य संस्था रंगदूत सीधी का संचालन कर रहे हैं।