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शब्बाथ

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Welcoming the Sabbath with the lighting of Shabbat candles according to Jewish custom.

सब्त का दिन (अंग्रेज़ी: Sabbath) यहूदी, ईसाई और अन्य अब्राहमिक धर्मों में विश्राम और पूजा का पवित्र दिन है। बाइबिल के अनुसार, ईश्वर ने छह दिन में संसार की रचना की और सातवें दिन विश्राम किया। उसी स्मृति में यह दिन पवित्र माना जाता है। दस आज्ञाओं में भी “सब्त दिवस को स्मरण करके उसे पवित्र रखना” का निर्देश दिया गया है।[1]

उत्पत्ति और इतिहास

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सब्त की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों के बीच मतभेद हैं। कुछ लोग इसे यहूदी परंपरा का मौलिक अंग मानते हैं, जबकि अन्य विद्वान इसे बैबिलोनियाई संस्कृति से प्रभावित मानते हैं। बैबिलोनियाई शब्द शपत्तु (šapattu) या शबत्तु (šabattu) का अर्थ होता है विश्राम अथवा शांतिपूर्ण दिन, जिससे सब्त की समानता देखी जाती है। समय के साथ यह दिन प्राचीन इज़राइलियों के धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन का आधार बन गया।[2]

यहूदी धर्म में सब्त

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यहूदी परंपरा में सब्त शुक्रवार सूर्यास्त से आरम्भ होकर शनिवार रात तीन तारों के दिखने तक चलता है। इस दिन को विश्राम, प्रार्थना और परिवार के साथ समय बिताने के लिए पवित्र माना जाता है। परंपरा अनुसार इस दिन विशेष भोजन किए जाते हैं और पूजा की शुरुआत मोमबत्तियाँ जलाने तथा वाइन और रोटी (चल्लाह) पर आशीर्वचन कहने से होती है। सब्त का समापन हवदाला नामक विशेष विधि से किया जाता है। यहूदी धार्मिक कानून के अनुसार इस दिन ३९ प्रकार के कार्य (मेलाखोत) निषिद्ध हैं, जैसे खेती, लेखन, निर्माण या आग जलाना।[3]

ईसाई धर्म में सब्त

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ईसाई धर्म में अधिकांश मत शनिवार की जगह रविवार को प्रभु का दिन मानते हैं, क्योंकि विश्वास के अनुसार यीशु मसीह इसी दिन मृतकों से जीवित हुए थे। रविवार को सामूहिक प्रार्थना और चर्च सभाएँ आयोजित होती हैं। फिर भी कुछ ईसाई संप्रदाय, जैसे सातवें-दिन एडवेंटिस्ट और सातवाँ-दिन बैप्टिस्ट, आज भी शनिवार को सब्त के रूप में मानते हैं। इस प्रकार ईसाई धर्म में सब्त की अवधारणा यहूदी परंपरा से प्रेरित होते हुए भी समय के साथ नया रूप ग्रहण कर चुकी है।[4]

धार्मिक और सामाजिक महत्व

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सब्त का महत्व केवल धार्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। यह दिन मानव जीवन में विश्राम, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए भी आवश्यक माना जाता है। परिवारिक सामंजस्य, आत्मावलोकन और आध्यात्मिकता को प्रोत्साहन देने में इसका विशेष योगदान है। आज भी कुछ यहूदी और ईसाई समुदाय सब्त के सभी नियमों का कठोरता से पालन करते हैं।[5]

आधुनिक प्रासंगिकता

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आधुनिक युग में तेजी और व्यस्तता के बीच सब्त की अवधारणा अत्यंत सार्थक मानी जाती है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर जीवन को संतुलित करने का एक माध्यम है। कई धर्मनिरपेक्ष समाज भी सप्ताहांत (वीकएंड) को विश्राम और परिवारिक समय के रूप में मानते हैं, जो सब्त की भावना का ही एक रूपांतर है।[6]

  1. "Sabbath". Encyclopaedia Britannica. अभिगमन तिथि: 2025-10-02.
  2. Jacob Milgrom (1991). "The Origins of the Sabbath". Journal of Biblical Literature. pp. 5–24. अभिगमन तिथि: 2025-10-02.
  3. Abraham P. Bloch (1965). The Sabbath: Its Meaning for Modern Man. Holt, Rinehart and Winston. ISBN 978-0030857776. {{cite book}}: Check |isbn= value: checksum (help)
  4. Edward J. Kilmartin (1961). "The Sabbath and the Lord's Day". Theological Studies. 22 (3): 370–384. डीओआई:10.1177/004056396102200303. अभिगमन तिथि: 2025-10-02.
  5. "Shabbat 101". My Jewish Learning. अभिगमन तिथि: 2025-10-02.
  6. Ruth Gledhill (2025-09-15). "The Sabbath: A Day of Rest in a Restless World". The Times. अभिगमन तिथि: 2025-10-02.