सईद बिन अहमद अल-लूताह
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सईद बिन अहमद अल-लूताह | |
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سعيد بن أحمد آل لوتاه | |
![]() सईद बिन अहमद अल-लूताह | |
| जन्म | सईद बिन अहमद अल-लूताह 1 जनवरी 1923 दुबई, संयुक्त अरब अमीरात |
| मृत्यु | 28 जून 2020 दुबई, संयुक्त अरब अमीरात |
| पेशा | व्यवसायी, बैंकर |
| प्रसिद्धि का कारण | दुबई इस्लामिक बैंक की स्थापना |
सईद बिन अहमद अल-लूताह (अरबी: سعيد بن أحمد آل لوتاه; 1 जनवरी 1923 – 28 जून 2020) एक अमीराती व्यवसायी और बैंकर थे। 1975 में उन्होंने 'दुबई इस्लामिक बैंक' की स्थापना की, जो विश्व का पहला वाणिज्यिक इस्लामी बैंक था। व्यापारिक और वित्तीय क्षेत्र के अतिरिक्त, उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में निर्माण, अचल संपत्ति और शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थागत कार्य किए।[1]
प्रारंभिक जीवन और व्यापारिक करियर
[संपादित करें]सईद अल-लूताह का जन्म 1923 में दुबई में हुआ था। तेल की खोज से पूर्व, संयुक्त अरब अमीरात की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मोती निष्कर्षण और पारंपरिक समुद्री व्यापार पर निर्भर थी। अपनी युवावस्था में उन्होंने एक नाविक और व्यापारी के रूप में कार्य किया। इस अवधि में उन्होंने लकड़ी के जहाजों (धो) के माध्यम से खाड़ी क्षेत्र, पूर्वी अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप के बाजारों के बीच व्यापारिक यात्राएं कीं।
1956 में, उन्होंने दुबई में 'एस.एस. लूताह ग्रुप' नामक एक निर्माण और अचल संपत्ति कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी ने दुबई के प्रारंभिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में अनुबंध प्राप्त किए और कई स्थानीय विकास परियोजनाओं पर कार्य किया।[2]
इस्लामी बैंकिंग की स्थापना
[संपादित करें]1970 के दशक में, सईद अल-लूताह ने एक ऐसी वाणिज्यिक संस्था की रूपरेखा तैयार की जो पूर्णतः इस्लामी न्यायशास्त्र (शरिया) के वित्तीय सिद्धांतों पर आधारित हो। पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली मुख्य रूप से ब्याज के लेन-देन पर निर्भर करती है, जिसे इस्लामी नियमों में वर्जित माना गया है।
इसी आधार पर, 1975 में उन्होंने 'दुबई इस्लामिक बैंक' की स्थापना की। यह बैंक आधुनिक बैंकिंग सेवाओं को इस्लामी वित्तीय नियमों के साथ संचालित करने वाला पहला वाणिज्यिक बैंक था। इसकी कार्यप्रणाली में ब्याज के स्थान पर 'मुदारबा' और 'मुशारका' के सिद्धांतों को लागू किया गया। इन सिद्धांतों के अंतर्गत बैंक और ग्राहक के बीच पूर्व-निर्धारित ब्याज के बजाय व्यापारिक लाभ और हानि का बंटवारा किया जाता है। इस बैंक की स्थापना के पश्चात अन्य इस्लामी देशों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भी इसी प्रकार की शरिया-अनुपालन बैंकिंग प्रणाली की शुरुआत हुई।
शैक्षिक और सामाजिक कार्य
[संपादित करें]व्यापार और बैंकिंग के अतिरिक्त, सईद अल-लूताह ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश किया। संयुक्त अरब अमीरात में महिला चिकित्सा पेशेवरों की कमी को दूर करने के लिए, 1986 में उन्होंने 'दुबई मेडिकल कॉलेज' की स्थापना की। यह संस्थान विशेष रूप से छात्राओं को चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था। इसके पश्चात, 1992 में उन्होंने फार्मास्यूटिकल शिक्षा के लिए 'दुबई फार्मेसी कॉलेज' की स्थापना की।
उन्होंने 'सईद बिन अहमद अल-लूताह चैरिटी फाउंडेशन' की भी स्थापना की, जिसने सामाजिक कल्याण, अनाथालयों और इस्लामी अनुसंधान से संबंधित परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की। सईद अल-लूताह ने इस्लामी अर्थशास्त्र और व्यापारिक प्रबंधन पर अरबी भाषा में पुस्तकें और लेख भी लिखे। इन लेखों में आधुनिक आर्थिक विषयों का इस्लामी सिद्धांतों के संदर्भ में विश्लेषण किया गया है।
मृत्यु
[संपादित करें]सईद बिन अहमद अल-लूताह का निधन 28 जून 2020 को 97 वर्ष की आयु में दुबई में हुआ।[3]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ دبي - محمد عبدالرشيد (2021-12-15). "سعيد أحمد آل لوتاه مؤسّس أول بنك إسلامي في العالم". البيان (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-19.
- ↑ "السير الذاتية - سعيد بن أحمد آل لوتاه". www.ecssr.ac.ae. मूल से से 11 अप्रैल 2017 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2026-03-19.
- ↑ الإلكتروني, البيان (2020-06-28). "سعيد آل لوتاه في ذمة الله". البيان (अरबी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-03-19.
