वेल्लनाडू

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वेल्लनाडू

वेंकटेश्वर प्रेस, बम्बई से प्रकाशित 'जाति-भास्कर' ग्रन्थ के अनुसार " उत्कल के दक्षिण, द्राविड के उत्तर, कर्णाटक के पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र के पश्चिम, अर्थात श्रीशैल से चोला स्थान के मध्य, तैलंग-प्रदेश है!"[कृपया उद्धरण जोड़ें] नाथद्वारा के प्रसिद्ध विद्वान और विद्याविभाग प्रमुख पोतकूर्ची पं. कंठमणि शास्त्री के शब्दों में- " तैलंग प्रदेश में तैलंग ब्राह्मणों के अनेक भेद हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें] जो ब्राह्मण परदेश से आ कर बसे थे, वे 'वेल्लनाटी' अथवा 'वेलनाडि' नाम से प्रसिद्द हुए.... व्रेल=बाहरी भाग, नाडू=देश." बाद में यही 'वेल्लनाटी' वेल्लनाडू कहलाए।[कृपया उद्धरण जोड़ें]