संतोष आनंद

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संतोष आनंद हिन्दी फिल्मों के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित गीतकार के रूप में जाने जाते हैं। इनके पुत्र संकल्प गृह मंत्रालय में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को समाजशास्त्र और अपराध शास्त्र की शिक्षा देते थे. वे काफी समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे. उन्होंने आत्महत्या से पहले 10 पेज का सुसाइड लेटर भी लिखा था. इस सुसाइड नोट में केंद्रीय होम डिपार्टमेंट के कई सीनियर अधिकारी और डीआईजी पुलिस संदीप मित्तल का नाम शामिल था. संकल्प ने आरोप लगाया था कि करोड़ों के फंड में गड़बड़ी के चलते इन अधिकारियों ने उन्हें सुसाइड के लिए मजबूर किया.

संकल्प आनंद 15 अक्टूबर 2014 को अपनी पत्नी के साथ ही दिल्ली से मथुरा पहुंचे थे. दोनों ने कोसीकलां कस्बे के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंचकर मथुरा की ओर से आने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस के सामने कूदकर जान दे दी थी. इस हादसे में उनकी बेटी की किसी तरह जान बच गई थी. ट्रेन के आगे कूदने से पहले उन्हें रेलवे के एक कर्मचारी गिरिराज सिंह ने ट्रैक के पास जाने से मना किया था. गिरिराज सिंह ने इस पूरी घटना को रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और गर्वनमेंट रेलवे पुलिस को रिपोर्ट किया था. दोनों के पास से दो मोबाइल फोन और 65000 हजार रुपए  भी मिले थे.

27/08/19- जमशेदपुर (झारखंड) भारत पिछले दिनों जमशेद पुर झारखण्ड श्री गोविंद जी द्वारा संयोजित कार्यक्रम,आदरणीय संतोष आनंद जी ने लगभग 2 घण्टे काव्यपाठ किया।'एक प्यार का नगमा है,दिल दीवानों का डोला' और भी कई गीत, श्रोताओं ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया व्हील चेयर पर होने के बावजूद संतोष जी ने खड़े होकर उत्साह से श्रोताओं के प्यार को स्वीकार किया।

अब बात आती है मुख्य बिन्दु की अखबारों में उन्हें स्थान दिया गया प्रमुखता से, पर उन बातों के साथ जो उन्होंने कही ही नहीं।वे बोले एंड्राइड फ़ोन नही चला पता हाथ में कंपन की वजह से,अखबार लिखता है गुमनाम  हुए वे,होटल के जिस रूम में ठहरे थे वह अखबार के लिए चिकित्सालय का कक्ष हो गया,रानू मण्डल का जिक्र आये बिना ही संतोष जी का वक्तव्य छप गया कि 'रानू मेरे गीत गाकर प्रसिद्द हुई और मै गुमनाम,।

बेचारे संतोष जी बिना किसी लाग लपेट वाले मस्त फकीर उन्हें दुनिया की चालबाजी से मतलब नही हैं।




पुरस्कार[संपादित करें]

१९७५ व १९८३ में वे अपने गीतों के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीत चुके हैं।

1974 में, फिल्म रोटी कपड़ा और मकान के गीत- मैं न भूलूंगा, 1983 में प्रेमरोग फिल्म गीत मुहब्बत हैं, क्या चीज के लिए फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।

2016 में यश भारती


प्रसिद्ध रचनाएं[संपादित करें]

  • मुहब्बत है क्या चीज
  • इक प्यार का नगमा है।....
  • जिंदगी की ना टूटे लड़ी ....
  • मारा ठुमका बदल गई चाल मितवा ....
  • मेधा रे मेधा रे मत जा तू परदेश (प्यासा सवान)
  • मैं न भूलूंगा,इन रश्मो इन कश्मो को (रोटी कपड़ा और मकान)
  • ओ रब्बा कोई तो बताए (संगीत)
  • आप चाहें तो हमको (संगीत )
  • जिनका घर हो अयोध्या जैसा (बड़े घर की बेटी)

सन्दर्भ[संपादित करें]

संतोष आनंद फिल्म इंडस्ट्री के सबसे चहेते प्रसिद्ध गीतकार रहें हैं। इन्होंने कई फ़िल्मों में गीतों की रचना की।।

(1) पूरब और पश्चिम (1971)

(2) शोर (1972)

(3) रोटी कपड़ा और मकान (1974)

(4) पत्थर से टक्कर (1980)

(5) क़्रांति (1981)

(6) प्यासा सवान (1981)

(7) प्रेम रोग (1982)

(8) गोपीचंद सावन (1982)

(9) जख़्मी शेर (1984)

(10) मेरा ज़बाब (1985)

(11) पत्थर दिल (1985)

(12) लव 86 (1986)

(13) मज़लूम (1986)

(14) बड़े घर की बेटी (1989)

(15) नाग नागिन (1989)

(16) सूर्या (1989)

(17) दो मतवाले (1991)

(18) नागमणि (1991)

(19) रणभूमि (1991)

(20) जूनुन (1992)

(21) संगीत (1992)

(22) तिरंगा (1993)

(23) संगम हो के रहेगा (1994)

(24) प्रेम अगन (1998)

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

इनके गीतों को लता मंगेशकर, महेंद्र कुमार, मोहम्मद अजीज, कुमार सानू, कविता कृष्णमूर्ति जैसे अनेक गायकों ने आवाज दी।

हिंदी फिल्मों के शोमैन कहे जाने वाले राज कपूर, मनोज कुमार जैसे अभिनेताओं की फिल्मों के लिए गीतों की रचनाएं की।।