शिमशाल

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शिमशाल
Shimshal / شمشال
शिमशाल की जम्मू और कश्मीर के मानचित्र पर अवस्थिति
शिमशाल
शिमशाल
शिमशाल की स्थिति
सूचना
प्रांतदेश: हुन्ज़ा-नगर ज़िला, गिलगित-बल्तिस्तान
जनसंख्या (-): २,०००
मुख्य भाषा(एँ): वाख़ी
निर्देशांक: 36°26′9″N 75°19′36″E / 36.43583°N 75.32667°E / 36.43583; 75.32667

शिमशाल (شمشال‎, Shimshal) पाक-अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बलतिस्तान क्षेत्र के हुन्ज़ा-नगर ज़िले की गोजाल तहसील में स्थित एक गाँव है। यह ३,१०० मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ है और हुन्ज़ा वादी की सबसे ऊँची बस्ती है। शिमशाल गाँव में वाख़ी भाषा बोलने वाले लगभग २,००० लोग रहते हैं जो शिया धर्म की इस्माइली शाखा के अनुयायी हैं। यहाँ पहुँचना बहुत कठिन हुआ करता था लेकिन अक्टूबर २००३ के बाद पस्सू से यहाँ सड़क बनाकर इसे काराकोरम राजमार्ग से जोड़ दिया गया।[1]

शिमशाल दर्रा[संपादित करें]

गावँ से ऊपर ४,७३५ मीटर ऊँचा शिमशाल दर्रा स्थित है। यह सिन्धु नदी और मध्य एशिया की तारिम नदी के जलसम्भर क्षेत्रों के बीच स्थित है। किसी ज़माने में हुन्ज़ा से आने वाले डाकू इस दर्रे से गुज़रकर लेह-यारकन्द मार्ग पर भारत और पूर्व तुर्किस्तान के बीच चलने वाले व्यापारिक क़ाफ़िलों पर हमला किया करते थे। यहाँ एक छोटा-सा दुर्ग भी बना हुआ था जिसका प्रयोग कभी तो यह डाकू और कभी हुन्ज़ा-नरेश के सैनिक किया करते थे। आजकल यहाँ पर्यटकों के लिए एक याक-धवन प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।[2] इस दर्रे के पार शिमशाल ब्रल्दु नदी की वादी है जो शक्सगाम नदी की एक उपनदी है।

स्थानीय पर्वत व हिमानियाँ[संपादित करें]

शिमशाल के इर्द-गिर्द कई बुलन्द पर्वत खड़े हैं जिनमें दिस्तग़िल सर ( Destaghil Sar, ७८८५ मीटर), ओदवेर सर (Odver Sar, ६३०३ मी), मिंगलिक सर (Minglik Sar, ६१५० मी), लुपग़र सर (Lupghar Sar, ७२०० मी), यज़ग़िल सर (Yazghil Sar, ६००० मी) और कनजुत सर (Kunjut Sar) शामिल हैं। इस क्षेत्र में कई हिमानियाँ (ग्लेशियर) भी मौजूद हैं जिनमें मलंगुधी, यज़ग़िल, ख़ुरदोपिन, ब्रल्दु, ओदवेर और वेर झ़रव जाने-माने हैं। इन नामों में बिन्दुयुक्त 'ख़', बिन्दुयुक्त 'ग़' और बिन्दुयुक्त 'झ़' के उच्चारणों पर ध्यान दें। इतने पर्वतों, हिमानियों और दर्रों से घिरे होने के कारण स्थानीय शिमशाली लोग पर्वतारोहण में माहिर माने जाते हैं और काराकोरम शृंखला पर चढ़ने वाले उन्हें मार्गदर्शन के लिये अक्सर साथ ले लेते हैं।[3]

सम्बन्धित चित्र[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Pakistan and the Karakoram Highway, Lindsay Brown, Paul Clammer, Rodney Cocks, John Mock, pp. 313, Lonely Planet, 2008, ISBN 9781741045420, ... Shimshal is a large Wakhi-speaking village supported by vast herds of sheep, goats and yaks that are moved up and down the valley with the seasons ...
  2. Himalayan Passage: Seven Months in the High Country of Tibet, Nepal, China, India, & Pakistan, Jeremy Schmidt, pp. 118, The Mountaineers Books, 1992, ISBN 9781594854477, ... Besides natural dangers, travelers worried about the Kanjuti raiders, who would sneak out the north end of Hunza (once called Kanjut) through a secret back door, the Shimshal Pass, and make their way two hundred miles through trackless gorges. They would ford the ice-laden rivers countless times, cross several high passes, and finally sweep down upon some hapless caravan, commit their murders, pillage the victims, take slaves and hustle back to their virtually unapproachable valley ...
  3. The World's Great Adventure Treks, Jack Jackson, pp. 76, New Holland Publishers, 2003, ISBN 9781843302612, ... The domain of the Shimshalis effectively begins immediately across the Hunza River from the village of Passu, where Shimshali men insist on doing any pottering into their territory. This may seem headstrong, but it should not be ignored that many are excellent mountaineers and high-altitude porters ...