संक्रमण ताप

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जिस ताप पर कोई पदार्थ अपनी क्रिस्टल अवस्था बदल देता है उसे उसका संक्रमण ताप (transition temperature) कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब रोम्बिक सल्फर को 95.6 °C से ऊपर तक गरम किया जाता है तो यह मोनोक्लिनिक सल्फर में बदल जाता है। यदि इसे पुनः 95.6 °C से नीचे तक ठण्डा किया जाय तो पुनः रोम्बिक सल्फर बन जाता है। अतः इसका संक्रमण ताप 95.6 °C है और इस ताप पर इसके दोनों रूप एक साथ अस्तित्वमान होते हैं।

दूसरा उदाहरण टिन का है जो 13.2 °C से नीचे घन आकार का होता है और उससे अधिक ताप पर चतुष्फलकी का रूप (tetragonal shape) धारण कर लेता है।

लौहविद्युतीय (ferroelectric) या लौहचुम्बकीय क्रिस्टलों के मामले में इनका क्यूरी ताप ही संक्रमण ताप है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]