शुलामिथ फ़ायरस्टोन

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शुलामिथ फ़ायरस्टोन
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ल. 1970 में शुलामिथ
जन्म Shulamith Bath Shmuel Ben Ari Feuerstein[1]
January 7, 1945
ओटावा, ओंटेरियो, कनाडा
मृत्यु अगस्त 28, 2012(2012-08-28) (उम्र 67)[2]
न्यू यॉर्क शहर, संयुक्त राज्य
शिक्षा प्राप्त की
  • Washington University (BA)
  • Art Institute of Chicago (Bachelor of Fine Arts)
संबंधी तिरज़ा फ़ायरस्टोन (बहन)

शुलामिथ "शूली" फायरस्टोन (अंग्रेज़ी- Shulamith"Shulie" Firestone, जनवरी 7, 1945 - अगस्त 28, 2012) [2] एक कनाडाई मूल की अमेरिकी कट्टरपंथी नारीवादी थीं। वे कट्टरपंथी नारीवाद और नारीवाद की दूसरी-लहर के शुरुआती दौर में इस आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में से थीं। फायरस्टोन तीन कट्टरपंथी-नारीवादी समूहों की एक संस्थापक सदस्य थीं: न्यूयॉर्क रेडिकल वीमेन, रेडस्टॉकिंग और न्यूयॉर्क रेडिकल फेमिनिस्ट। वे आज भी मार्क्सवादी नारीवाद का सबसे प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं। वे 1960 के दशक में राजनीति में भी सक्रिय रहीं।

1970 में उन्होंने द डायलेक्टिक ऑफ सेक्स: द केस फॉर फेमिनिस्ट रिवोल्यूशन लिखी, जो एक प्रभावशाली नारीवादी पाठ बन गई। [3] नाओमी वुल्फ (अमेरिकी नारीवादी लेखिका) ने 2012 में इस पुस्तक के बारे में कहा: "यह पुस्तक दूसरी-लहर नारीवाद के लिए मील का पत्थर है, इसे पढ़े बिना कोई भी यह नहीं समझ सकता है कि नारीवाद कैसे विकसित हुआ है।" [4]

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा[संपादित करें]

शुलामिथ फ़ायरस्टोन का जन्म 7 जनवरी, 1945 [5] को कनाडा के ओटावा शहर में एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनके पिता ने किशोरावस्था में रूढ़िवादी यहूदी धर्म अपना लिया था और द्वितीय विश्व युद्ध में अपनी सेवाएँ दी थी। सुसान फलूदी के अनुसार, फ़ायरस्टोन के पिता ने धर्मपरिवर्तन के उत्साह के साथ अपने बच्चों पर कड़ा नियंत्रण रखा। उनकी एक बहन, तिरज़ा फ़ायरस्टोन ने फालुदी को बताया, "मेरे पिता ने शूली पर अपना सारा गुस्सा उतारा।" शुलामिथ ने परिवार में होने वाले लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज़ उठाई; जब उनके पिता ने उनसे यह अपेक्षा की कि वे अपने भाई का बिस्तर ठीक करें, सिर्फ़ इसलिए "क्योंकि, तुम एक लड़की हो"। दूसरी बहन लीया फायरस्टोन सेगी ने बताया कि पिता और बेटी में रिश्ते इतने ख़राब थे कि वे दोनों एक-दूसरे को मारने की धमकी दिया करते थे। [6]

बाद में शुलामिथ नारीवादी स्वयंसेवक कार्य में जुट गयीं।

लेखन[संपादित करें]

द डायलेक्टिक ऑफ सेक्स: द केस फॉर फेमिनिस्ट रिवोल्यूशन (1970) सेकंड-वेव फेमिनिज्म का एक क्लासिक पाठ बन गया। यह फायरस्टोन की पहली किताब थी और जब वह सिर्फ 25 साल की थी तब प्रकाशित हुई थी। [7]पुस्तक में, फायरस्टोन ने सेक्स के आधार पर इतिहास केएक भौतिकवादी दृष्टिकोण को विकसित करने की मांग की।[8] इसके अलावा पुस्तक में एक महिला उत्पीड़न रहित समाज की कल्पना भी की गई है, जो फ़ायरस्टोन के मुताबिक़ आदर्श समाज है। [9]

द डायलेक्टिक अव सेक्स (1970)[संपादित करें]


Just as to ensure elimination of economic classes requires the revolt of the underclass (the proletariat) and, in a temporary dictatorship, their seizure of the means of production, so to assure the elimination of sexual classes requires the revolt of the underclass (women) and the seizure of control of reproduction: not only the full restoration to women of ownership of their own bodies, but also their [temporary] seizure of control of human fertility—the new population biology as well as all the social institutions of child-bearing and child-rearing. ... [T]he end goal of feminist revolution must be, unlike that of the first feminist movement, not just the elimination of male privilege but of the sex distinction itself: genital differences between human beings would no longer matter culturally.[10]

जिस तरह आर्थिक वर्गों के उन्मूलन को सुनिश्चित करने के लिए अंडरक्लास (सर्वहारा) के विद्रोह की आवश्यकता होती है, और एक अस्थायी तानाशाही में, उत्पादन के साधनों की जब्ती चाहिए होती है, इसी प्रकार लैंगिक वर्गों के उन्मूलन को सुनिश्चित करने के लिए अंडरक्लास (महिलाओं) के विद्रोह की आवश्यकता है और प्रजनन के साधनों की जब्ती अनिवार्य है- न केवल अपने शरीर पर महिलाओं का पूर्ण रूप से स्वामित्व, बल्कि [अस्थायी रूप से] उनके मानव प्रजनन क्षमता के साधनों पर नियंत्रण स्थापित करना- नई आबादी जीव विज्ञान के साथ-साथ बच्चे पैदा करने वाले सभी सामाजिक संस्थानों और बाल-पालन पर नियंत्रण ...नारीवादी क्रांति का अंतिम लक्ष्य, पहले नारीवादी आंदोलन के विपरीत, न केवल पुरुष विशेषाधिकार के उन्मूलन, बल्कि लिंग भेद स्वयं का ही उन्मूलन : मानव के बीच जननांग के अंतर सांस्कृतिक रूप से मायने नहीं रखेंगे।


फायरस्टोन ने राजनीति के कट्टरपंथी नारीवादी सिद्धांत में सिगमंड फ्रायड, विल्हेम रीच, कार्ल मार्क्स, फ्रेडरिक एंगेल्सऔर सिमोन द बोउआर के विचारों को संश्लेषित किया।[11]

अपनी पुस्तक के भीतर, फायरस्टोन का दावा है कि आधुनिक समाज तब तक वास्तविक रूप से लैंगिक बराबरी हासिल नहीं कर सकता जब तक कि महिलाओं की पहचान को उनके जैविक लक्षणों से अलग नहीं कर दिया जाता जाता। यानी महिला होना किसी मनुष्य की पहचान का, उसके अस्तित्व का अपने आप में एक अलग पहलू माना जाए, ऐसा जो कि महिला होने के सार को केवल उनके जननांग दूसरों से अलग होने तक सीमित न रखे। वे यह भी दावा करती हैं कि फ्रायड और मार्क्स ने एक बात नज़रअंदाज़ कर दी थी, जिसे वे "सेक्स वर्ग" (क्लास) बताती हैं (जो कि मार्क्स की बताई वर्कर क्लास/ कामगार वर्ग से भिन्न है)। जहाँ मार्क्स यह कहते हैं कि सर्वहारा (कामगार-मज़दूर) शोषित वर्ग हैं, और उनके शोषण से निजात पाने के लिए सर्वहारा-क्रांति करने की सलाह देते हैं, फ़ायरस्टोन का मानना है कि महिलाएँ भी अपने आप में एक अलग शोषित वर्ग हैं, जिसे अब तक नज़रंदाज किया गया है। स्त्री-पुरुष में जैविक अंतर का तर्क देकर समाजी तौर पर लिंगभेद को उचित ठहराया जाता है।

महिलाओं के द्वारा लगाए गए बोझ (लिंग असमानता) पितृसत्तात्मक सामाजिक ढांचे से उत्पन्न होते हैं। फ़ायरस्टोन ने तर्क दिया कि यह सोच महिलाओं के शरीर और उसकी भिन्नता के कारण पैदा हुई- विशेष रूप से गर्भावस्था, प्रसव और बच्चे के पालन-पोषण से होने वाले शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक नुकसान।[12] उस समय के कई अन्य नारीवादियों के विपरीत (जिन्होंने अपने तर्क में महिला अस्तित्व को श्रेष्ठतर बताया), फायरस्टोन ने स्वतंत्र रूप से स्वीकार किया कि पुरुषों और महिलाओं के बीच जैविक अंतर हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही ये अंतर वास्तविक क्यों न हों, लेकिन इन्हें एक (लैंगिक) समूह का दूसरे के ऊपर पूर्वाग्रह या श्रेष्ठता की नींव के रूप में नहीं माना जा सकता। फायरस्टोन यह भी जोर देकर कहती हैं कि मानव होने का अर्थ है प्रकृति से ऊपर उठना,[13] वे कहती हैं, "हम अब प्रकृति का हवाला देकर पर एक भेदभावपूर्ण लैंगिक वर्ग प्रणाली के रखरखाव को उचित नहीं ठहरा सकते।"

उन्होंने माना कि सेक्स-वर्ग को ख़त्म के लिए आवश्यक है कि महिलाएँ प्रजनन के साधनों पर नियंत्रण सम्भालें।[14] उन्होंने गर्भावस्था और बच्चे के जन्म को एक "बर्बर" प्रक्रिया बताया (उनकी एक दोस्त ने बच्चे को जन्म देने के दौरान होने वाले दर्द की तुलना "शौच में कद्दू निकालने" से की)। उन्होंने एकल परिवार (nuclear family) को महिला उत्पीड़न का प्रमुख स्रोत माना। गर्भनिरोधक, इन विट्रो फ़र्टिलाईज़ेशन (IVF) और अन्य अग्रिमों का मतलब था कि एक दिन मैथुन की प्रक्रिया (सेक्स) गर्भावस्था और बच्चे के पालन-पोषण से अलग हो जाएगी, और तब महिलाएं मुक्त हो सकती हैं। हालांकि, फ़ायरस्टोन ने प्रजनन को एक कदम आगे ले जाने की उम्मीद भी की, एक ऐसा चरण जिसमें इसे महिला शरीर से पूरी तरह से अलग कर दिया जाए। उन्होंने "बोतलबंद बच्चे" के रूप में संदर्भित एक नए प्रकार के कृत्रिम प्रजनन के उद्भव का आग्रह किया, हालांकि इस तरह की क्रिया के लिए हमारे पास इन विट्रो के रूप में निकटतम विकल्प है, हम अभी तक फायरस्टोन के अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं।[15]

फायरस्टोन उस विषमता की भी आलोचना करती है जो विषमलैंगिक (heterosexual) पालन-पोषण और बाल विकास में मौजूद है। उन्होंने तर्क दिया कि तीन चीज़ें बच्चों की विकसित होने में बाधा बनती हैं-

  1. उनकी शिक्षा,
  2. सामाजिक पदानुक्रम में उनके पद का पहले से तय होना,
  3. और उनके जीवन में वयस्कों की तुलना में "कम महत्व" मिलना ।

इसी कारण माँओँ की अपने बच्चों से अपेक्षाएँ और उनके लिए दायित्व बढ़ गए हैं। इस बारे में फ़ायरस्टोन यह उम्मीद जताती हैं कि समाज एक दिन इससे आगे बढ़ जाएगा। माँओँ और बच्चों का एक-दूसरे पर इस प्रकार से निर्भर होना बच्चे का शारीरिक रूप से शोषण होने सम्भावना बढ़ाता है, और उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने और अपनी इच्छा से यौन आग्रह करने के अवसर से वंचित करती है। [16]

मृत्यु और विरासत[संपादित करें]

28 अगस्त 2012 को उनके अपार्टमेंट के मालिक द्वारा फ़ायरस्टोन को उनके न्यूयॉर्क अपार्टमेंट में मृत पाया गया।[17] उनकी बहन, लेया फ़ायरस्टोन सेगी के अनुसार, उनकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई। उनकी मौत की पुष्टि न्यूयॉर्क सिटी मेडिकल एक्जामिनर कार्यालय द्वारा की गई थी; रिपोर्टों के अनुसार, वह एक पुनर्जीवित फैशन में रहती थी और बीमार थी। [18][17] सुसान फलुदी द्वारा एक सराहनीय निबंध में, जो फायरस्टोन की मृत्यु के कई महीनों बाद प्रकाशित हुआ, द न्यू यॉर्कर पत्रिका ने उनके निधन की परिस्थितियों को और विस्तृत कर दिया, जिसमें उन्होंने सिज़ोफ्रेनिया के साथ फ़ायरस्टोन के दशकों के लंबे संघर्ष का हवाला दिया - जैसे स्व-प्रेरित भुखमरी की अटकलों के साथ (संभावित योगदान कारकों के रूप में)। [19]उनकी स्मृति में एक स्मारक सेवा की व्यवस्था की गई थी। [20]

कई महिला-अध्ययन कार्यक्रमों में अभी भी द डायलेक्टिक अव सेक्स का पाठ्यपुस्तक के रूप में का प्रयोग किया जाता है। इसकी सिफारिशें, जैसे कि बच्चों को एक लिंग तटस्थ ढंग में बड़ा करना, फायरस्टोन के आदर्शों को रेखांकित करती हैं। [21]

कार्य[संपादित करें]

टिप्पणियाँ[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Fox, Margalit (August 30, 2012). "Shulamith Firestone, Feminist Writer, Dies at 67". The New York Times.
  2. Butnick, Stephanie (August 30, 2012). "Shulamith Firestone (1945-2012)". Tablet Magazine.
  3. Benewick, Robert and Green, Philip (1998). "Shulamith Firestone 1945–". The Routledge Dictionary of Twentieth-Century Political thinkers. 2nd edition. Routledge, pp. 65–67.
  4. Anderson, Lincoln (August 30, 2012). "Shulamith Firestone, radical feminist, wrote best-seller, 67". The Villager.
  5. Encyclopedia of World Biography. Ed. Tracie Ratiner. Vol. 27. 2nd ed. Detroit: Gale, 2007. p129-131.
  6. Faludi, Susan (April 15, 2013). "Death of a Revolutionary". The New Yorker.
  7. Fox, Margalit. "Shulamith Firestone, Feminist Writer, Dies at 67".
  8. Firestone, Shulamith (1970). The Dialectic of Sex: The Case for Feminist Revolution. New York: William Morrow and Company. पृ॰ 25.
  9. https://www.taylorfrancis.com/books/e/9781317192763 (सब्सक्रिप्शन आवश्यक)
  10. Firestone 1970, पृ॰ 11.
  11. Rich, Jennifer (2014) [2007]. Modern Feminist Theory. Penrith: Humanities-Ebooks LLP, pp.  21ff. ISBN 978-1-84760-023-3
  12. Ackelsberg, Martha (March 1, 2009). "Shulamith Firestone, 1945–2012". Jewish Women: A Comprehensive Historical Encyclopedia. Jewish Women's Archive. अभिगमन तिथि June 24, 2010.
  13. Halbert, Deborah (February 17, 2007). "Information, Community, and Society". SHULAMITH FIRESTONE: Radical feminism and visions of the information society: 115–135. डीओआइ:10.1080/1369118042000208933.
  14. Sydie, R. A. (1994). Natural women, cultured men: a feminist perspective on sociological theory, University of British Columbia Press, p. 144.
  15. https://www.youtube.com/watch?v=t_jIOt6WIT4. गायब अथवा खाली |title= (मदद)
  16. Merck, Mandy; Sandford, Stella (2010). Further Adventures of The Dialectic of Sex: Critical Essays on Shulamith Fireston. Springer. पपृ॰ 1–6. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780230109995.
  17. Anderson, Lincoln (August 30, 2012). "Shulamith Firestone, radical feminist, wrote best-seller, 67". The Villager.
  18. Butnick, Stephanie (August 30, 2012). "Shulamith Firestone (1945-2012)". Tablet Magazine.
  19. Faludi, Susan (April 15, 2013). "Death of a Revolutionary". The New Yorker.
  20. "Death of a Revolutionary".
  21. Chertoff, Emily (31 August 2012). "Eulogy for a Sex Radical: Shulamith Firestone's Forgotten Feminism".

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]