वैश्विक हिन्दी सम्मेलन

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वैश्विक हिन्दी सम्मेलन हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ाने तथा इनके प्रचार-प्रसार के लिए गठित एक पंजीकृत स्वयंसेवी संस्था है। इस मंच के माध्यम से प्रयास किया जाता है कि जनतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप भारत की जनता को सभी सूचनाएँ, सुविधाएं और सेवाएँ जनभाषा अर्थात राज्यों की राजभाषा तथा भारत की राजभाषा

वैश्विक हिन्दी सम्मेलन
वैश्विक हिंदी सम्मेलन 2014 - सभागार.jpg
वैश्विक हिंदी सम्मेलन - 2014, मुंबई

हिन्दी में प्राप्त हों। विश्व स्तर पर हिंदी शिक्षण की सुविधाएँ उपलब्ध हों। ई-गवर्नेंस और डिजिटल-इंडिया आदि में हिंदी व भारतीय भाषाओं का प्रयोग हो। ‘वैश्विक हिन्दी सम्मेलन’ का प्रयास है कि भारत में शिक्षा व रोजगार भारतीयों भाषाओं के माध्यम से उपलब्ध हो तथा हिन्दी एवं भारतीयों भाषाओं के लिए भाषा-टेक्नोलॉजी का भी विकास एवं प्रसार हों। स्कूलों में विद्यार्थियों को कंप्यूटर-मोबाइल व इस प्रकार के नवीनतम उपकरणों पर हिंदी व भारतीय भाषाओं में कार्य की शिक्षा दी जाए ताकि इंटरनेट व सोशल मीडिया पर हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को महत्वपूर्ण स्थान मिले तथा हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्य का विश्व स्तर पर प्रसार हो। हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान. व्यापार-व्यवसाय, तथा जनसूचना व जनसंचार का प्रसार हो ताकि विदेशी भाषा की बाधा से मुक्त हो कर देश के लोग अपनी भाषा के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में विकास की ऊंचाइयों को छू सकें।

हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के प्रसार का अभियान[संपादित करें]

 ‘वैश्विक हिन्दी सम्मेलन’ हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ाने तथा इनके प्रचार-प्रसार के  अभियान के लिए गठित एक पंजीकृत संस्था है, जिसका प्रयास है कि जनतांत्रिक मूल्यों और संविधान की भावना के अनुरूप भारतवासियों को (सरकारी/गैरसरकारी) सूचनाएँ, सुविधाएँ, सेवाएँ और अवसर जनभाषा में अर्थात भारत संघ की राजभाषा हिन्दी तथा राज्यों की राजभाषाओं में प्राप्त हों।

‘वैश्विक हिन्दी सम्मेलन’ का प्रयास है कि भारत की ई-गवर्नेंस और डिजिटल-इंडिया आदि महत्वाकांक्षी योजनाओं में हिंदी व भारतीय भाषाओं का प्रमुखता से समावेश हो। सभी वेबसाइट, ऑनलाइन सुविधाएँ, कंप्यूटर-प्रणालियाँ, आई.टी. सोल्युशन आदि में संघ व राज्य की राजभाषा को प्रमुखता से रखा जाए। देश में शिक्षा व रोजगार भारतीय भाषाओं के माध्यम से उपलब्ध हो तथा हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के लिए उपलब्ध भाषा-टेक्नोलॉजी का भी प्रसार हो। स्कूलों/कॉलेजों में विद्यार्थियों को कंप्यूटर-मोबाइल आदि नवीनतम उपकरणों पर हिंदी व भारतीय भाषाओं में कार्य का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए ताकि इंटरनेट व सोशल मीडिया पर हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को महत्वपूर्ण स्थान मिल सके और इनमें उपलब्ध ज्ञान-विज्ञान का विश्वभर में प्रसार हो ।

‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ का मानना है कि ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा-रोजगार, व्यापार-व्यवसाय तथा जनसूचना व जनसंचार आदि क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग से ही इनका प्रसार संभव है। विदेशी भाषा के बंधन से मुक्त हो कर ही देश के लोग अपनी भाषा के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में विकास की ऊँचाइयों को छू सकते हैं, इसी के द्वारा भारतीय संस्कृति की भी रक्षा हो सकती है। इसलिए ‘वैश्विक हिन्दी सम्मेलन’ देश-दुनिया में भारतीय भाषाओं के प्रसार से जुड़े लोगों व भारत-भाषा प्रेमियों को एकजुट करते हुए इस कार्य के लिए जागरूकता अभियान चलाने और जनमानस तैयार करने के लिए निरन्तर प्रयासरत है। देश-विदेश के सभी भारतीय-भाषा प्रेमी इस अभियान से जुड़ सकते हैं। इसके लिए कोई शुल्क आदि नहीं है।

वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ सोशल मीडिया समूह’[संपादित करें]

वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ सोशल मीडिया समूहों से 12500 से अधिक लोग जुड़े हैं। वैश्विक हिंदी सम्मेलन गूगल समूह’, हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के प्रयोग व प्रसार का संभवतः विश्व का सबसे बड़ा व सक्रिय ई-मेल समूह है, जिसमें देश-विदेश के करीब 8500 से सदस्य हैं। इनमें हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के अनेक वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, भाषा-सेवी, शिक्षाविद्, राजभाषाकर्मी, वैज्ञानिक, भाषा-प्रेमी, भाषा-प्रौद्योगिकीविद्, विद्यार्थी एवं विभिन्न क्षेत्रो के लोग जुड़े हैं। इसके फ़ेसबुक समूह पर भी ऐसे करीब 4000 लोग हैं। इसके अतिरिक्त गूगल+, ट्विटर तथा व्हाट्स-ऐप आदि पर भी संस्था द्वार भारतीय भाषाओं के प्रयोग व प्रसार का अभियान चलाया जाता है।

इस मंच के माध्यम से हिंदी व भारतीय भाषाओं के समर्थकों के बीच समन्वय और सहयोग बनाते हुए भारतीय भाषाओं से संबंधित सूचनाओं, प्रयासों, प्रौद्योगिकी आदि की जानकारी प्रदान करने व विचार-विनिमय करने और सदस्यों द्वारा हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के प्रयोग संबंधी सुझाव, विचार, शिकायतें माँग, सूचनाएँ आदि प्रस्तुत की जाती है। इस क्षेत्र में देश-विदेश में उल्लेखनीय योगदान करने वाले लोगों का परिचय व कार्य भी प्रस्तुत किया जाता है।

‘वैश्विक ई-संगोष्ठी[संपादित करें]

वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ गूगल समूह’ द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए हिंदी व भारतीय भाषाओं के प्रचार से संबंधित विषयों पर समय-समय पर वैश्विक ई-संगोष्ठियों का भी आयोजन किया जाता है जिनमें श्रोताओं के स्थान पर हजारों ई-प्रतिभागी अपने समय व सुविधानुसार वैश्विक ई-संगोष्ठी में भाग लेते हैं और शृंखला रूप में, कई कड़ियों में विद्वान-प्रतिभागी अपने विचार प्रस्तुत करते हैं।

देवनागरी लिपि व अन्य भारतीय लिपियों का प्रसार[संपादित करें]

सोशल मीडिया के माध्यम से देवनागरी लिपि व भारतीय लिपियों में कार्य करने का न केवल अनुरोध किया जाता है बल्कि ई-मेल के माध्यम से कंप्यूटर व मोबाइल आदि पर हिंदी में कार्य की जानकारी भी दी जाती है और कॉलेजों व सामुदायिक समूहों के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके चलते लाखों लोग जो कल तक भारतीय भाषाएँ कंप्यूटर मोबाइल आदि पर रोमन लिपि में लिखते थे अब देवनागरी व अपनी भाषाओं की लिपि में लिखने लगे हैं।

‘वैश्विक सम्मेलन, संगोष्ठियाँ व प्रशिक्षण कार्यक्रम।[संपादित करें]

‘मुंबई हिंदी सम्मेलन’ - अगस्त 2012[संपादित करें]

वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ संस्था के अस्तित्व में आने के पूर्व ही इसकी आधारशिला के रूप में अगस्त 2012 में मुंबई उपक्रम नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सहयोग से ‘मुंबई हिंदी सम्मेलन’ के माध्यम से वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ ने आकार लेना प्रारंभ कर दिया था। इस सम्मेलन में न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर धर्माधिकारी, सुप्रसिद्ध फिल्मकार राजकुमार बड़जात्या सहित शिक्षा–साहित्य, राजभाषा, सिनेमा, मीडिया, न्यायपालिका, आदि विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया था।

वैश्विक हिंदी सम्मेलन -10 सितंबर 2014’[संपादित करें]

संस्था द्वारा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से ‘हिंदुस्तानी प्रचार सभा’ के साथ 10 सितंबर 2014 को विलेपार्ले, मुंबई में वैश्विक हिंदी सम्मेलन: 2014’ आयोजित किया गया था जिसमें गोवा की माननीय राज्यपाल व साहित्यकार ‘श्रीमती मृदुला सिन्हा, मुख्य सूचना आयुक्त- श्रीमती लीना मेहेंदले तथा महाराष्ट्र के अपर पुलिस महानिदेशक श्री सूर्य प्रताप गुप्ता सहित देश-विदेश के 400 से भी अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस अवसर पर दक्षिण अफ्रीका हिंदी शिक्षा संघ की अध्यक्ष श्रीमती मालती रामबली को ‘वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान’, बालेंदू शर्मा दाधीच को ‘वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान’ प्रवीण जैन को ‘हिंदी सक्रिय सेवा सम्मान’ तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधाकर मिश्र को ‘आजीवन हिंदी साहित्य सेवा सम्मान’ प्रदान किया गया।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी 10 जनवरी 2015[संपादित करें]

‘विश्व हिंदी दिवस’ के अवसर पर  वैश्विक हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मॉरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार श्री राज हीरामन प्रमुख वक्ता थे उन्हें ‘वैश्विक हिंदी साहित्य सारथी’ सम्मान भी प्रदान किया गया। संगोष्ठी में डॉ रमाकांत गुप्ता, साहित्यकार डॉ.सुधाकर मिश्र तथा जवाहर कर्णावट सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 18 जनवरी 2015[संपादित करें]

वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ द्वारा ‘शाकुंतलम’ तथा ‘शिवानी साहित्य मंच के साथ मिलकर वैश्विक हिंदी संगोष्ठी व काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कनाडा के साहित्यकार प्रो.सरन घई को वैश्विक हिंदी साहित्य सम्मान से विभूषित किया गया। मुंबई उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति श्री राजन कोचर तथा सुप्रसिद्ध फिल्मकार राजकुमार बड़जात्या भी उपस्थित थे।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 19 सितंबर, 2015[संपादित करें]

मुंबई के सोमैया कॉलेज के साथ मिलकर आयोजित संगोष्ठी में नीदरलैंड की साहित्यकार प्रो.पुष्पिता अवस्थी को वैश्विक हिंदी साहित्य सम्मान से विभूषित किया गया। संगोष्ठी में लेखक माणिक मुंडे, एस.एन.डी.टी. विश्वविद्यालय की पूर्व निदेशक प्रो. माधुरी छेड़ा, सूरीनाम से भगवान जी, सौमैया कॉलेज की प्राचार्या तथा उपप्राचार्य डॉ. सतीश पांडेय, डॉ.एम.एल.गुप्ता तथा डॉ.कामिनी गुप्ता ने विचार प्रस्तुत किए।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 20 सितंबर, 2016[संपादित करें]

‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ द्वारा मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन के साथ चर्चगेट स्टेशन परिसर मुंबई में ‘देश-विदेश में हिंदी’ विषय पर वैश्विक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलु विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और हिंदी शिक्षा संघ की अध्यक्ष प्रो. उषा शुक्ला मुख्य अतिथि थीं। उन्हें ‘वैश्विक हिंदी साहित्य सम्मान’ से विभूषित किया गया। कार्यक्रम में राकेश पांडेय, माणिक मुंडे, विजय जैन, अमरजीत मिश्रा आदि ने विचार रखे।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 09 जनवरी, 2016[संपादित करें]

मुम्बई  में ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’, के. सी. महाविद्यालय और ‘सत्याग्रह’ संस्था द्वारा 'प्रवासी भारतीय और हिंदी’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में ब्रिटेन के रचनाकार तजेंद्र शर्मा, माणिक मुंडे, प्रो.माधुरी छेड़ा, श्रीमती देवी नागरानी, डॉ.शीतलाप्रसाद दुबे, लेखिका श्रीमती शील निगम आदि ने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर ‘लेखनी’ की संपादक’ श्रीमती शैल अग्रवाल को ‘वैश्विक हिंदी साहित्य सम्मान’ से विभूषित किया गया।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 05 अक्तूबर 2017[संपादित करें]

बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ ‘हिन्‍दी का वैश्विक परिदृश्‍य’ विषय पर आयोजित’ संगोष्ठी में  दक्षिण अफ्रीका ‘हिंदी शिक्षा संघ’ की अध्यक्ष प्रोफ़ेसर उषा शुक्ला, मॉरीशस     के साहित्यकार राज हीरामन, प्रवासी संसार के संपादक राकेश पांडेय. गगनांचल के संपादक हरीश नवल, बैंक ऑफ बड़ौदा के राजभाषा प्रमुख जवाहर कर्णावट, तथा डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’  आदि ने विचार रखे।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 30 जून 2018[संपादित करें]

'वैश्विक हिंदी सम्मेलन' तथा मुंबई रेल विकास कॉरपोरेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि मॉरीशस के सुप्रसिद्ध साहित्यकार रामदेव धुरंधर को 'वैश्विक हिंदी साहित्य सम्मान' से विभूषित किया गया। संगोष्ठी में मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी-विभागाध्यक्ष प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय, एम.आर.वी.सी. की वित्तीय सलाहकार श्रीमती स्मृति वर्मा, जी.एसटी. अपर आयुक्त श्रीमती मनप्रीत आर्य, महामना फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, सहित अनेक विद्वानों ने विचार रखे।

भाषा-प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम, 30 जून 2018[संपादित करें]

'वैश्विक हिंदी सम्मेलन' तथा एम.एम.पी.शाह कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में कॉलेज के विद्यार्थियों को मोबाइल-कंप्यूटर आदि उपकरणों पर देवनागरी लिपि सहित विभिन्न भारतीय लिपियों में कार्य का प्रशिक्षण दिया गया।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 23 जून 2019[संपादित करें]

वैश्विक हिंदी सम्मेलन तथा श्रीमती एम.एम.पी शाह विमेंस कॉलेज ऑफ कॉमर्स एण्ड आर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में मातृभाषा दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक डॉ. जवाहर कर्णावट को वैश्विक हिंदी सम्मेलन द्वारा ‘डॉ कामिनी स्मृति वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान’ से विभूषित किया गया। मातृभाषा: जन-अधिकार एवं जन-विकास विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व सूचना आयुक्त श्री शैलेश गांधी थे ।

वैश्विक हिंदी संगोष्ठी, 11 जनवरी 2020[संपादित करें]

वैश्विक हिंदी सम्मेलन, द्वारा महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी तथा के.सी. कॉलेज मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में के.सी. कॉलेज मुंबई के सभागार में 'हिंदी एवं भारतीय भाषाओं का समन्वय' विषय पर वैश्विक हिंदी संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल थे।मुख्य अतिथि महाराष्ट्र शासन से राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त श्री अमरजीत मिश्र तथा विशिश्ट अतिथि व सम्मान मूर्ति के रूप में श्री कृष्ण कुमार ( भा.पु.से.) तथा तथा वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिक डॉ. विजय भार्गव थे। इन्हें वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान से विभूषित किया गया। अध्यक्षता- डॉ शीतला प्रसाद दुबे, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने की कार्यक्रम का संचालन वैश्विक हिंदी सम्मेलन के निदेशक डॉ. एम.एल. गुप्ता आदित्य ने किया तथा आभार प्रदर्शन संस्था की संयोजक डॉ. सुस्मिता भट्टाचार्य ने किया।

== हिंदी के प्रयोग व प्रसार में विशेष योगदान देने वालों के लिए परिचय शृंखला डॉ सुखपाल सिंह उपन्यास लेखक कहानीकार कवि निबंधकार

हिन्दी के विश्वदूत श्रृंखला[संपादित करें]

इस श्रृंखला में विदेशों में रहकर भाषा-शिक्षण, साहित्य या अन्य किसी  प्रकार हिंदी के प्रचार-प्रसार में लगे महानुभावों व उनके कार्य का परिचय दिया जाता है जो संस्था के सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचता है। इस श्रृंखला के अंतर्गत अब तक निम्नलिखित का परिचय दिया गया है:-

  • प्रो. उषा शुक्ला (दक्षिण अफ्रीका)
  • डॉ.कविता वाचक्नवी (ब्रिटेन)
  • नीलू गुप्ता (अमेरिका)
  • डॉ. इन्दू प्रकाश पांडेय (जर्मनी)
  • प्रो. पुष्पिता अवस्थी (नीदरलैंड)
  • प्रो. शिवकुमार सिंह (पुर्तगाल)
  • इन्द्रदेव भोला इन्द्रनाथ (मॉरीशस)
  • सुश्री स्नेह ठाकुर (कनाडा)
भारत-भाषा प्रहरी श्रृंखला :

इस शृंखला में हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषा या भाषाओं के प्रयोग व प्रसार के लिए एक सेनानी की भांति कार्य में लगे महानुभावों व उनके कार्य का परिचय दिया जाता है जो संस्था के सोशल मीडिया समूहों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुँचता है। इस शृंखला का उद्देश्य भारतीय भाषाओं के लिए कार्य कर रहे महानुभावों को प्रोत्साहित करना है। इसके अंतर्गत अब तक निम्नलिखित का परिचय दिया गया है:-

  • डॉ. वेदप्रताप वैदिक.
  • श्यामरुद्र पाठक
  • डॉ. परमानन्द पांचाल
  • डॉ. कमल किशोर गोयनका
  • प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी
  • अतुल कोठारी
  • डॉ. महेशचंद्र गुप्त
  • बालेन्दू शर्मा दाधीच
  • डॉ विजय कुमार मल्होत्रा
  • प्रो. जोगा सिंह विर्क
  • प्रवीण जैन

पथ के साथी[संपादित करें]

मनोज धनीलाल (अध्यक्ष,हिंदी शिक्षा संघ दक्षिण अफ्रीका),बालेन्दु शर्मा दाधीच(निदेशक: लोकलाइजेशन,माइक्रोसॉफ्ट),राकेश पांडेय(संपादक,प्रवासी संसार,दिल्ली),डॉ.अमरनाथ शर्मा(हिंदी बचाओ मंच, कोलकाता),निर्मलकुमार पाटोदी(जनभाषा परिषद इन्दौर), प्रभु जोशी(लेखक इन्दौर),डॉ.आशीष कंधवे(विश्व हिंदी साहित्य परिषद),जवाहर कर्णावट(महाप्रबंधक,बैंक ऑफ बड़ौदा)[[1]],सुश्री विजयलक्ष्मी जैन(इन्दौर ),प्रो.जोगा सिंह विर्क(पटियाला),डॉ.विजय भार्गव (भारतीय भाषा राष्ट्रीय प्रतिष्ठान परिषद),बिजय क्मार जैन (भारतीय भाषाएँ अपनाओ,मुंबई),पोलिशेट्टी ओबैया (हैदराबाद),रवि रतलामी (भोपाल),प्रेमचंद अग्रवाल (हिन्दी प्रचार प्रसार समिति,अंबाला),के.एस वेंकटाचलम (कालीकट)प्रवीण जैन(मुंबई),डॉ.आर.वी.सिंह (उ.म.प्र.सिडबी,लखनऊ),अजय जैन'विकल्प' (हिंदीभाषा.कॉम,इन्दौर),जयराज(चेन्नै),योगेन्द्र प्रसाद जोशी (हिंदी ब्लॉग),मनोरमा मिश्र(मुंबई),अजय बोकिल(इन्दौर)

पदाधिकारी, मार्गदर्शक, सलाहकार व समन्वयक[संपादित करें]

मार्गदर्शक मंडल  :[संपादित करें]

  • डॉ.वेदप्रताप वैदिक (वरिष्ठ पत्रकार)
  • राहुल देव (वरिष्ठ पत्रकार)अशोक चक्रधर (वरिष्ठ साहित्यकार  )
  • अतुल कोठारी (राष्ट्रीय सचिव,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास)
  • श्रीमती लीना मेहंदले (पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त, गोवा)

सलाहकार मंडल  :[संपादित करें]

  • कृष्णकुमार गोस्वामी (निदेशक, विश्व नागरी विज्ञान संस्थान)
  • श्रीमती माधुरी छेड़ा (पूर्व निदेशक,एस.एन.डी.टी.विद्यापीठ, मुंबई)
  • महेशचंद्र गुप्त (सदस्य,के.स.हिं.प.परमार्शदात्री समिति )
  • डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ( अध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी)


कार्य-समिति  [संपादित करें]

निदेशक          : डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’

अध्यक्ष          : राजेश्वर सिंह

सचिव           : उत्कर्ष अग्रवाल

कोषाध्यक्ष      : सुश्री मंजरी गुप्ता

संयोजक        : डॉ. सुस्मिता भट्टाचार्य

सदस्य    : श्रीमती उषा बंसल, संजय सिंह, श्रीमती विधि जैन, कृष्ण मोहन मिश्र, धीरेंद्र सिंह, मधुकांत (अनूप बंसल), निर्मल कुमार पाटौदी

वैश्विक समन्वयक  : प्रो.उषा शुक्ला (हिंदी शिक्षा संघ, दक्षिण अफ्रीका), पुष्पिता अवस्थी (वैश्विक हिंदी प्रतिष्ठान,नीदरलैंड), रामदेव धुरंधर (वरिष्ठ साहित्यकार, मॉरीशस), डॉ. स्नेह ठाकुर (संपादक: वसुधा,कनैडा), राज हीरामन (वरिष्ठ साहित्यकार, मॉरीशस), रोहित कुमार हैप्पी (संपादक: भारत दर्शन,(न्यूजीलैंड)

समन्वयक :[संपादित करें]

प्रो.मंगला रानी (पटना) प्रो. अमरनाथ कोलकात श्रीमती शील निगम (मुंबई) आफताब आलम (मुंबई) संपत देवी मुरारका (हैदराबाद) अखिलेश श्रीवास्तव (लखनऊ) अरुण शर्मा (होशंगाबाद) विनोद रिंगानिया (गोहाटी) प्रभु देसाई (गोवा) राहुल खटे (नाशिक).

डॉ. कामिनी स्मृति वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान[संपादित करें]

‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ की स्थापना में डॉ. श्रीमती कामिनी गुप्ता की महत्वपूर्ण भूमिका थी। पर्दे के पीछे रह कर उन्होंने ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण और सार्थक भूमिका निभाई। डॉ. कामिनी गुप्ता,14 मार्च 2018 को कैंसर के असाध्य रोग से लड़ते-लड़ते मृत्यु के आगोश में समा गईं। वे भारत सरकार, गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के अंतर्गत हिंदी शिक्षण योजना, मुंबई में 29 वर्ष तक निरन्तर प्राध्यापक के रूप में कार्य करती रहीं। अपनी प्रभावी शिक्षण पद्धति के चलते केंद्रीय कार्यालयों के प्रशिक्षार्थी अधिकारी/कर्मचारी में वे काफी लोकप्रिय थीं। वे एक अच्छी लेखिका, कवयित्री और प्रभावी वक्ता थीं। ‘राजभाषा संदर्शिका’ की वे सह-लेखिका थीं। देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों व पत्रिकाओं में उनके अनेक लेख प्रकाशित हुए थे। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के अनेक कार्यक्रमों मे भी भाग लेती रही थीं। चार्ल्स डिकेन्स की बाल-कहानियों का अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद उनके प्रमुख कार्यों में से एक है।उन्होंने हिंदी में एम.ए. और पीएच.डी. के अतिरिक्त बी.लिब, बी.एड, अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा और गुजराती में डिप्लोमा भी किया। दूसरी ओर वे एक बहुत ही कुशल गृहणी भी थीं। पांच वर्ष पूर्व कैंसर की पुष्टि होने के बावजूद वे घरेलू कार्यों के अतिरिक्त सामाजिक कार्यों में भी योगदान देती रहीं और ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ की व्यवस्था-प्रभारी के दायित्वों का निर्वाह भी करती रहीं। आखिरी समय जब डॉक्टरों ने हार मान ली, डॉ. कामिनी गुप्ता ने अपनी बीमारी से हार नहीं मानी। ऐसी विदूषी कर्मठ, कर्तव्यपरायण और संघर्षशील महिला दिवंगत डॉ. कामिनी गुप्ता को ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ ह्दय से नमन करता है।

अत: उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ द्वारा निर्णय लिया गया है कि हिंदी व भारतीय भाषाओं के प्रसार के लिए दिए जाने वाले सम्मानों के अंतर्गत  अब ‘डॉ. कामिनी स्मृति वैश्विक हिंदी सेवा सम्मान’ प्रदान किए जाएँगे।