शमशेर बहादुर प्रथम

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शमशेर बहादुर प्रथम (उर्फ कृष्णा राव उर्फ कृष्णासिंह) (१७३४ - १७६१) उत्तरी भारत में कालपी और बांदा के एक मराठा शासक थे। वह पेशवा बाजीराव प्रथम और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी के पुत्र थे।[1]

जीवन[संपादित करें]

बुंदेलखंड के हिंदू राजा छत्रसाल और उनकी एक फारसी मुस्लिम पत्नी रुहानी बाई की बेटी मस्तानी से पेशवा बाजीराव प्रथम ने शादी की। पेशवा परिवार और पुणे के ब्राह्मणों ने इस शादी को स्वीकार नहीं किया। उनके पुत्र थे शमशेर बहादुर उर्फ कृष्णा राव जिनकी शिक्षा और हथियारोंका प्रशिक्षण बाजीराव के बाकी पुत्रों के साथ हुआ जो उनकी पहली पत्नी काशीबाई के थे। १७४० में बाजीराव और मस्तानी की मृत्यु के बाद काशीबाई ने ही शमशेर का संरक्षण किया।[1]

राजा छत्रसाल से प्राप्त कालपी और बांदा (जो स्वातंत्र्योत्तर भारत के उत्तर प्रदेश में हैं), की जागीर शमशेर बहादुर को प्रदान कर दी गयी थी। उस वक्त इस जागीर से सालाना ४० लाख रुपयों की अर्थप्राप्ति होती थी।[1]

वंशज[संपादित करें]

शमशेर बहादुर के वंशजों ने कालपी और बांदा की जागीर पर १८१६ तक राज्य किया और १८१७ में यहाँ ब्रिटिश राज ने कब्जा कर लिया। तब ब्रिटिशों ने इस राज्य के शासक की वार्षिक पेंशन ४ लाख रुपये कर दी थी।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. भवन सिंह राणा (२००५) (अंग्रेज़ी में). Rani of Jhansi [झाँसी की रानी]. डायमंड पॉकेट बुक्स. पृ॰ २२-२३. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-288-0875-3. https://books.google.com/books?id=0hKthqa2kkQC&pg=PA22.