शोधगंगा

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शोधगंगा भारत के शोधप्रबन्धों का आनलाइन एलेक्ट्रानिक भण्डार है। यह इन्फ्लिबनेट केन्द्र (INFLIBNET Centre) द्वारा स्थापित किया गया है। इनफ्लिबीनेट अहमदाबाद की ऑनलाइन कम्पनी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के जून २००९ के एक आदेश के अनुसार विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के लिए अपने शोध-प्रबन्धों का एलेक्ट्रानिक रूप में भी जमा करना अनिवार्य बना दिया गया है।

परिचय[संपादित करें]

इंटरनेट पर उपलब्ध इस योजना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विश्वविद्यालयों में विभिन्न विषयों में शोधपत्रों को ऑनलाइन उपलब्ध करवाना और पीएचडी में थीसिस में नकल की बढ़ती प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है। शोधपत्रों के अध्ययन के लिए भारत में उपलब्ध यह सबसे अच्छी व्यवस्था है। यूजीसी द्वारा शुरू की गई ‘शोधगंगा’ से अब तक देश के 70 के करीब नामचीन विवि जुड़ चुके हैं। इस योजना के तहत देशभर के सभी विवि के शोधपत्र ऑनलाइन किए जा रहे हैं। यानी की अब किसी भी विवि का शोधपत्र कहीं भी देखा जा सकता है।

जानकारों के अनुसार ‘शोधगंगा’ के आगाज का निर्णय पीएचडी में थीसिस में नकल करने की बढ़ती प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर लिया गया है। जानकारों का मानना है कि अब शोधपत्रों की नकल करना मुश्किल हो जाएगा। यूजीसी की इस व्यवस्था को लागू करने के लिए विवि को अलग से फंड भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। इसके माध्यम से पीएचडी, डी-लिट और डीएएससी के सभी शोध पत्र वेबसाइट पर अपलोड किए जा रहे हैं। यूजीसी ने अहमदाबाद स्थित इन्फार्मेशन लाइब्रेरी की इनफ्लिब्नेट कंपनी को ऑनलाइन रिसर्च मैटीरियल उपलब्ध करवाने का कार्य सौंपा है। इसके लिए सभी विवि को कंपनी को थीसिस सामग्री उपलब्ध करवाने को कहा गया है। विवि में पीएचडी व एमफिल अवार्ड करने के बाद थीसिस की सीडी यूजीसी को भी मुहैया करवानी होगी।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]