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संस्कृत में समास

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संस्कृत ने अपने पूर्वज भाषा, आदिम-हिन्द-यूरोपीय, से समास संज्ञाओं के निर्माण की क्षमता विरासत में प्राप्त की है। यह क्षमता अन्य संबंधित भाषाओं में भी व्यापक रूप से देखी जाती है, विशेषतः जर्मन, यूनानी और अंग्रेज़ी में।[उद्धरण चाहिए]

किन्तु संस्कृत, विशेषतः भाषा के उत्तरवर्ती चरणों में, इस क्षमता को अत्यधिक विस्तार देती है—एक ही समास में प्रयुक्त घटकों की संख्या और साहित्य में समासों की प्रचुरता दोनों ही दृष्टियों से। यह विकास सम्पूर्ण इंडो-यूरोपीय भाषा-परिवार में विशिष्ट रूप से केवल संस्कृत और उससे निकटवर्ती भाषाओं में ही पाया जाता है।[उद्धरण चाहिए]

यह भी ध्यान देने योग्य है कि उत्तरवर्ती संस्कृत में यह विकास पूर्णतः कृत्रिम और साहित्यिक है; यह बोलचाल की भाषा का प्रतिबिंब नहीं है।[1][2]

पृष्ठभूमि

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संस्कृत में, जैसे कि आदिम-हिन्द-यूरोपीय में, समास का निर्माण पहले घटक के मूल रूप (अर्थात् उसका विभक्ति-रहित रूप) को लेकर किया जाता है, और दोनों घटकों को एक ही उच्चारित अक्षर के साथ जोड़ा जाता है।[a]

उत्तरवर्ती संस्कृत में यह प्रक्रिया पुनः पुनः की जा सकती है—सैद्धान्तिक रूप से अनंत बार—जहाँ नव निर्मित समास अगली संरचना का प्रथम घटक बन जाता है।[3][4][5]

समास को 'विग्रह' करना, अर्थात् उसके घटक शब्दों को वाक्य रूप में विभक्त करके अर्थ स्पष्ट करना, 'विग्रह·वाक्य' कहलाता है।[6]

विस्तृत रूप से देखा जाए तो समासों को दो मुख्य वर्गों में बाँटा जा सकता है: अन्तःकेंद्रित (एन्डोसेंट्रिक) और बहिःकेंद्रित (एक्सोसेंट्रिक)।

अन्तःकेंद्रित समास

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अन्तःकेंद्रित समास, जिसे सामान्यतः 'निर्देशक समास' कहा जाता है, वह होता है जहाँ समास का अर्थ उसके घटकों का योग होता है, और अर्थ मुख्यतः किसी एक घटक का विस्तार होता है:

• ब्लैकबर्ड → एक प्रकार का काला पक्षी

• व्हाइट हाउस → अमरीकी राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास

• सिंह·पुरस् → सिंहों का नगर (सिंगापुर

बहिःकेंद्रित समास

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बहिःकेंद्रित समास वह होता है जिसका अर्थ उसके घटकों से भिन्न होता है, अर्थात् वह किसी बाह्य वस्तु की ओर संकेत करता है:

• रेडहेड → लाल बालों वाला व्यक्ति

• पिकपॉकेट → जेब काटने वाला व्यक्ति

• बहु·व्रीहि → शाब्दिक अर्थ: 'बहुत चावल', अर्थात् जिसके पास बहुत चावल हों — धन का संकेत

वास्तव में, 'बहुव्रीहि' शब्द संस्कृत और मानक इंडो-यूरोपीय भाषाविज्ञान दोनों में इस प्रकार के समास को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है।[7]

वर्गीकरण

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परंपरागत संस्कृत व्याकरण में समासों को निम्नलिखित मुख्य वर्गों में बाँटा गया है:[8]

  • तत्पुरुष
    • तत्पुरुष (विशुद्ध)
    • कर्मधारय
      • द्विगु
    • नञ्-तत्पुरुष
    • प्रादि और गति
    • उपपद
  • बहुव्रीहि
    • द्विगु
  • द्वंद्व
  • अव्ययीभाव

इनमें से प्रथम दो—तत्पुरुष और बहुव्रीहि—इंडो-यूरोपीय परंपरा की देन हैं, जबकि अंतिम दो—द्वंद्व और अव्ययीभाव—भारतीय नवाचार हैं। 'बहुव्रीहि' के साथ-साथ 'तत्पुरुष' शब्द भी मुख्यधारा इंडो-यूरोपीय भाषाविज्ञान में तकनीकी शब्दावली के रूप में अपनाया गया है।[9]

निम्नलिखित अनुभागों में समासों के प्रमुख प्रकारों की रूपरेखा दी गई है। उदाहरणों के माध्यम से समास के घटकों की संरचना स्पष्ट की गई है, और उनके हिन्दी अर्थ भी दिए गए हैं। अधिकांश उदाहरणों में अंग्रेज़ी में भी समान समास होते हैं। जहाँ ऐसा नहीं है या अर्थ अस्पष्ट है, वहाँ अतिरिक्त व्याख्या दी गई है।

तत्पुरुष (निर्देशक समास)

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तत्पुरुष एक अन्तःकेंद्रित समास होता है जिसमें दो घटक होते हैं, जहाँ पहला घटक—जिसे 'विशेषक' कहा जाता है—दूसरे घटक को निर्धारित करता है।[10][11]

विशेषक घटक की व्याकरणिक प्रकृति के आधार पर तत्पुरुष समासों की छह उपप्रकार पहचाने गए हैं। इसके अतिरिक्त यह भी देखा जाता है कि विशेषक घटक प्रथमा विभक्ति में है या अन्य कोई विभक्ति में।[b] [c]

विशुद्ध तत्पुरुष

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इस प्रकार में पहला घटक दूसरे के साथ अप्रथमा संबंध में होता है, अतः इन्हें 'निर्भर निर्देशक' कहा जाता है।[12][13]

शब्द अर्थ / विग्रह विभक्ति सम्बन्ध
जय·प्रेप्सु विजय की इच्छा रखने वाला कर्म (द्वितीया)
देव·दत्त देवताओं द्वारा दिया गया करण (तृतीया)
विष्णु·बलि विष्णु को अर्पित बलि सम्प्रदान (चतुर्थी)
स्वर्ग·पतित स्वर्ग से गिरा हुआ अपादान (पंचमी)
व्याघ्र·बुद्धि व्याघ्र जैसी बुद्धि षष्ठी (सम्बन्ध)
यजुर्वेद यज्ञ का ज्ञान षष्ठी
गृह·जात घर में जन्मा सप्तमी (अधिकरण)

कर्मधारय-तत्पुरुष (वर्णनात्मक समास)

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इस प्रकार के समास में पहला घटक दूसरे को विशेषण रूप में विशेषित करता है यदि दूसरा संज्ञा हो। यदि दूसरा विशेषण हो, तो पहला घटक क्रियाविशेषण रूप में कार्य करता है। अन्य भाषिक वर्ग भी इस विशेषण या क्रियाविशेषण रूप को प्राप्त करने हेतु प्रयुक्त हो सकते हैं।[14][15]

शब्द अर्थ / विग्रह
नीलोत्पल नीला कमल
सर्व·गुण सभी गुण
प्रिय·सखा प्रिय मित्र
महा·ऋषि महान ऋषि
रजत·पात्र रजत पात्र (चाँदी का बर्तन)
द्विगु-तत्पुरुष (संख्यात्मक समास)
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द्विगु समासों में पहला घटक संख्या होता है। ये कर्मधारय समासों का एक विशेष उपवर्ग हैं।[16][17]

शब्द अर्थ / विग्रह
द्वि·राज दो राजाओं का युद्ध
त्रि·भुवन तीन लोक
त्रि·युग तीन युग
त्रि·दिव तीन बार का स्वर्ग
दशाङ्गुल दस अंगुल की चौड़ाई
षड·अह छह दिन का समय
सहस्राह्न्य सहस्र दिनों की यात्रा

(द्विगु बहुव्रीहि प्रकार के समास नीचे दिए गए हैं।)

नञ्-तत्पुरुष (नकारात्मक समास)

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इस प्रकार के समास में पहला घटक नकार सूचक होता है—जैसे 'अ-', 'अन-', 'न-', ठीक वैसे ही जैसे अंग्रेज़ी में 'un-', लातिन मूल 'in-', 'non-', या यूनानी मूल 'a-', 'an-'।[18][19]

शब्द अर्थ / विग्रह
अ·ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं
अन·अश्व अश्व नहीं
अ·पति स्वामी नहीं
अ·विद्या ज्ञान नहीं (अज्ञान)
अ·कुमार युवा नहीं (वृद्ध)
अ·श्रद्धा विश्वास नहीं

उपपद-तत्पुरुष

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इस प्रकार के समासों में दूसरा घटक केवल समास में ही प्रयुक्त होता है, स्वतंत्र रूप से नहीं। ये या तो धातु होते हैं या उनसे व्युत्पन्न शब्द।[20][21]

शब्द अर्थ / विग्रह
स·युज साथ जुड़ना
सु·कृत शुभ कर्म
कुम्भ·कार घड़ा बनाने वाला
स्व·राज स्वराज्य
मनु·ज मनु से उत्पन्न (मनुष्य)
स्वयं·भू स्वयं उत्पन्न
एक·ज एकमात्र जन्मा
जल·द जल देने वाला (बादल)
सर्व·ज्ञ सब जानने वाला (सर्वज्ञ)

अलुक-ततपुरुषा

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इस प्रकार के समासों में पहला घटक विभक्ति रूप में होता है, जैसे वाक्य में प्रयुक्त होता है, न कि मूल रूप में।[22]

पहला घटक → शब्द अर्थ / विग्रह विभक्ति
ओजस् → ओजसा·कृत बल से किया गया तृतीया
आत्मन् → आत्मने·पद आत्म के लिए शब्द (निजवाचक) चतुर्थी
द्यौस् → दिवस्·पति आकाश का स्वामी (इन्द्र) षष्ठी
युद्ध् → युद्धि·ष्ठिर युद्ध में स्थिर (नाम) सप्तमी

द्वंद्व (संयुक्त समास)

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इस प्रकार के समासों में दो या अधिक संज्ञा मूल शब्द 'और' के अर्थ में जोड़े जाते हैं। संस्कृत में द्वंद्व समासों के तीन मुख्य प्रकार होते हैं:[23]

इतरेतर-द्वंद्व

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इस प्रकार में समास का अर्थ सभी घटकों को सम्मिलित करता है। यह समास द्विवचन या बहुवचन में होता है और अंतिम घटक के लिंग को ग्रहण करता है।[24][25]

शब्द अर्थ / विग्रह
मित्रा·वरुणौ मित्र और वरुणा
द्यावा·पृथिवी आकाश और पृथ्वी
वृहि · यावौ चावल और जौ
चन्द्रा·आदित्यौ चन्द्रमा और सूर्य
देवासुरा देवता और असुर
हस्त्य·अश्वा हाथी और घोड़े
रोग·शोक·परिताप·बंधन·व्यसना रोग, शोक, पीड़ा, बंधन और विपत्ति

समाहार-द्वंद्व

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इस प्रकार में शब्दों को समास में इस प्रकार संगठित किया जाता है कि वे किसी समष्टि का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह समास सदा एकवचन और नपुंसक लिंग में होता है।

शब्द शाब्दिक अर्थ ⇒ व्याख्या
पाणि·पादम् हाथ और पैर ⇒ अंग
आहार·निद्रा·भयम् भोजन, निद्रा और भय ⇒ जीवन की अवस्थाएँ

एकशेष-द्वंद्व

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कुकुछ संस्कृत व्याकरणाचार्य एक तीसरे प्रकार को पहचानते हैं जिसमें केवल एक मूल शब्द बचता है, जबकि समास में अनेक शब्दों का योग होता है।[26]

समास विग्रह अर्थ
पितरौ माता + पिता माता-पिता
मृगाः मृग + मृगा हिरण
पुत्राः पुत्र + दुहितर संतान

आम्रेढित (पुनरावृत्त समास)

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यह समास पूर्णतः द्वंद्व नहीं होता, परंतु इसमें एक ही शब्द की पुनरावृत्ति होती है, जहाँ पहला प्रयोग उच्चारित होता है।

उदाहरण के लिए:

• दिवे·दिवे → प्रतिदिन

• देवं·देवम् / देवो·देवः → देवता दर देवता

बहुव्रीहि (स्वामित्व सूचक समास)

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बहुव्रीहि एक बहिःकेंद्रित समास होता है जिसमें एक संज्ञा से पहले एक व्याकरणिक विशेषक होता है, और दोनों मिलकर एक विशेषण रूप में कार्य करते हैं। यह समास एक विशेषण संज्ञा के रूप में कार्य करता है।

बहुव्रीहि समास का अनुवाद प्रायः "जिसके पास..." या "...युक्त" के रूप में किया जाता है। उदाहरण के लिए — "जिसके पास बहुत चावल हो" या "बहुत चावल वाला"। अंग्रेज़ी में इसके उदाहरण हैं:

• lowlife → जिसका जीवन निम्न है

• blockhead → जिसका सिर लकड़ी जैसा है

• Longbottom → जो लम्बी घाटी में रहता है

इस प्रकार के समासों में दूसरा घटक मूलतः संज्ञा होता है, परंतु समास में विशेषण रूप में व्यवहार करता है। अन्तःकेंद्रित समासों को भी विशेषण रूप में बदला जा सकता है, जो प्राचीन भाषा में स्वर परिवर्तन द्वारा स्पष्ट होता है।[27][28]

मूल रूप स्वर परिवर्तन के बाद अर्थ
इन्द्र·शत्रु इन्द्र का शत्रु → इन्द्र·शत्रु: जिसके शत्रु इन्द्र हैं
बृहद·रथ बड़ा रथ → बृहद·रथ: जिसके पास बड़े रथ हैं
सूर्य·तेजस् सूर्य का तेज → सूर्य·तेजस्: जिसके पास सूर्य जैसा तेज है


कुछ विशिष्ट उदाहरण:[29]

शब्द अर्थ / विग्रह
मयूर·रोमन् मोर के पंखों वाला
उग्र·बाहु बलशाली भुजाओं वाला
जीवित·वत्स जीवित संतान वाला
मधु·जिह्वा मधुर बोलने वाला
पत्र·हस्त हाथ में पात्र रखने वाला
खर·मुख गधे जैसा मुख वाला

द्विगु-बहुव्रीहि

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जब बहुव्रीहि समास का पहला घटक संख्या हो, तो उसे 'द्विगु' कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसका उदाहरण है: halfwit → जिसका आधा मस्तिष्क है।

कुछ विशिष्ट उदाहरण:

शब्द अर्थ / विग्रह
एक·चक्र एक पहिए वाला
एक·पद एक पैर वाला
चतुर·अङ्ग चार अंगों वाला
सप्त·जिह्वा सात जिह्वाओं वाला
अष्ट·पुत्र आठ पुत्रों वाला
नव·द्वार नौ द्वारों वाला
शत·दन्त सौ दाँतों वाला
सहस्र·नामन् हज़ार नामों वाला

अव्ययीभाव (क्रियाविशेषण समास)

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अव्ययीभाव समास एक क्रियाविशेषणात्मक समास होता है जिसमें एक अव्यय (जैसे क्रियाविशेषण) और एक संज्ञा मिलकर एक नया अव्यय या क्रियाविशेषण रूप बनाते हैं।[30][31]

शब्द अर्थ / विग्रह
अध्या·आत्मम् आत्मा के विषय में
अनु·रथम् रथों के पीछे
उप·राजम् राजा के समीप
प्रत्य·अग्नि अग्नि की ओर
प्रति·निशम् प्रत्येक रात
यथा·शक्ति शक्ति के अनुसार
स·चक्रम् चक्र के साथ-साथ
अन्तर·जलम् जल के भीतर

यह भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. Coulson, p. xxi.
  2. Burrow, p. 209.
  3. Burrow, p. 209.
  4. Whitney, §1246.
  5. Kale, §180
  6. Kale, §184.
  7. Fortson, §6.82.
  8. Kale, §201.
  9. Burrow, p. 209.
  10. Coulson, pp. 87.
  11. Kale, §200.
  12. Coulson, pp. 87.
  13. Kale, §203.
  14. Whitney, §1279.
  15. Tubb & Boose, §1.54.
  16. Tubb & Boose, §1.56.
  17. Whitney, §1312.
  18. Whitney, §1288.
  19. Tubb & Boose, §1.58.
  20. Tubb & Boose, §1.59.
  21. Whitney, §1286.
  22. Kale, §208, 215
  23. Kale, §187.
  24. Burrow, p. 217.
  25. Whitney, §1253.
  26. Tubb & Boose, §173-174.
  27. Whitney, §1293.
  28. Kale, §246.
  29. Burrow, p. 215.
  30. Whitney, §1313.
  31. Tubb & Boose, §1.48.
  1. This process suggests the possibility of an early stage of Proto-Indo-European where words could appear in a sentence without case terminations.
  2. accusative, instrumental, dative, ablative, genitive, or locative
  3. The word tatpuruṣa (a 'that-man', in the sense of 'that person's man', i.e., 'someone's agent') is itself a tatpuruṣa compound.
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