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कलाल मूसलीम बने चोपदार मूसलीम[संपादित करें]

चोपदार समाज का ईतीहास और कड़वा सच।।।।।। अजीज साथियो आज चोपदार समाज के चकनाचूर होते इतिहाश को अपने हल्फाजों से लिख रहा हु किसी तरहः से भी कोई आहत ना हो किउ की में एक कड़वी सच्चाई लिख रहा हु लगभग 650 वर्ष परहले हमारे चोपदार समाज के दादा राजपूत थे ईमान लाय ओर मुसलमान हो गय उस जमाने से ही हमारे कल तक राजपूती वेश भूसा रीतिरिवाज रहे युद्ध के क्षेत्र में भी चोपदार योद्धाओं ने समय समय पर अपनी कॉम का नाम रोशन किया है चाहे वो विश्व युद्ध हो या भारतीय राजाओ का युद्ध हो या भारतीय चोपदार योद्धाओं ने दुश्मन को हराने में अपनी भूमिका निभाई है लेकिन आज के चोपदार में लगता है कोई न कोई कही न कहीं कमजोर होते योद्धा दिख रहे है कारण साफ शब्दों में यही है कि चोपदार कहे जाने वाली एक कॉम ओर उस मे ग्रह युद्ध जैसे हालात वर्चस्व की लड़ाई कुछ मंदबुद्धि चोपदार द्वारा अपने आप को चोपदर में सब से बड़ा चोपदार होने का दावा मतलब में आप की कॉम से बड़ा चोपदार हूँ का नारा लगा कर कॉम को भिन्न भिन्न भागो में बांटना दूसरा वाक्या महासभा के रूप में चोपदार कई मुख्य धारा से दूर करने का प्रयासः क्या हम इसी तरह रोज रोज अपने स्थीत्व को खोते चले जायगे ?????? क्या कॉम को एक मंच पर लाकर इन छोटी छोटी कुरीतियों को सुलझाने की हम में हिमत नही??????? क्या हम हमारे धुंधले होते इतिहाश को मिटा कर ही चयन लेंगे ????क्या कॉम में किसी भी सुरवीर में यह हिमत नही की हम रजवाड़ा थे तो राजाओ जैसे बने भी??? क्या किसी मे इस इतिहाश को जिंदा रखने का हुनर नही ? क्या चोपदार जो विश्व मे एक मार्सल कॉम है अपने मसायल हल कर सके यह हम में हिमत नही ?????? में इलतीजाह करुगा कॉम को एक करने की किसी चोपदार में हिमत है तो इस मसायल को सुलझाने के लिये आगे आय और गुमराह होती इस मार्सल कॉम को एक मंच पर लाय छोटे बड़े यह सब बीते युग की बाते है आज बड़ा वोह है जो अपनी कॉम ओर अपने वतन से मोहबत करता है जाहिलियत को छोड़ कर सबसे पहले इस मुद्दे को सुलझाओ वरना 2 भागो में तो कॉम बंट चुकी है न जाने आगे आने वाली पीढियां इस कॉम का स्थीत्व किताबों तक मे सिमटा हुवा ही देख पाय ?? कड़वी है पर आज की चोपदार कॉम की सचाई है अपनो से विचार साझा करें जल्द कॉम को एक मंच पर लाने में अपना योगदान करे नही तो हर चोपदार अपने आप को अध्यक्ष घोसित करलेता है कि में फला जिला अध्यक्ष में फला वोह यह तो उन्ही की तर्ज पर बहुत जल्द में भी अपने आप को राष्ट्रीय अध्यक्ष चोपदार घोसित करने वाला हूँ आओ एक मंच पर जो गीले शिकवे है उन्हें कॉम की सदारत पर निपटाये आप का ही एक दुखी m.s चोपदाद भाई ओर यही सचाई ह कयू की आज भी चोपदार समाज की ओरते राजपूती पोसाख पहनती ह ईस स परमपरा को आज तक पकड़ा हूवा ओर यही सच ह ...महबूब भाटी चोपदार चूरू ..........💐मेरा गाव ख्याली जो झूनझूनू💐 डीसटीक मे ह ओर चूरू के नजदीक चूरू से 20 कीलोमीटर की दूरी पर बसा ह याहा पर जाती चमार,नाईक,राजपूत,कसाई, काजी,ओर कलाल चोपदार रहते ह ओर हमारा गाव भाई चारे की मीसाल ह याहा पर होली ईद दीवाली बकरीद सभी लोग मील कर मनाते ह

आज ही नहीं सन 1840वि.स.जब इंद्रसिंह &रत्न सिंह दादो सा ने यह 8वां गांव सोलंकी राजपूतों से जीता था ओर आन बान सयान से ईस गाव व ईस गाव मे रहने वाले लोगे का मसी हा थे ओर ईस गाव मे वहूत से लोग बहूत पसे वाले भी ह 70% लोग याहा आज के वकत सरकारी नोकरी करते ह तब से लेकर आज तक ख्याली गांव के 80 परशेंट लोग गांव से बाहर सैटल्ड है। हमारे गांव का नाम रोशन किया है .............।...................................महबूब खान कलाल चोपदार भाटी .......जय हीनद💐 महबूबभाटीचोपदार (वार्ता) 18:46, 30 अक्टूबर 2017 (UTC)