संघनन पथ
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संघनन पथ अथवा वाष्पपथ (अंग्रेज़ी: contrail, condensation trail, vapour trail) वे रेखाकार मेघ होते हैं जो विमान के इंजन से निष्कासित वाष्प अथवा वायुदाब में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होते हैं। ये सामान्यतः पृथ्वी की सतह से कई किलोमीटर ऊपर विमान की परिभ्रमण ऊँचाई पर निर्मित होते हैं। इनका मुख्य घटक जल होता है, जो हिमकणों के रूप में विद्यमान रहता है। विमान के इंजन से निकलने वाली जलवाष्प तथा उच्च ऊँचाई पर विद्यमान निम्न तापमान के संयोग से ये पथ निर्मित होते हैं।
ईंधन में उपस्थित कालिमा तथा गंधक यौगिक (जेट ईंधन में भार के अनुसार ०.०५% तक) जैसे अशुद्धियाँ संघनन नाभिक के रूप में कार्य करती हैं, जिनसे जलबिन्दुओं की वृद्धि होती है।[1] यदि जलबिन्दु बनते हैं, तो वे हिमकणों में परिवर्तित हो सकते हैं, जो संघनन पथ का निर्माण करते हैं।[2] इनका निर्माण पंखों की नोक पर उत्पन्न वायुदाब में परिवर्तन अथवा सम्पूर्ण पंख की सतह पर वायु की गति से भी हो सकता है।[3] मानव क्रियाकलापों से सीधे उत्पन्न मेघों को होमोजेनिटस कहा जाता है।[4]
रॉकेटों द्वारा उत्पन्न वाष्पपथों को प्रक्षेपास्त्र संघनन पथ अथवा रॉकेट संघनन पथ कहा जाता है।[5] रॉकेटों से उत्पन्न जलवाष्प एवं वायुकण वायुमण्डल की हिम-सुपरसंविलन परतों में हिममेघों के निर्माण को प्रोत्साहित करते हैं।[6] ये प्रक्षेपास्त्र संघनन पथ मुख्यतः धातु ऑक्साइड कणों, उच्च तापमानीय जलवाष्प संघनन कणों तथा इंजन दहन के अन्य उपोत्पादों से निर्मित होते हैं।[7][8]
संघनन पथों की दृश्यता उस ऊँचाई पर तापमान एवं आर्द्रता पर निर्भर करती है जहाँ वे निर्मित होते हैं। ये कुछ क्षणों या मिनटों तक ही दिख सकते हैं, अथवा कई घण्टों तक बने रहकर कई किलोमीटर तक फैल सकते हैं, जिससे वे प्राकृतिक सिरस अथवा अल्टोक्युम्युलस मेघों के समान प्रतीत होते हैं।[9] दीर्घकालिक संघनन पथ वैज्ञानिकों के लिए विशेष रुचिकर होते हैं क्योंकि वे वायुमण्डल की मेघता को बढ़ाते हैं।[10] इनसे उत्पन्न मेघों को औपचारिक रूप से होमोम्यूटेटस कहा जाता है, जो सिरस, सिरोक्युम्युलस अथवा सिरोस्ट्रेटस के समान होते हैं, तथा कभी-कभी सिरस एवियाटिकस भी कहे जाते हैं।[11] कुछ दीर्घकालिक संघनन पथ जलवायु परिवर्तन में योगदान करते हैं।[12]
इंजन निष्कास से उत्पन्न संघनन पथ
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विमान इंजन का निष्कास मुख्यतः जल एवं कार्बन डाइऑक्साइड से बना होता है, जो हाइड्रोकार्बन ईंधन के दहन उत्पाद हैं। अपूर्ण दहन से उत्पन्न अनेक रासायनिक उपोत्पाद जैसे वाष्पशील कार्बनिक यौगिक, अकार्बनिक गैसें, बहुचक्रीय सुगन्धित हाइड्रोकार्बन, ऑक्सीजनयुक्त कार्बनिक यौगिक, अल्कोहल, ओज़ोन तथा कालिमा के कण अल्प मात्रा में पाए जाते हैं। इनकी मात्रा इंजन के प्रकार एवं दहन की प्रक्रिया पर निर्भर करती है, जिसमें विमान निष्कास का लगभग ३०% अपदग्ध ईंधन हो सकता है। इंजन के घर्षण से उत्पन्न सूक्ष्म धात्विक कण भी देखे गए हैं।[13]
उच्च ऊँचाई पर जब यह जलवाष्प शीत वातावरण में प्रवेश करता है, तो स्थानीय जलवाष्प की वृद्धि वायु की सापेक्ष आर्द्रता को संतृप्ति बिन्दु से ऊपर पहुँचा देती है। तब वाष्प सूक्ष्म जलबिन्दुओं में संघनित हो जाती है, जो यदि तापमान पर्याप्त रूप से निम्न हो तो हिमकणों में परिवर्तित हो जाती है। ये असंख्य सूक्ष्म जलबिन्दु एवं हिमकण संघनन पथ का निर्माण करते हैं। वाष्प के शीतल होने में लगने वाला समय विमान से कुछ दूरी पर संघनन पथ के निर्माण का कारण बनता है।[उद्धरण चाहिए]
उच्च ऊँचाई पर अधिशीतित जलवाष्प को संघनन हेतु प्रेरक की आवश्यकता होती है। विमान के निष्कास में उपस्थित कण इस कार्य को करते हैं, जिससे वाष्प तीव्रता से संघनित होती है। संघनन पथ सामान्यतः ८,००० मीटर (२६,००० फुट) से अधिक ऊँचाई पर बनते हैं, जहाँ वायु का तापमान −३६.५° सेल्सियस (−३४° फ़ैरेनहाइट) से कम होता है। ये पृथ्वी की सतह के समीप भी बन सकते हैं यदि वायु शीतल एवं आर्द्र हो।[14]
वर्ष २०१३–२०१४ (संवत् २०७०–२०७१) में नासा, जर्मन एयरोस्पेस केन्द्र डीएलआर तथा कनाडा की राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद एनआरसी द्वारा संयुक्त रूप से किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि जैवईंधन संघनन पथ के निर्माण को घटा सकते हैं। यह कमी इस तथ्य से स्पष्ट हुई कि जैवईंधन से उत्पन्न कालिमा के कण कम होते हैं, जो हिमकणों के निर्माण हेतु नाभिक का कार्य करते हैं। इस परीक्षण में एक डीसी-८ विमान को परिभ्रमण ऊँचाई पर उड़ाया गया, तथा एक नमूना-संग्रहण विमान उसके पीछे उड़ाया गया। इन नमूनों में संघनन पथ उत्पन्न करने वाले कालिमा कणों की संख्या ५०% से ७०% तक कम पाई गई, जब पारम्परिक जेट ए१ ईंधन को हेफ़ा (हाइड्रोप्रोसेस्ड एस्टर्स एवं फैटी एसिड्स) जैवईंधन के साथ ५०% मिश्रण में प्रयोग किया गया, जो कैमेलिना नामक वनस्पति से प्राप्त किया गया था।[15][16][17]
विघटन पथ
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जब कोई विमान किसी मेघमण्डल से होकर गुजरता है, तो वह अपने मार्ग में मेघों को विस्थापित कर सकता है। इसे विघटन पथ (अंग्रेज़ी: distrail, dissipation trail) कहा जाता है। विमान के गर्म इंजन निष्कास तथा उसके पीछे उत्पन्न ऊर्ध्वाधर मिश्रण की तीव्रता से विद्यमान जलबिन्दु वाष्पित हो सकते हैं। यदि मेघ पर्याप्त पतला हो, तो ऐसी प्रक्रिया से एक मेघविहीन मार्ग उत्पन्न हो सकता है। वर्ष १९८६ (संवत् २०४३) में कॉर्फ़िडी एवं ब्रैण्डली द्वारा उपग्रह से विघटन पथों का प्रारम्भिक अवलोकन किया गया, जो सम्भवतः विमान-प्रेरित फॉल्स्ट्रिक होल्स थे।[18]
मेघ तब बनते हैं जब अदृश्य जलवाष्प सूक्ष्म जलबिन्दुओं अथवा हिमकणों में संघनित हो जाती है। यह तब होता है जब जलवाष्पयुक्त वायु शीतल होती है। विघटन पथ तब बनता है जब इंजन की ऊष्मा मेघ में विद्यमान जलबिन्दुओं को वाष्पित कर अदृश्य जलवाष्प में परिवर्तित कर देती है।
विघटन पथ उस स्थिति में भी उत्पन्न हो सकता है जब विमान के गुजरने के पश्चात् मेघ की पतली परत के ऊपर अथवा नीचे स्थित शुष्क वायु का मिश्रण (एंट्रेनमेंट) होता है।[19]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Aircraft Contrails Factsheet" (PDF). FAA.Gov. 2006-09-28 को मूल से पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि: 10 September 2023.
- ↑ "vapour trail". Encyclopædia Britannica। Encyclopædia Britannica Inc.।
- ↑ Sutherland, Scott (March 23, 2017). "Cloud Atlas joins the digital age while adding a dozen new cloud types". The Weather Network. Pelmorex Media. अभिगमन तिथि: 13 August 2025.
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- ↑ "The Russian Missile Contrail You May Have Missed During the Shutdown". earthobservatory.nasa.gov (अंग्रेज़ी भाषा में). NASA Earth Observatory. 2013-10-17. मूल से से 17 Feb 2025 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-02-28.
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- ↑ Voigt, Ch.; Schumann, U.; Graf, K. (2016-07-01). Calabro, M.; Deluca, L.; Frolov, S.; Galfetti, L.; Haidn, O. (eds.). "Contrail formation in the tropopause region caused by emissions from an Ariane 5 rocket". EUCASS Proceedings Series. 8: 183–196. बिबकोड:2016EUCAS...8..183V. डीओआई:10.1051/eucass/201608183. ISBN 978-5-94588-191-4.
- ↑ Li, Chenshuo; Fu, Debin; Wei, Tianyu (2025-02-21). "Random walk dispersion model for missile contrail particles in cross-airspace environments". Defence Technology. 49: 307–320. डीओआई:10.1016/j.dt.2025.02.015. आईएसएसएन 2214-9147.
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- ↑ "Cirrus Aviaticus – Cirrus – Names of Clouds". namesofclouds.com. अभिगमन तिथि: 13 October 2021.
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- ↑ Ritchie, Glenn; Still, Kenneth; Rossi Iii, John; Bekkedal, Marni; Bobb, Andrew; Arfsten, Darryl (2003). "Biological and health effects of exposure to kerosene-based jet fuels and performance additives". Journal of Toxicology and Environmental Health, Part B. 6 (4): 357–451. बिबकोड:2003JTEHB...6..357R. डीओआई:10.1080/10937400306473. पीएमआईडी 12775519. एस2सीआईडी 30595016.
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- ↑ Richard H. Moore; et al. (15 March 2017). "Biofuel blending reduces particle emissions from aircraft engines at cruise conditions" (PDF). Nature. 543 (7645): 411–415. बिबकोड:2017Natur.543..411M. डीओआई:10.1038/nature21420. पीएमसी 8025803. पीएमआईडी 28300096. एस2सीआईडी 4447403. 2019-04-27 को मूल से पुरालेखित (PDF).
- ↑ Corfidi, Stephen; Brandli, Hank (May 1986). "GOES views aircraft distrails" (PDF). National Weather Digest. 11: 37–39. 2017-04-21 को मूल से पुरालेखित (PDF). अभिगमन तिथि: 13 October 2021.
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