श्री भीमा काली मंदिर

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Bhimakali temple.jpg
भीमाकाली मंदिर के बाहरी हिस्से में सूक्ष्म लकड़ी का काम

श्री भीमा काली मंदिर भारत में हिमाचल प्रदेश के सराहन में एक प्राचीन मंदिर है, जो कि माता भीमाकाली देवी को समर्पित है, जो पूर्व बुशहर राज्य के शासकों के देवी हैं। यह मंदिर शिमला से लगभग 180 किमी दुरी पर स्थित है और हिन्दू धर्म के 51 शक्तिपीठों में से एक है। सराहन शहर को किन्नौर के द्वार के रूप में जाना जाता है। सराहन से 7 किमी की दूरी पर नीचे सतलुज नदी है। सराहन की पहचान पुराणों में वर्णित तत्कालीन सोनितपुर से की गई है। [1]

भीमकली के बारे में पौराणिक कथा[संपादित करें]

एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी के प्रकट होने की घटना दक्ष-यज्ञ के दौरान मिलती है, जब सती का कान इस स्थान पर गिरा था और तब से यह पिठ - स्थन के रूप में पूजा स्थल बन गई थी। वर्तमान में एक कुंवारी के रूप में इसे शाश्वत देवी का प्रतीक मन जाता हे जो नए भवन के शीर्ष मंजिला पर संरक्षित है। उसके नीचे हिमालय की पुत्री देवी पार्वती के रूप में, भगवान शिव के दिव्य संघ के रूप में विराजित है।

मंदिर के परिसर में भगवान श्री रघुनाथजी, नरसिंहजी और पाताल भैरव जी (लंकरा वीर) - संरक्षक देवताओं को समर्पित तीन और मंदिर हैं।

इतिहास[संपादित करें]

सराहन बुशहर राज्य के पूर्व शासकों की राजधानी थी। बुशहर राजवंश पहले कामरो से राज्य को नियंत्रित करते थे । बाद में राज्य की राजधानी सोनितपुर में स्थानांतरित कर दी गई। उसके बाद राजा राम सिंह ने रामपुर को अपनी राजधानी बनाया। [१] ऐसा माना जाता है कि किन्नौर देश पुराणों में वर्णित कैलाश था, जो शिव का निवास स्थान था। सोनितपुर में अपनी राजधानी के साथ यह पूर्व रियासत किन्नौर के पूरे क्षेत्र तक विस्तारित थी जहां कभी-कभी भगवान शिव ने स्वयं को किरात के रूप में प्रच्छन्न किया था। आज तत्कालीन सोनितपुर को सराहन के नाम से जाना जाता है। भगवान शिव के प्रबल भक्त बाणासुर, पुराण युग के दौरान महान अभिमानी दानव राजा बालि और विष्णु भक्त प्रहलाद के महान पौत्र के सौ पुत्रों में से एक थे, जो इस रियासत के शासक थे।


गेलरी[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Prem N. Nag, Dainik Jagran, 26 August 2007

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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