संकलन-त्रय

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संकलन-त्रय नाटक और एकांकी के क्षेत्र में तीन नाट्य-अन्वितियों काल, स्थान तथा कार्य के लिए प्रयुक्त पारिभाषिक शब्द है। [1] कथावस्तु, चरित्र-चित्रण, संवाद, देश-काल, भाषा-शैली, उद्देश्य, अभिनेयता एवं संकलन-त्रय एकांकी नाटक के प्रमुख तत्व हैं। इनमें संकलन-त्रय का निर्वाह एकांकी और नाटक के लिए अनिवार्य है।

इतिहास[संपादित करें]

अरस्तु के काव्यशास्त्र पोएटिक्स में समय की एकता (यूनिटी ऑफ टाइम), स्थान की एकता (यूनिटी ऑफ प्लेस) तथा कार्य की एकता (युनिटी ऑफ ऐक्शन) का जिक्र किया है। अरस्तु ने त्रासदी के विवेचन में लिखा है- "त्रासदी को यथासंभव सूर्य की परिक्रमा (एक दिन) या इससे कुछ अधिक समय तक सीमित रखने का प्रयत्न किया जाता है।"[2]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. डॉ अमरनाथ (2016). हिंदी आलोचना की पारिभाषिक शब्दावली. नई दिल्ली: राजकमल प्रकाशन. पृ॰ 343. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-267-2207-5.
  2. धीरेंद्र, वर्मा (१९८५). हिंदी साहित्य कोश, भाग. वाराणसी: ज्ञानमंडल लिमिटेड. पृ॰ ६९०.