शालिवाहन

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शालिवाहन भारत के एक अनुश्रुत राजा थे। राजा शालिवाहन के पिता जी को उनके ही सामंतों ने धोका दिया जिस कारण उनका राजपाठ समाप्त हो गया । और उनकी जान पर बन आई उन्होंने जंगल में एक कुम्हार के घर शरण पाकर अपनी जान बचाई। राजा शालीवाहन का पालन पोषण बचपन में कुम्हार के घर ही हुआ था पर वे कुम्हार नहीं थे ।उन्हें देवताओं द्वारा वरदान था कि वे किसी भी मूर्ति को जीवित कर सकते थे ।जब युवा अवस्था। में उन्हें अपने राजपाठ का बोध हुआ तो उन्होंने उसे पुनः प्राप्त करने में लग गए ।उन्होंने मिट्टी के सैनिक , हांथी, घोड़े , तीरंदाज, आदि की विशाल सेना बनाई और उसे छिपा दिया । इन्द्र देव ने उनकी सेना को नस्ट करने का प्रयास किया। परन्तु उन्हें पूर्ण सफलता नहीं मिली । जब युद्ध का समय आया तो राजा शालीवाहन ने मिट्टी की सेना पर पानी के छीटें डालकर उसे जिंदा कर लिया । अब सेना इतनी विशाल थी कि कोई भी उसे परास्त नहीं कर सका और राजा शालीवाहन का साम्राज्य हिन्दू राजा के रूप में विस्तार हो गया राजा शालीवाहन कुम्हार के घर पले मात्र थे पर वे कुम्हार नहीं थे ।उनका वंश वर्दिया के नाम से वर्तमान में जाना जाता है वर्दिया विशुद्ध रूप कुम्हार है क्योंकी उनका पालन पोषण कुम्हार से हुआ । परन्तु वास्तविक रूप से वे क्षत्रिय है पर उनके द्वारा क्षत्रिय शब्द का उपयोग कम या ना के बराबर होता है वर्दिया कुम्हार का कुमावत जाति से कोई संबंध नहीं है एवम् वर्दिया कुम्हार जाति में समलित अवश्य है परन्तु वे विशुद्ध कुम्हार है राजा शालीवाहन को वरदान प्राप्त होने के कारण उनकी संतान वर्तमान में वर्दिया कहलाती है राजा शालीवाहन के नाम से सक संवत् कि शुरुवात हुए थी ।राजा शालीवाहन के वंश अन्य नामों से भी जाने जाते हैं

इन्हें भी देखें[संपादित करें]