सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र द्वितीय लांच पैड

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द्वितीय लांच पैड
Second Launch Pad
Second Launch Pad.jpg
इसरो की द्वितीय लांच पैड
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
स्थान 13°43′12″N 80°13′49″E / 13.7199°N 80.2304°E / 13.7199; 80.2304
संक्षिप्त नाम SLP
ऑपरेटर भारत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
लांच पैड एक
लॉन्च इतिहास
स्थिति सक्रिय
लांच 19
प्रथम लांच 5 मई 2005
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान / कार्टोसेट-1
अंतिम लांच 08 जून 2017
भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क 3 / जीसैट-19ई
संबद्ध
रॉकेट
ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान
भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान
भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क 3

द्वितीय लांच पैड (Second Launch Pad or SLP) सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा में एक रॉकेट प्रक्षेपण स्थल है। यह सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर स्थित दो लांच पैड में से एक है। द्वितीय लॉन्च पैड या एसएलपी को मार्च 1999 से दिसंबर 2003 की अवधि के दौरान रांची (झारखंड, भारत) में स्थित भारतीय सरकार की एमईसीओएन लिमिटेड द्वारा डिजाइन, आपूर्ति, निर्माण और कमीशन किया गया था।[1] उस समय इस पर लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च हुए।[2] संबद्ध सुविधाओं के साथ द्वितीय लांच पैड 2005 में बनाया गया था। हालांकि, यह 5 मई 2005 को पीएसएलवी-सी 6 के लॉन्च के साथ ही चालू हुआ था। इस परियोजना के लिए एमईसीओएन लिमिटेड के उप-ठेकेदार, जिनमें इंनोक इंडिया, एचईसी, टाटा ग्रोथ, गोदरेज बॉयस, सिम्प्लेक्स, नागार्जुन कंस्ट्रक्शन, स्टीलेज आदि शामिल थे। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर अन्य लॉन्च पैड प्रथम लांच पैड है। द्वितीय लांच पैड का इस्तेमाल ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान, भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान और भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान मार्क 3 लॉन्च वाहनों को लॉन्च करने में किया जाता है।[3]

प्रक्षेपण[संपादित करें]

पैड से पहला लॉन्च 5 मई 2005 को हुआ था। यह एक ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान का था जिसमें कार्टोसेट-1 और हैमसैट उपग्रह थे।[4] 2016 तक, 9 पीएसएलवी (सभी सफल) और 6 जीएसएलवी (2 सफलता, 1 आंशिक सफलता और 3 विफलताएं) यहां से लॉन्च हुए। भारत का पहला चंद्र मिशन, चंद्रयान 22 अक्टूबर 2008 को इसी लॉन्च पैड से लॉन्च किया गया था। इस लॉन्च पैड का सबसे हालिया प्रक्षेपण 5 जून 2017 को जीएसएलवी डी1 का था।

सुविधाएं[संपादित करें]

यह एकीकृत, स्थानांतरण और लॉन्च (आईटीएल) अवधारणा पर अधारित है जिसमे पहले रॉकेट को व्हीकल असेम्बली बिल्डिग में मोबईल लॉन्च पेडेस्टल पर एकीकृत किया जाता है अर्थात सभी स्टेज को भवन में जोडा जाता है। फिर रॉकेट के एकीकृत हो जाने के बाद सभी चेक आउट किए जाते हैं और रेल ट्रैक के सहरे मोबईल लॉन्च पेडेस्टल पर रॉकेट को लांच पैड तक लाया जाता है और लांच पैड से रॉकेट को लॉन्च कर दिया जाता है।[5]

इसरो ने इस लांच पैड को ठोस व्हीकल असेम्बली बिल्डिग से भी जोडा है जिसमे भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान संस्करण 3 के भारी भरकम एस200 ठोस स्टेज को एकीकृत किया जाता है।[5]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://www.meconlimited.co.in/FlashNews/Chandrayaan.pdf
  2. http://www.telegraphindia.com/1081023/jsp/jharkhand/story_10006297.jsp
  3. "Launch Facility". Indian Space Research Organisation. अभिगमन तिथि 12 April 2010.
  4. Wade, Mark. "Sriharikota SLP". Encyclopedia Astronautica. अभिगमन तिथि 12 April 2010.
  5. Public domain text sourced from the link - ISRO Launch Facilities