शिरोधान लावा

शिरोधान लावा ऐसे लावा होते हैं जिनमें तकिए (पिलो) के आकार की खास संरचनाएँ होती हैं। ये संरचनाएँ पानी के नीचे लावा के बाहर निकलने की वजह से बनती हैं।[1] ज्वालामुखीय शैल में शिरोधान लावा की पहचान अलग-अलग तकिए के आकार के ढेर की मोटी परतों से होती है जिनका व्यास आमतौर पर एक मीटर तक होता है। ये तब बनते हैं जब लावा के निकलने की दर अपेक्षाकृत कम होती है।[2]
उपस्थिति
[संपादित करें]शिरोधान लावा उन जगहों पर पाए जाते हैं जहाँ पानी के नीचे लावा निकलता है। ये समुद्र के अंदर हॉटस्पॉट ज्वालामुखी की श्रृंखलाओं और मध्य-महासागर पर्वतमाला की रचनात्मक प्लेट सीमाओं के पास पाए होते है। धरती पर सबसे पुराने सुरक्षित ज्वालामुखी क्रमों इसुआ और बार्बरटन ग्रीनस्टोन बेल्ट में शिरोधान लावा का मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि आर्कियन युग की शुरुआत में पृथ्वी की सतह पर पानी के बड़े भंडार मौजूद थे। कायांतरित बेल्ट में पानी के नीचे होने वाली ज्वालामुखी गतिविधि की पुष्टि करने के लिए आमतौर पर शिरोधान लावा का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ अधोहिमनदीय ज्वालामुखी के साथ विस्फोट के प्रारंभिक चरण में शिरोधान लावा भी पाए जाते हैं।
संरचना
[संपादित करें]शिरोधान लावा आम तौर पर बेसाल्ट संरचना वाले होते हैं हालाँकि कोमाटाइट, पिकराइट, बोनिनाइट, एंडेसाइट, डेसाइट और यहाँ तक कि रायोलाइट से बने शिरोधान भी पाए जाते हैं।[3] आम तौर पर लावा के श्यानता में बढ़ोतरी के कारण संरचना जितनी ज़्यादा फेल्सिक होती है शिरोधान उतने ही बड़े बनते हैं।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "पिलो लावा". www.alexstrekeisen.it. अभिगमन तिथि: 19 जून 2026.
- ↑ "पिलो लावा". www.pmel.noaa.gov. अभिगमन तिथि: 17 जून 2026.
- ↑ फेंग, एन. (1 जनवरी 2003). "लेट प्लेयोजॉइक अल्ट्रामैफिक लावास इन यून्नान, एसडबल्यू चीन, एंड देयर ज्योडिनेमिक सिग्निफिशंस". जर्नल ऑफ़ पेट्रोलॉजी. 44 (1): 141–158. अभिगमन तिथि: 17 जून 2026.