संजय लीला भंसाली

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संजय लीला भंसाली
Sanjay Leela Bhansali2.jpg
जन्म 24 फ़रवरी 1964 (1964-02-24) (आयु 53)
मुम्बई, भारत
शिक्षा प्राप्त की भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान
व्यवसाय निर्देशक, निर्माता, संगीत निर्देशक
सक्रिय वर्ष १९९१ - वर्तमान
पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार, Padma Shri in arts[*]
जालस्थल http://www.sanjayleelabhansali.com/

संजय लीला भंसाली (जन्मः २४ फ़रवरी १९६४) हिन्दी फिल्म उद्योग बॉलीवुड के एक निर्देशक हैं। वह भारतीय फिल्म और टेलिविज़न संस्थान के छात्र रह चुके हैं। 1942: ए लव स्टोरी फिल्म से उन्होने, अपनी मां को श्रद्धांजली देने के लिये, अपने नाम मे "लीला" लिखना शुरू किया।[1]

व्यक्तिगत जीवन[संपादित करें]

गुजरात के भुज महाराजा की दुसरी पत्नी लीला थी, जो मुम्बई फ़िल्म इंडस्ट्री में नृत्यांगना थी जो अभिनेत्रियों को डांस स्टेप सिखाती थी | भुज महाराजा को उससे इश्क हो गया था महाराजा उसे अपने साथ भुज ले गया और एक अलग महल में रहने की व्यवस्था की जब तक जवानी थी, लीला की जिंदगी में चार चांद लगे हुए थे | उसका भुज महाराजा से एक पुत्र भी हुआ, जिसका नाम संजय रखा गया,महाराजा संजय गुजरात भुज का उतराधिकारी था | जवानी ढलते ही भुज महाराजा ने लीला को नकार दिया और तीसरी अपना लिया | लेकिन लीला ने अपना प्रोफेशन नही छोड़ा | जब संजय दस वर्ष के थे, लीला की मुलाकात नवीन भंसाली को-ऑर्डिनेटर से हुई | कुछ समय बाद लीला ने नवीन भंसाली से शादी कर ली | नवीन भंसाली के अच्छे व्यक्तित्व के कारण संजय ने अपने नाम मे भंसाली टाईटल जोड़ लिया | उस समय नवीन भंसाली की प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर शुभाष घई से अच्छी जान-पहचान थी |सुभाष घई ने संजय को अपने साथ बतौर असिस्टेंस के रूप मे रखा। अपने और अपनी माँ के कठिन संघर्षों से भरे जीवन मे उन्होने काफी ऊँच-नीच भावनाओ का सामना किया | आखिरकार उनकी मेहनत रंग लायी और आज वे भारत के सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के नाम से जाने जाते है | आज भी उनकी फिल्मो मे पुराने राजे रजवाड़ो की छवि दिखती है | जो की उन्होने असल जिंदगी मे बेहद करीब से देखा था |

प्रमुख फिल्में[संपादित करें]

भंसाली ने अपना कैरियर विधु विनोद चोपड़ा के साथ बतौर सहायक निर्देशक शुरू किया। विधु के साथ भंसाली ने परिंदा और 1942 ए लव स्टोरी जैसी फिल्मे की।[2] सन २००२ मे आयी भंसाली निर्देशित फिल्म देवदास उस समय की सबसे महंगी फिल्म थी। इस फिल्म को के निर्माण में 50 करोड रुपये लगे थे और इसने करीब 100 करोड रूपये का व्यवसाय किया था। उस साल इस फिल्म ने 5 राष्ट्रीय पुरस्कार और 10 फिल्मफेयर पुरस्कार जीते थे। टाइम पत्रिका ने नई सदी के अब तक के सालों में बनी सर्वश्रेष्ठ दस फिल्मों में देवदास को आठ्वीं जगह दी है।[3]२००५ मे प्रदर्शित उनकी फिल्म ब्लैक के लिये उन्हे एक बार फिर से हिन्दी सिनेमा का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

बतौर निर्माता[संपादित करें]

वर्ष फ़िल्म टिप्पणी
2007 साँवरिया
2005 ब्लैक
1999 हम दिल दे चुके सनम
2010 गुज़ारिश

बतौर निर्देशक[संपादित करें]

वर्ष फ़िल्म टिप्पणी
2017 पद्मावती
2015 बाजीराव मस्तानी
2013 गोलियों की रासलीला रामलीला
2007 साँवरिया
2005 ब्लैक
2002 देवदास
1999 हम दिल दे चुके सनम
1996 खामोशी

नामांकन और पुरस्कार[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]