सकल्प शक्ति द्वारा चिकित्सा

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आध्यात्मिक जगत मे संकल्प शक्ति को जीवन का आधार माना गया है। उपनिषदके अनुसार संकल्पमयो$यं पुरुष:अर्थात मनुष्य संकल्प का ही बना हुआ है। सब तरह की इच्॰आ का मूल संकलप है, आज संसार मे जितने महान पुरुष के बारे पढते है या उनके प्रति स्वत:ही आदर जाग्रत होता है, उन्हे इतना महान और पवित्र बनाने का कारण संकल्प शक्ति ही है। यही संकल्प शक्ति एक रोगी को शीघ्र ही नीरोगी बना देता है। हमारे प्राचीन शास्त्रो मे मात्र व्यक्ति कि नही वरन समस्त प्राणि मात्र की भलाई की प्रार्थना कि: सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे भवन्तु निरामया:। सर्वे भवन्तु भद्रणि पश्यन्तु म कक्ष्चिद्द:खमान्प्रुयात्जब मनुष्य अपने अन्दर के समस्त शत्रुता के विचार निकाल कर सारे संसार के भलाई और सुख की प्रार्थना करता है, तब उसे बदले मे विश्व का प्रेम प्राप्त होता है।

मनुष्य विचारो द्वारा बना होता है। यही विचार मनुष्य को स्वास्थ्य एवं रोगीबनाता है।

जिस प्रकार विचार भूख को उत्पन्न और समाप्त कर सकता है, आशा-निराशा के पथ पर ले जाता है, किन्तु मनुष्य को किस पथ पर जाना है इसका र्निधारण तो मनुष्य को स्वत: ही करना होगा।

अहं वृक्षस्य रेरिवा। कीर्ति:पृष्टं गिरेरिव। ऊडर्ध्वपवित्रो वाजिनीव स्वमृतनमस्मि। द्रविणँ सवर्चसम। सुमेधा अमृतोक्षित:।

इति त्रिशडकोर्वेदानुवचनम्। (तैतरिय उपनिषद १। १०)

अर्थात् मै संसार रुपी वृक्ष को हिलाने वाला हूँ। मेरी कीर्ती र्पवत के समान है। मै वह हू जिसके ज्ञान का

प्रकाश ऊँचा उदय हुआ है, जैसा सूर्य मे है। मै वह हुँ, जो असली अमृत है। मै खजाना हूँ, कभी नष्ट ना होनेवाला। इस दृढ और बलवान् संकल्पशक्ति से मनुष्य मे वह योग्यता आ जाती है। जिससे वह किसी भी प्रकार के रोग से मुक्ति पा सकता है।