शल्यतन्त्र

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

शल्यतन्त्र, आयुर्वेद के आठ अंगों में से एक अंग है। सुश्रुत को शल्यक्रिया का जनक माना जाता है। वाग्भट द्वारा रचित अष्टाङ्गहृदयम् का २९वाँ अध्याय 'शस्त्रकर्म विधि' है।

महर्षि सुश्रुत प्रथम व्यक्ति है जिन्होंने शल्यतंत्र के वैचारिक आधारभूत सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया, जिसके आधार पर प्राचीन भारतवर्ष में शल्य कर्म किये जाते रहे। शल्य तंत्र के प्राचीनतम ग्रंथ सुश्रुतसंहिता में शल्यतन्त्र के अतिरिक्त अन्य विषय भी सम्मिलित हैं (कान, गले, और सिर के रोग, प्रसूतितन्त्र और चिकित्साविज्ञान विषयक आचार संहिता आदि )। महर्षि सुश्रुत ने सबसे पहले शवच्छेदन विधि का वर्णन किया था। महर्षि द्वारा प्रतिपादन 'नासासंधान विधि' वर्तमान में विकसित प्लास्टिक सर्जरी का मूल आधार बनी है, इसे सभी लोग निर्विवाद रूप ले स्वीकार करते हैं। आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी विषयक ग्रंथों में सुश्रुत की नासासंधान विधि का उल्लेख ‘इंडियन मेथड ऑफ राइनोप्लास्टी’ के रूप किया जाता है।

शल्यचिकित्सक के गुण[संपादित करें]

शस्त्रवैद्य गुण -
शौर्यमाशुक्रिया तीक्ष्णं शस्त्रमस्वेदवेपथू।
असम्मोहश्च वैद्यस्य शस्त्रकर्मणि शस्यते॥

शस्त्रवैद्य के लिए आवश्यक गुण ये हैं- शौर्य (साहस), आशुक्रिया (तीव्र गति से कार्य करना), तीक्ष्णशस्त्र (तेज धार वाले शस्त्रों से युक्त), अस्वेद (जो पसीना से रहित हो), वेपथू (जिसके हाथ काँपने न हों), असम्मोह (जो दर्द आदि देखकर सम्मोहित या विचलित न होता हो)।

क्षारसूत्र[संपादित करें]

क्षारसूत्र, आयुर्वेदिक शल्यचिकित्सा है जिसके द्वारा भगन्दर और बवासीर की चिकित्सा की जाती है। सूत्र का अर्थ है 'धागा'। एक घागे पर अनेक रसायनों (क्षार) का लेप करने के बाद उसकी सहायता से भगन्दर को काटकर हटाया जाता है। इस विधि में औषधीय तत्वों से भावित सूत्र के बांधने एवं पिरोने से अर्श कटकर गिर जाते है एवं भगन्दर के धाव बिना अतिरिक्त मर्हम पट्टी के स्वतः भर जाते है तथा दुबारा उसी स्थान पर पुनः उत्पन्न नही होते । इन रोगों मे यह विधि 99 प्रतिशत सफल शल्य चिकित्सा है। यह काफी सस्ती, प्रचलित एवं सफल पद्धति है।

यद्धपि उक्त विधि, शास्त्रों में सूत्र रूप से वर्णित थी किन्तु उसे विकसित कर व्यावहारिक स्वरूप में स्थापित करने का श्रेय बनारस हिन्दू विश्‍वविद्यालय को है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]