श्रवणकुमार

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
राजा दशरथ और श्रवण

श्रवण कुमार हिन्दू धर्म ग्रंथ रामायण में उल्लेखित पात्र है, ये अपने माता पिता से अतुलनीय प्रेम के लिए जाने जाते हैं।

श्रवण कुमार का वध राजा दशरथ से भूलवश हो गया था, वहीं कई लोग यह भी कहते है कि राजा दशरथ ने जान बूझ कर सरवन का हत्या किए थे।जब दसरथ शब्द भेदी तीर चलाते थे तो तीर नदी और पानी के पात्र को लगना चाहिए था।तो सरवन की कैसे लगा।दूसरी बात भैस के शिकार हेतु तीर भी चलाने की बात आती है।और शिकार लेने आये तो मनुष्य दिखा।जिस कारण इनके माता पिता ने राजा दशरथ को पुत्र वियोग का शाप दे दिया था इसी के फलस्वरूप राम को वनवास हुआ और राजा दशरथ ने पुत्र वियोग में राम को याद करते हुए प्राण त्यागेश्रवण अथवा श्रवण कुमार संस्कृत काव्य रामायण के एक पात्र का नाम है। इसमें श्रवण की उल्लेखनीयता उसकी अपने माता-पिता की भक्ति के कारण है। lekin ye baat bilkul tathya heen ki teer patra par lgna chahiye kyoki janwar ki jan lene ke liye dasrath ne thoda sa upar mara taki teer janwer ke gardan mein jake lage jo ki sarvan ki chhati mein jakar lgti hai