संयुक्त राष्ट्र संघ का इतिहास

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
जब दुनिया संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुई तो दुनिया का एक मानचित्र दिखा

संयुक्त राष्ट्र संघ एक अंतरराष्ट्रीय अंतरसरकारी संगठन के निर्माण का विश्व का दूसरा प्रयास था। राष्ट्र संघ की असफलता ने एक ऐसे नये संगठन की स्थापना के विचार को जन्म दिया जो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अधिक समतापूर्ण व न्यायोचित बनाने में केन्द्रीय भूमिका अदा कर सके। यह विचार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उभरा तथा 5 राष्ट्रमंडल सदस्यों तथा 8 यूरोपीय निर्वासित सरकारों द्वारा 12 जून, 1941 को लंदन में हस्ताक्षरित अंतर-मैत्री उद्घोषणा में पहली बार सार्वजनिक रूप से अभिव्यक्त हुआ। इस उद्घोषणा के अंतर्गत एक स्वतंत्र विश्व के निर्माण हेतु कार्य करने का आह्वान किया गया, जिसमें लोग शांति व सुरक्षा के साथ रह सकें। इस घोषणा के उपरांत अटलांटिक चार्टर 14 अगस्त, 1941 पर हस्ताक्षर किये गये। इस चार्टर को संयुक्त राष्ट्र के जन्म का सूचक माना जाता है। इस चार्टर पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल तथा अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट द्वारा अटलांटिक महासागर में मौजूद एक युद्धपोत पर हस्ताक्षर किये गये थे। अटलांटिक चार्टर ने एक ऐसे विश्व की आशा को अभिव्यक्त किया, जहां सभी लोग भयमुक्त वातावरण में रह सकें तथा निजीकरण एवं आर्थिक सहयोग के मार्ग की खोज कर सकें 1 जनवरी, 1942 को वाशिंगटन में अटलांटिक चार्टर का समर्थन करने वाले 26 देशों ने संयुक्त राष्ट्र की घोषणा पर हस्ताक्षर किये। यहां पहली बार राष्ट्रपति रूजवेल्ट द्वारा अभिकल्पित नाम संयुक्त राष्ट्र का प्रयोग किया गया इंग्लैंड, चीन, सोवियत संघ तथा अमेरिका द्वारा 30 अक्टूबर, 1943 को सामान्य सुरक्षा से सम्बंधित मास्को घोषणा पर हस्ताक्षर किये गये। यह घोषणा भी शांति बनाये रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के विचार का अनुमोदन करती थी। नवंबर-दिसंबर 1943 में अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट, ब्रिटिश प्रधानमंत्री चर्चिल तथा सोवियत संघ के प्रधान स्टालिन ने तेहरान में मुलाकात की तथा संयुक्त राष्ट्र संगठन की स्थापना हेतु विभिन्न योजनाओं पर विचार-विमर्श किया। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान मुख्य मित्र राष्ट्र नेताओं की प्रथम बैठक थी। 1944 में अगस्त से अक्टूबर तक सोवियत संघ, अमेरिका, चीन तथा ब्रिटेन के प्रतिनिधियों द्वारा वाशिंगटन के डम्बर्टन ओक्स एस्टेट में कई बैठकें आयोजित की गयीं जिनका उद्देश्य एक शांतिरक्षक संगठन की योजना बनाना था वे एक प्राथमिक योजना का खाका खींचने में सफल हुए। 7 अक्टूबर, 1944 को संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावित ढांचे को प्रकाशित किया गया। इनमें प्रस्तावों पर आगे चलकर याल्टा सम्मेलन (फरवरी 1945) में विचार-विमर्श किया गया, जहां सोवियत संघ, अमेरिका एवं ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक हुई थी। अंत में अंतरराष्ट्रीय संगठन से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। 25 अप्रैल, 1945 को सेन फ्रांसिस्को में आयोजित इस सम्मेलन को सभी सम्मेलनों की समाप्ति करने वाला सम्मेलन माना जाता है। जहां नये संगठन का संविधान तैयार किया गया। 26 जून, 1945 की सभी 50 देशों ने चार्टर पर हस्ताक्षर किये। पोलैंड सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले सका था किंतु थोड़े समय बाद चार्टर पर हस्ताक्षर करके वह भी संस्थापक सदस्यों की सूची में शामिल हो गया। लिखित अनुमोदनों की अपेक्षित संख्या अमेरिकी विदेश विभाग में जमा हो जाने के बाद 24 अक्टूबर, 1945 से चार्टर प्रभावी हो गया। 31 दिसंबर, 1945 तक सभी हस्ताक्षरकर्ता देश चार्टर का अनुमोदन कर चुके थे। 24 अक्टूबर को प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मुख्यालय[संपादित करें]

चित्र:United Nations HQ New York City.jpg
न्यूयार्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र का ममुख्यालय

संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यायर्क में है। 14 दिसंबर, 1946 को संयुक्त राष्ट्र ने अपना मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका में रखने के पक्ष में मतदान किया। न्यूयार्क में ईस्ट नदी के किनारे सात हेक्टेयर भूमि खरीदने के लिए अमेरिका के जॉन डी. रॉकफेलर जूनियर ने 85 लाख डॉलर की रकम दान में दी। नगर प्रशासन द्वारा भी उस क्षेत्र में कुछ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध करायी गयी। संगठन की इमारत 1952 में बनकर तैयार हुई। न्यूयार्क के लांग आईलैंड में लेक सक्सेस पर अस्थायी मुख्यालय बनाया गया था। 10 जनवरी, 1946 को लंदन में महासभा का प्रथम सत्र आयोजित हुआ था।

ध्वज[संपादित करें]

संयुक्त राष्ट्र के ध्वज को 1947 में आधिकारिक प्रतीक के रूप में अंगीकृत किया गया ध्वज में हल्के नीले रंग की पृष्ठभूमि के अंतर्गत सफेद रंग से विश्व के वृत्ताकार मानचित्र (जैसाकि उत्तरी ध्रुव से दिखाई देता है) को दर्शाया गया है, जो जैतून की शाखाओं के हार द्वारा घिरा हुआ है। जैतून की शाखाएं शांति का प्रतीक हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]