शालिवाहन शक
शालिवाहन शक संवत् जिसे शक संवत भी कहते हैं, हिंदू पञ्चाङ्ग, भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और कम्बोडियाई बौद्ध पञ्चाङ्ग के रूप मे प्रयोग किया जाता हैं। माना जाता है कि इसकी प्रवर्तन (आरम्भ) वर्ष 78 ई. में वसन्त विषुव के आसपास हुई थी। शालिवाहन भाटी और शक संवत का इतिहास सम्राट शालिवाहन भाटी ने शक आक्रमणकारियों को हराकर विजय की स्मृति में “शालिवाहन शक संवत” की शुरुआत की, जिसकी गणना 78 ईस्वी से होती है और जिसे भारत सरकार ने राष्ट्रीय पंचांग (Indian National Calendar) के रूप में मान्यता दी है।
1. शालिवाहन भाटी और भाटी वंश – लोक परंपरा में शालिवाहन को भाटी वंश का महान शासक माना जाता है। कुछ इतिहासकार उन्हें सातवाहन साम्राज्य से जोड़ते हैं, परंतु राजस्थानी और भाटी परंपरा में उन्हें विशेष रूप से “भाटी” वंशीय सम्राट के रूप में स्मरण किया जाता है। स्रोत: भाटी वंशावली परंपरा; R. C. Majumdar, The Classical Age, Bharatiya Vidya Bhavan, 1954. 2. शक आक्रमण – शक (Scythians) मध्य एशिया से आए थे और उन्होंने भारत की उत्तर-पश्चिमी सीमाओं से प्रवेश किया। पहली-दूसरी शताब्दी में उनका प्रभाव पश्चिमी भारत (गुजरात, राजस्थान, सिंध) तक फैल गया। स्रोत: Romila Thapar, A History of India Vol. I, Penguin, 1990. 3. विजय और संवत की शुरुआत – परंपरागत मान्यता है कि शालिवाहन भाटी ने शक आक्रमणकारियों को हराया और विजय की स्मृति में एक नए संवत की शुरुआत की। यह संवत “शालिवाहन शक संवत” कहलाया। स्रोत: K. A. Nilakanta Sastri, A History of South India, Oxford University Press, 1966. 4. शक संवत = 78 ईस्वी – ऐतिहासिक और शिलालेख प्रमाणों के आधार पर शक संवत का प्रारंभ 78 ईस्वी से माना गया है। स्रोत: D. C. Sircar, Indian Epigraphy, Motilal Banarsidass, 1965. 5. शालिवाहन भाटी बनाम कनिष्क विवाद – कुछ इतिहासकार इस संवत का श्रेय कुषाण सम्राट कनिष्क को भी देते हैं, परन्तु लोक परंपरा, भाटी वंशावली और दक्षिण भारतीय ग्रंथ इसे शालिवाहन भाटी की विजय से जोड़ते हैं। क्योंकि कनिष्क ने 127 से शासन शुरू किया था और कुरेशियन हिंदू के विरोधी थे स्रोत: R. C. Majumdar, Ancient India, Motilal Banarsidass, 1977. 6. भारत का राष्ट्रीय पंचांग – 1957 में भारत सरकार ने शक संवत को राष्ट्रीय पंचांग के रूप में अपनाया। इसका आरंभ 22 मार्च 78 ईस्वी से माना गया। स्रोत: Government of India, Report of the Calendar Reform Committee, CSIR, 1955. निष्कर्ष शालिवाहन भाटी शक संवत (78 ईस्वी) भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। भाटी वंश परंपरा इसे शालिवाहन भाटी की शक विजय से जोड़ती है और आधुनिक भारत ने इसे राष्ट्रीय कैलेंडर के रूप में मान्यता दी है।
राजा शालिवाहन भाटी ने गजनी से लेकर दक्षिण भारत के सभी राज्यों पर प्राप्त कि थी और जिसके उपलक्ष में भटनेर किले की नीव रखी और शकों को पराजीत करके भारत से बहार किया था उसी उपलाब्धि के लिए सम्राट शालिवाहन या सातवाहन राजा ने ये शक संवत की शुरुआत की थी सम्राट शालिवाहन भाटी पुत्र गज सिंह को शालिवाहन शक के शुभारम्भ का श्रेय दिया जाता हैं, जब उसने वर्ष ७८ ई. (78 ई.) में शकों को युद्ध मे हराया था और इस युद्ध की स्मृति मे उसने इस युग को आरम्भ किया था[2]
इसके बाद शकों ने उस पश्चिमी क्षत्रप राज्य की स्थापना की जिसने पश्चिमी भारत क्षेत्र पर शासन किया।[3]

सन् 1633 तक इसे जावा की अदालतों द्वारा भी यह सवंत प्रयुक्त किया जाता था, पर उसके बाद इसकी जगह अन्नो जावानिको ने ले ली जो जावानीस और इस्लामी व्यवस्था का मिला जुला रूप था।[4]
प्रवर्तन एवं अन्य इतिहास
[संपादित करें]शककाल का आरम्भ युधिष्ठिर के मृत्युकाल वर्ष बाद शुरु हुआ । युधिष्ठिर का देहान्त ३१०२ ईपू में , श्रीकृष्ण के स्वर्गारोहण के एकदम बाद हुआ था । इस प्रकार इस की तिथि 78 ई. भी निश्चित होती है।राजा कनिष्क और विक्रमादित्य दोनों में से किसी ने भी शक संवत की शुरुआत नहीं की थी
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Kanishka#:~:text=Kanishka%20I%2C%20also%20known%20as,%2C%20political%2C%20and%20spiritual%20achievements.
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]- कुछ अन्य संवत
- प्राचीन सप्तर्षि 6676 ईपू
- कलियुग संवत 3102 ईपू
- सप्तर्षि संवत 3076 ईपू
- विक्रमी संवत 57 ईपू
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Rai, Bhai Gulshan Rai (1942). [https://papers.ssrn.com/sol3/papers.cfm?abstract_id=5434574
https://books.google.com/books/about/Early_History_of_India.html?hl=hi&id=MIAdAAAAMAAJ Early History of India]. S. Chand & Company. pp. 71–72.
{{cite book}}: Check|url=value (help); line feed character in|url=at position 60 (help) - ↑ J. Vasundhara Devi, V. Lakshmikantham, S. Leela (2005). Origin and History of Mathematics. Cambridge Scientific Publishers. p. 37.
We have seen that Saka Kala or Sakanripa Kala is the Cyrus Era which started in 550 B.C. ( 2552 Kali Era ) and was in vogue in Northern India .
{{cite book}}: CS1 maint: multiple names: authors list (link) - ↑ "The dynastic art of the Kushans", John Rosenfield, p130
- ↑ M.C. Ricklefs, A History of Modern Indonesia Since c. 1300, 2nd ed. Stanford: Stanford University Press, 1993, pages 5 and 46.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]भारत का राष्ट्रीय संवत: शक संवत (हिन्दी स्पीकिंग ट्री)