संतोषी माता मन्दिर बदौवां

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संतोषी माता मन्दिर बदौवां[संपादित करें]

माँ संतोषी का यह दिव्य मन्दिर भारतवर्ष में उत्तर प्रदेश राज्य के जनपद जौनपुर के अन्तर्गत मड़ियाहूँ तहसील के बदौवां ग्राम में स्थित है। माँ का यह मन्दिर वर्तमान में देखने में बहुत लम्बा चौड़ा तो नहीं परन्तु सम्पूर्ण क्षेत्रवासियों के लिए यह सदा से ही आस्था का केन्द्र है और वास्तविकता भी यही है कि विस्तार के हो जाने से कुछ खास फ़र्क नही पड़ता, फ़र्क होता है तो सिर्फ आस्था और विश्वास की दृढ़ता से, मायने यही रखता है कि व्यक्ति की किसी भी जगह उसकी स्वयं की निष्ठा सदा ही अपरिवर्तनीय हो, ऐसे ही माँ का यह दिव्य निवास-स्थान है, जहाँ माँ सदा ही विराजमान हैं। ऐसी यहाँ की मान्यता है कि यहाँ पर आने वाले अपने भक्तों की सम्पूर्ण मनोकामनाएँ माँ स्वतः ही पूर्ण कर देती हैं।

दीपावली 2019 के महापर्व पर माँ के मन्दिर का एक दिव्य मनोहर दृश्य

माँ के निवास-स्थान की दिव्यता[संपादित करें]

यद्यपि माँ के किसी भी निवास स्थान की प्रशंसा अथवा उनकी व्याख्या शब्दों में करने का सामर्थ्य किसी में भी नहीं और सम्भव भी नहीं तथापि यह संतोषी माँ का बहुत ही भव्य निवास स्थान है। यहाँ भक्तों की सभी मनोकामनाएँ माँ स्वतः ही पूर्ण कर देती हैं, यह निज विश्वास है। माँ के दर्शनार्थ यहाँ एक बार सभी को अवश्य पधारना चाहिए तब आप स्वतः अनुभव करेंगे कि हां वास्तव में माँ के किसी भी निवास स्थान में रहने के आनंद की व्याख्या शब्दों में संभव नहीं।



संक्षिप्त इतिहास[संपादित करें]

माँ के कृपापात्र उनके अनन्य भक्त पण्डित श्री गिरजा शंकर उपाध्याय ने माँ की कृपा से पुत्र रूप में प्राप्त संतोष कुमार उपाध्याय (जो कि उनके ही प्रियदिवस शुक्रवार को जन्म लिए), को साक्षात् माँ का प्रसाद मान स्वीकार करने के पश्चात माँ के इस दिव्य निवास-स्थान का निर्माण 18 फ़रवरी को सन 2005 ईस्वी में कराया, जिसमें माँ सदा ही विराजमान हैंं।

माँ के अद्भुत चमत्कार[संपादित करें]

माँ के अनंत अद्भुत चमत्कार हैं, प्रत्येक को वर्णित कर पाना असंभव है। उनमें से एकाध ही निम्नवर्णित हैं:

1. जैसे माँ की अपार कृपाप्राप्ति से ग्रामसभा की ही कई स्त्रियों की उनकी सूनी गोंद का भर जाना और पुत्र रत्न की प्राप्ति होना।

2 . ग्रामसभा की ही उनकी एक अनन्य भक्त की आंखों की खोई हुई रोशनी का पुनः वापस आ जाना।

3. सम्पूर्ण क्षेत्र में उनके कई भक्तों की अस्त-व्यस्त जिन्दगी का पुनः से नवशृजन हो जाना इत्यादि माँ के ऐसे अनेकानेक अद्भुत चमत्कार हैं जिनका अनुभव उनके भक्त यहाँ पर सदा ही नित्य-प्रतिदिन करते हैं।


माँ की दिव्य महिमा का आंखों देखा प्रमाण[संपादित करें]

एक बार माँ के मन्दिर के ऊपर, मन्दिर के प्रांगण में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष की एक विशाल डाल गिर पड़ी जिससे मन्दिर का ऊपरी भाग जिसे गुम्मद कहते हैं, टूट कर खण्ड-खण्ड हो गया परन्तु माँ के विग्रह का रंच मात्र भी बाल बाँका न हुआ, ऐसी है माँ की दिव्य अपरम्पार महिमा।