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व्यासतीर्थ

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श्री
व्यासतीर्थ
व्यक्तिगत जीवन
जन्मयतिराज
22 अप्रैल 1447
बन्नूर, कर्नाटक
समाधिनव बृन्दावन
धार्मिक जीवन
धर्महिन्दू धर्म
विद्यालयवेदान्त
धार्मिक पेशा
पूर्वाधिकारीब्रह्मण्य तीर्थ

व्यासतीर्थ ( 1460 - 1539 ई०) एक हिंदू दार्शनिक, टीकाकार और कवि थे। वे मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित द्वैत वेदान्त के समर्थक थे। उन्हें व्यासराय, व्यासराज, या चन्द्रिकाचार्य भी कहा जाता है। वे विजयनगर साम्राज्य के राजगुरु रहे। उनका काल द्वैतवाद का स्वर्णयुग था। उनके ही काल में कनक दास और पुरन्दर दास आदि के द्वारा हरिदास साहित्य का विकास हुआ। उन्होंने स्वयं कन्नड़ और संस्कृत में कई कीर्तनों की रचना की।[1]

सन्दर्भ

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  1. "Royal Carpet Carnatic Composers: Vyasaraya". karnatik.com. अभिगमन तिथि: 2024-03-04.