श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विद्यापीठ

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श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विद्यापीठ (SNDT Women's University) मुम्बई स्थित एक महिला विश्वविद्यालय है। इसका मुख्यालय दक्षिण मुम्बई (चर्चगेट) में स्थित है जबकि इसका मुख्य प्रांगण (कैम्पस) शांताक्रुज-जुहू क्षेत्र में है। इस विश्वविद्यालय के तीन प्रांगण हैं, दो मुम्बई में तथा तीसरा पुणे में। इस विश्वविद्यालय से महाराष्ट्र, असम, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, गोवा आदि के महाविद्यालय सम्बद्ध हैं। श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय (एसएनडीटी विश्वविद्यालय) यह भारत का एक महिला विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना महर्षी धोंडो केशव कर्वे ने की थी। यह भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय है। एसएनडीटी की स्थापना पुणे में हुई पर स्थलांतर मुंबई में होने पर सही रूप में यहाँ विस्तार की शुरुआत हुई। इस विश्वविद्यालय से संबंधित सब महाविद्यालय ‘एसएनडीटी कॉलेज’ के नाम से पहचाने जाते हैं।

दिसंबर, इ.स. १९१५ साल में धोंडो केशव कर्वे ने इंडियन सोशल काँग्रेस के (भारतीय सामाजिक परिषद) अध्यक्षीय भाषण में महिला विश्वविद्यालय की कल्पना सर्वप्रथम प्रस्तावित की। ३ जून, इ.स. १९१६ को विश्वविद्यालय की औपचारिक स्थापना हुई।

पाँच विद्यार्थियों का पहला वर्ग ५ जुलै, इ.स. १९१६ को शुरू होकर विश्वविद्यालय के काम की शुरुआत हुई।इ.स. १९१६ साल में विश्वविद्यालय की स्थापना भारतवर्षीय महिला विद्यापीठ (इंडियन विमेन्स युनिव्हर्सिटी) इस नाम से हुई। सर विठ्ठलदास ठाकरसीं ने इस विश्वविद्यालय को १५ लाख रुपये की मदद की थी इसलिए विश्वविद्यालय को उनकी माँ का नाम दिया गया। १९२० साल विश्वविद्यालय का नाम "श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय" ऐसा हुआ। 

विश्वविद्यालय की ओर से शुरुआत में जी.ए. (गृहीतागमा)और पी.ए. (प्रदेयागमा) ऐसी दो पदवी दि जाती थी। इ.स. १९५१ साल में इस विश्वविद्यालय को महाराष्ट्र सरकार की मान्यता मिली। इ.स. १९९४ में महाराष्ट्र विश्वविद्यालय कायदे में एक अलग कलम विद्यापीठ कायद्यात एक वेगळे कलम (क्रमांक १०५) सिर्फ श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी महिला विश्वविद्यालय के लिए है। यह विश्वविद्यालय महाराष्ट्र में और अन्य किसी भी राज्य में और केंद्रशासित प्रदेश में महाविद्यालय संलग्नित कर सकते हैं। आधुनिक अभ्यासक्रम इ.स. १९७४ साल में डॉ. नीराबेन देसाईं के मार्गदर्शन अंतर्गत Research Centre for Women's Studies स्थापन हुआ। इस केंद्र को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है।

१९७५ से १९८५ इस दशक में विश्वविद्यालय ने और तेरह नई पदव्युत्तर विभाग (उसमें Communication Media for Children जैसे नावीन्यपूर्ण काम करनेवाले विभाग है), पॉलिटेक्निक, फार्मसी महाविद्यालय और दूरस्थ शिक्षा केंद्र (१९७९) स्थापन हुए।

१९८५ के बाद के तीन दशक में बारा नावीन्यपूर्ण विभाग और संस्थाओ की स्थापना हुई इसमें व्यवस्थापन संस्था, (मॅनेजमेंट इन्स्टिट्यूट), तंत्रशास्त्र संस्था (इन्स्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी) रसायनशास्त्र, भूगोलशास्त्र, समाजकार्य संगणकशास्त्र (कंप्युटर सायन्स) न्यायशास्त्र, ज्वेलरी डिझाइन ऐसी अनेक संस्था है उसमें से महर्षि कर्वे मॉडेल कॉलेज फॉर विमेन यह रायगड जिले के श्रीवर्धन यहाँ २०११ साल में स्थापित किया गया महाविद्यालय है। इस महाविद्यालय में B.C.A.और B.Com यह अभ्यासक्रम चलता है।

२०१२-१३ इस वर्ष से सब पदव्युत्तर अभ्यासक्रम में (मास्टर्स डिग्री) इंटर्नशिप और संशोधन यह दो प्रत्येकी आठ क्रेडिट कोर्सेस प्रत्येक विद्यार्थिनी के लिए आवश्यक रखें गए। Internship के कारण विश्वविद्यालय ७५०-८०० संस्था से जोडे गए। विद्यार्थियो को placement की अनेक संधी उपलब्ध हुई।

दूरस्थ शिक्षण महर्षी कर्वे इन्होंने दूरस्थ शिक्षण का यह विचार विश्वविद्यालय स्थापन से ही किया था। सुप्रसिद्ध अणुशास्त्रज्ञ डॉ. अनिल काकोडकर इनकी मातोश्री दिवंगत कमलाताई काकोडकर और ऐसी अनेक स्त्रियाें ने स्वयं का घर, संसार, नोकरी, उद्योग संभालकर दूरस्थ शिक्षण पद्धती से उच्च शिक्षा ली। M.Com. यह ८० क्रेडिट का अभ्यासक्रम पूर्णतः ऑनलाइन प्रणाली से सीखाया जाता है। ऑगस्ट २०१५ से M.A. in Education यह अभ्यासक्रम भी पूर्णतः ऑनलाइन किया जाना है।

शाखा विश्वविद्यालय का मुख्यालय मुंबई में चर्चगेट के पास है।इसके अलावा मुंबई में जुहू यहाँ और पुणे में कर्वे रोड पर एक ऐसी दो शाखा है। मराठी, गुजराती, हिंदी, उर्दू इन चार माध्यम से अभ्यास करनेवाले विद्यार्थिनी इस विश्वविद्यालय का फायदा लेते है।एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय का विस्तार सिर्फ महाराष्ट्र राज्य तक ही मर्यादित न होकर वह गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, गोवा और आसाम जैसे और छ: राज्यों में हुआ है।

पुणे शाखा के महाविद्यालय के प्राचार्य (क्रमाक्रमाने) महर्षी कर्वे (पहिले प्राचार्य), डॉ. ना.मा. आठवले, प्रा. वामन मल्हार जोशी, डॉ. कमलाबाई देशपांडे, डॉ. गं.बा. सरदार, डॉ. शरयू बाळ, डॉ. का.शं. केळकर, डॉ. हे.वि. इनामदार, डॉ. क.वि. लोखंडे, डॉ. जी.वाय. शितोळे (इ.स. २०१६ में प्राचार्य)

विश्वविद्यालय के मुंबई की दो और पुणे की एक ऐसी तीनों शाखा अबवनेटवर्किंग द्वारे जोडी गई है।'महर्षि'ऐसा या व्हर्चुअल प्रायव्हेट नेटवर्किंग (VPN) प्रणाली का नाम है। यह VPN पर 'सुसंवाद' यह Intranet Portal (इंट्रानेट पोर्टल) है। अभी भी अनेक ॲप्स विकसित करने का काम चालू है।

शताब्दी के उपलक्ष्य में लिए गए प्रकल्प २०१५ साल में विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष शुरू हुआ उस शतक महोत्सव निमित्त विश्वविद्यालय ने अनेक महत्त्वाकांक्षी प्रकल्प पर काम करना शुरू किया है। इक्कीसवीं सदी का ग्रंथालय मतलब नॉलेज सेंटर, नवीन छ: भाषाध्यापन विभाग सहित बारा भाषा के लिए भाषाभवन, विज्ञानसंस्था, डिझाइन संस्था, नॅनोटेक्नॉलॉजी संस्था, जनसंप्रेषण (Mass Communication) संस्था, सेंट्रल इक्विपमेंट सुविधा, स्पोर्ट्‌स कॉम्प्लेक्स, महिलाओं के लिए आंतरराष्ट्रीय होस्टल, अतिथीगृह इ. प्रकल्प के लिए संस्था प्रयत्न कर रही है।

ज्यादा जानकारी पुराने जमाने में पुणे से बाहर स्थित यह विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज में आने जाने के लिए खास शहर बससेवा थी। इसके एक टर्म का यात्री किराया २० रुपये और ५५ विद्यार्थिनीयो के होस्टेल में प्रत्येक को टर्म के ३५ रुपये लिए जाते हैं। ऐसी जानकारी एस.एम. कणगली ने उनके ‘पुण्याचा माहीतगार’ इस किताब में दि है।

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