वेताल

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भूमिका[संपादित करें]

आप लोगों मे शायद ही ऐसा कोई हो जिसने वेताल , जादूगर मैनड्रेक, फ़्लैश गार्डन के कामिक्स न पढ़े हों या उनके बारे में न सुना हो वेताल नाम के नकाबपोश कामिक पात्र का रचयिता ली फ़ाक है जिसने विश्व प्रसिद्ध जादूगर मैंड्रेक कामिक पात्र की रचना की है। मैंड्रेक ली फ़ाक द्वारा रचित कामिक पात्र है जून १९३४ में समाचार पत्रों के सिंडीकेट ने इसे प्रकाशित किया था पहले ली फ़ाक इसके लेखक व चित्रकार दोनों थे.बाद में और रचनाकार इससे जुड़ते गए .

रचयिता[संपादित करें]

वेताल नाम के नकाबपोश कामिक पात्र का रचयिता ली फ़ाक है जिसने विश्व प्रसिद्ध जादूगर मैनड्रैक नामक कामिक पात्र की रचना की है

वेताल[संपादित करें]

वेताल अफ़्रीका के काल्पनिक बेन्गाला नामक स्थान पर खोपड़ीनुमा गुफ़ा मे रहकर अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करता है। उसकी खोपड़ी वाली अँगूठी निशान अपराधियों में भय उत्पन्न कर देता है। अपराधियों से लड़ने वालो की श्रंखला में२१ पीढी वाले वेताल की कहानी १५३६ से आरम्भ होती है ब्रिटिश नाविक क्रिस्टॊफ़र वाकर के पिता समुद्री डाकुओं के हमले में मारे जाते हैं। क्रिस्टोफ़र वाकर अपने पिता के हत्यारे की खोपड़ी पर बुराई से लड़ने की शपथ लेता है। एक के बाद एक २१ पीढियों तक नकाब धारण करने के कारण लोग है उसे चलता फ़िरता भूत मानने लगते हैं

वेताल के पास कोई अलौकिक शक्ति नहीं फ़िर भी वह अपनी शक्ति बुद्धि-कौशल और इस ख्याति से कि वह चलता फ़िरता प्रेत है, से प्रतिद्वन्दी को हराने में सफ़ल रहता है

इक्कीसवें वेताल की मुलाकात अपने अध्ययन के दौरान अमेरिका में डायना पामर से हुई और फ़िर विवाह डायना पामर से हुआ उनकी दो सन्तानें किट व हेलोइस हुईं। वेताल अपनी खोपडीनुमा गुफा में अपने प्रशिक्षित डेविल हिंदी में शेरा नाम के भेडिये व हीरो नाम के घोडे के साथ रहता है.

वेताल के भेड़िये डेविल हिंदी में शेरा की एक मुख्य भूमिका थी.

वेताल प्रदेश की जातियाँ और कबीले[संपादित करें]

डेंकाली के हजार मील तक फ़ैले विशाल जंगल में अनेक इन्सानी जातियाँ निवास करती हैं. प्रथम वेताल की प्राण-रक्षा करनेवाले और फ़िर उसकी मदद से वसाका हमलावरों को खदेड़ने में सफ़ल होने वाले बांडार बौनों के अलावा और कोई इस बात से परिचित नहीं है कि वेताल भी असल में एक आम इन्सान है और वह एक पारिवारिक परम्परा के तहत दुनिया भर में बुराई के खिलाफ़ संघर्ष करता है. बाकी जातियों का केवल यही विश्वास है कि वेताल अमर है.

बांडार बौने[संपादित करें]

बौने बांडार घने जंगल के बीचों-बीच बीहड़ वन में निवास करते हैं और वेताल के सबसे घनिष्ठ सहयोगी हैं. वेताल के रहस्य को जानने वाले ये अकेले हैं और बीहड़ वन की रक्षा करना इनकी जिम्मेदारी है. ये लोग अपने जहर बुझे तीरों के कारण अन्य सभी जातियों के लिये भी भय का कारण हैं. इनके होते कोई बाहरी व्यक्ति बीहड़ वन तक पहुचने की सोच भी नहीं सकता. इनका मुखिया गुर्रन है जो वर्तमान वेताल का बचपन का मित्र है.

वाम्बेसी[संपादित करें]

ये लोग मुख्यतः खेती-किसानी पर निर्भर करते हैं और वेताल को अपना मित्र मानते हैं. वाम्बेसी जंगल की सबसे धनी जाति है.

३. लोंगो[संपादित करें]

वाम्बेसियों से इनकी नहीं बनती पर 'वेताल शांति संधि' के अनुसार ही चलते हैं. इनके जीवन-यापन का मुख्य स्त्रोत पशु-पालन है. पूरे जंगल में लोगों जाति सर्वाधिक भाग्यशाली मानी जाती है.

४. मोरी[संपादित करें]

मोरी मछुआरों की बस्ती समुद्र तट पर बसी हुई है. ये समुद्र से मछलीयाँ पकड़ते हैं. वेताल के मित्र द्वीप पर पलने वाले शेरों और बाघों के लिये मछलियां पहुंचाने की जिम्मेदारी इनकी ही है.

=५. ऊँगान[संपादित करें]

फ़ुसफ़ुसाते वनों के पास के जंगल में निवास करने वाले ये लोग उंचे दर्जे के कलाकार हैं. ऊँगान लोग लकड़ी से कमाल की कलाकृतियाँ गढ़ने में माहिर हैं. खेलों में भी ये लोग आगे रहते हैं. जंगल ओलम्पिक का चैम्पियन अक्सर इसी कबीले से होता है.


वहीं कुछ हिंसक और लड़ाकू जातियाँ भी हैं जो गाहे-बगाहे अन्य जातियों के लिये परेशानी का सबब बनती रही हैं.

१. तिरांगी[संपादित करें]

सबसे खतरनाक जातियों में पहला नाम आता है तिरांगी का. पहाड़ी ढलानों पर रहने वाले ये लोग वेताल शांति में विश्वास नहीं करते थे. खून-ख़राबा और हिंसा ही इनकी पहचान होती थी. सिरों के शिकारी के तौर पर कुख्यात तिरांगी नरभक्षी भी थे लेकिन वेताल ने ये सब बंद कराया.

२. मसाऊ[संपादित करें]

घने जंगल के बीचों-बीच निवास करने वाले मसाऊ लोग बेहद खतरनाक और कुटिल हैं. ये अक्सर अन्य जातियों को मूर्ख बनाकर उनसे सामान आदि लूटते रहते हैं. बिना किसी हिचकिचाहट के किसी की भी जान ले लेना इनके लिये बेहद आसान काम है. बाकी जंगलवाले इनसे घबराते हैं और दूरी बनाये रखते हैं

प्रकाशन[संपादित करें]

यह श्रृंखला 17 फ़रवरी 1936, 28 मई 1939 को एक रंग की रविवारीय पट्टी के रूप मेँ प्रकशित कि गई और बाद मेँ एक दैनिक अखबार पट्टी के रूप मेँ प्रकाशित होना आरम्भ हुआ; दोनों अभी भी उसी रूप मेँ चल रहे हैं। अपनी लोकप्रियता के चरम शिखर पर,इस पट्टी को प्रत्येक दिन 100 मिलियन से अधिक लोगों के द्वारा पढ़ा गया था।

यह श्र्ंखला १७ फ़रवरी १९३६ व २८ मई१९३९ को एक दैनिक समाचार पत्र मे एक स्ट्रिप या पट्टी के रूप में प्रकाशित होना प्रारम्भ हुई थी तब से आज तक २०१३ तक दोनो प्रकाशित हो रहीं हैं ली फाक ने अपनी मौत तक (ईस्वी१९९९तक)। अब इसे लेखक टोनी डे पाल व चित्रकार द्वयपाल रेयान तथा टेरी बेट्टी द्वारा जारी रखा गया है।

वेताल का जीवन[संपादित करें]

अफ़्रीका के काल्पनिक देश देंकाली (अंग्रेजी -बेन्गाला) में मिथक प्रचलित है कि एक ऐसा प्रेत रहता है जो सभी तरह के अन्यायों के खिलाफ़ लड़्ता है। उसे पीढ़ी दर पीढ़ी देखते रहने के कारण वहाँ प्रचलित है कि वह अमर है जबकि वास्तविकता यह है कि पिछ्ली २० पीढ़ियों से वे एक व्यक्ति के रूप में अन्याय के खिलाफ़ लड़ाई लड़ रहे हैं । जब नया वेताल अपने मरने वाले पिता से कार्य ग्रहण करता है तो वह शपथ लेता है कि मै शपथ लेता हूँ कि मै अपना जीवन तस्करी, लालच, क्रूरता और अन्याय को - वे चाहे किसी भी रूप मे क्यों न हों- मिटाने में लगा दूँगा और मेरे बेटे और उनके बेटे इसका निरन्तर पालन करेंगे ।

फ़ाल्क ने शुरू में वेताल का घर भारत में ही सोचा थाऔर उसी प्रकार से कथाओं की रचना की थी प्रारम्भ में वेताल की सभी कहानियां भारत के शहरों 'मद्रास,बॉम्बे,कलकत्ता' आदि में ही घटित हुई थी,पर इंद्रजाल कॉमिक्स ने अतिरिक्त सतर्कता दिखाते हुए किसी भी विवाद को टालने के इरादे से उनमें बदलाव किये जिससे किसी भी कथा में भारत से जुडाव दिखाई न दे ,जैसे की 'बंगाला या बेन्गाला को 'देंकाली' कर दिया,'The Belt' कथा में समुंद्री लुटेरे 'रामा' को 'रामालु' कर दिया गया था,यहाँ तक की इस कथा में 'India' को बदल के 'Xenia' कर दिया गया.



पहले वेताल का विवाह स्केन्डेनेवियन समुद्री कप्तान एरिक रोवर की बेटी क्रिस्टीना से हुआ (कुछ्परवर्ती लेखक भ्रमित होकर उसे दूसरे वेताल की पत्नि मार्बेला से विवाहित प्रदर्शित करतें हैं) दूसरे वेताल का विवाह क्रिस्टोफ़र कोलम्बस की प्रपौत्री मरबेला से हुआ था ।


इक्कीसवें वेताल की मुलाकात अपने अध्ययन के दौरान अमेरिका में डायना पामर से हुई और फ़िर विवाह डायना पामर से हुआ उनकी दो सन्तानें किट व हेलोइस हुईं।


मूल कहानी[संपादित करें]

वेताल की कहानी का आरम्भ क्रिस्टोफ़र वाकर नामक युवा नाविक से होता है जिसका जन्म पोर्ट्स्माउथ में १५१६ में हुआ था उसके पिता (जिनका नाम भी क्रिस्टोफ़र वाकर था) क्रिस्टोफ़र कोलम्बस के अमेरिका जाने वाले जहाज सैन्टा मारिया पर केबिन बाय थे बाद में सन १५२५ में क्रिस्टोफ़र जूनियर अपने पिता क्रिस्टॊफ़र सीनियर के जहाज पर शिपबाय बना जिसपर वे कप्तान बन गए थे १५३६ में २० वर्ष की आयु मेंजब वह अपने पिता के साथ यात्रा पर था १७ फ़रवरी को उसके जहाज पर बेन्गाला की खाड़ी मे सिंह ब्रदरहुड नामक तस्करों ने आक्रमण कर दिया और बेहोश होने से पहले उसने देखा कि उसके पिता को मार दिया गया और जहाज में विस्फ़ोट हो गया और वह अकेला ही बचा और बह कर बेन्गाला या देंगाली के तट पर जा लगा जहाँ उसे अर्द्धमृत अवस्था में पिग्मियों के बान्डर नामक आदिम जाति के लोगों ने उसे देखा और उसकी देखभाल की।

वाकर की मेज[संपादित करें]

अमेरिकी मरूस्थल मे एक चौरस पठार है जिसकी खोज कप्तान किट वाकर ने की थी वाकर और उनके मित्र किरबी यहाँ १४९२ में पहुँचे थे और किरबी ने इसे नाम दिया था "वाकर की मेज ’’ कुछ दशक बाद राजा ने इसे वेताल को दे दिया यह मेसा अर्थात चौरस पठार अन्दर से खोखला है और इसके अन्दर एक लिफ़्ट लगी है।

ट्री हाउस[संपादित करें]

एक विशाल वृक्ष पर रस्सी मानवों द्वारा बनाया गया घर है वहाँ पहुँचने के लिए विशालकाय शिलाखण्ड तथा तार की रस्सियों का सहारा लेना पड़ता है वेताल ने अपना कुछ समय डायना और रेक्स के साथ इस घर पर बिताया।

भारत में[संपादित करें]

भारत में सन १९४० में इलस्टरटेड विकली आफ इंडिया नामक समाचार पत्र में धारावाहिक पट्टी के रूप में प्रकाशन आरम्भ हुआ किन्तु इसका वास्त्विक प्रसार सन १९६४ में इन्द्रजाल कामिक्स के माध्यम से फैन्टम अपने वेताल नाम के अवतार मे अवतरित हुआ हिन्दी में इसका नाम बदल कर वेताल हो गया और इसका निवास स्थान बेंगाला भी बदल कर देंकाली हो गया। पहले इसका प्रकाशन मासिक रूप में होता था धीरे धीरे मांग बढने केसाथ इसका प्रकाशन साप्ताहिक रूप से होने लगा । ७० के दशक मे त्था ८० के दशक के पूर्वाद्ध मे किशोरों का हीरो था।

हिंदी के अलावा कन्नड़, तमिल, मराठी, बंगाली, गुजराती, मलयालम अदि भाषाओं में भी फैंटम की कहानियाँ पहुँचीं। भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय यह हिंदी और अंग्रेजी में ही रहा तथा इन्हीं दो भाषाओं में यह सबसे दीर्घजीवी भी साबित हुआ। सबसे अधिक फैंटम कॉमिक्स भी इन्हीं दोनों भाषाओं में छपे। इस दौरान इंद्रजाल कॉमिक्स के कुल ८०३ अंक प्रकाशित हुए, जिनमें से ४१४ अंक फैंटम या वेताल के थे। तब आज की तरह हर चीज़ का बाज़ार खड़ा करने का चलन नहीं शुरु हुआ था लेकिन फैंटम के प्रतीक-चिह्न दुकान में बिका करते थे।

तकनीक-आधारित मनोरंजन के दौर में उसके कथा-रूप भी बदलते जा रहे हैं। फैंटम एक ऐसा काल्पनिक चरित्र है जो अलग-अलग माध्यमों में सबसे अधिक बार प्रकट हुआ है। ४० के दशक में फैंटम की कहानियों पर उपन्यास लिखे गए। डेल रॉबर्टसन का लिखा हुआ ‘द सन ऑफ द फैंटम’ ऐसा ही एक उपन्यास है। यह एक ऐसा कॉमिक्स-चरित्र साबित हुआ जिसे फिल्म और टेलीविजन माध्यमों ने सबसे अधिक आजमाया। १९४३ में पहली बार इसकी कहानियों को लेकर छोटे-छोटे सिनेमाओं की शृंखला का निर्माण हुआ। १५ कड़ियों वाली यह फिल्म भी कॉमिक्स की तरह ही सफल रही। अनेक टेलीविजन धारावाहिक भी बने। १९९४ में टीवी धारावाहिक आया ‘फैंटम: २०४०’, जिसमें २४ वें फैंटम के कारनामे दिखाए गए हैं। उसे चोरों, डकैतों, समुद्री लुटेरों से लड़ते हुए नहीं दिखाया गया है। उसे धरती का पर्यावरण बिगाड़ने का प्रयास करने वाले दुष्ट वैज्ञानिकों से लड़ना पड़ता है। फैंटम के परंपरागत सहयोगी घोड़ा, बाज़ उसके साथ नहीं होते लेकिन बुराई से लड़ने का वही संकल्प जिसके लिए फैंटम की २३ पीढियाँ कुर्बान हुईं।

कहानियां[संपादित करें]

स्टेगी से वेताल की पहली मुलाकात और उसका मित्र-द्वीप तक का सफ़र[संपादित करें]

वेताल का मित्र-द्वीप (Eden) एक रोमांचक संकल्पना है. यह टापू तीन ओर से नदी द्वारा जंगल की मुख्य जमीन से कटा हुआ है और एक ओर से सुमुद्र से नुकीली चट्टानों द्वारा सुरक्षित है. यहाँ पर भिन्न प्रवृत्तियों के पशु, कुछ शाकाहारी एवम कुछ मांसाहारी आपस में प्रेम पूर्वक रहते हैं. वेताल ने इन सभी को इसी प्रकार वास करने के लिये प्रशिक्षित किया है.

मित्र-द्वीप पर वास करने वाले अधिकांश प्राणियों के इस द्वीप तक पहुंचने की कोई-न-कोई कहानी है. कई जानवर जैसे कि फ़्लफ़ी (शेर), बूढ़ा गंजू (गोरिल्ला), गुफ़ा मानव हज्ज (काल्पनिक जीव), स्टेगी (स्टेगोसॉरस) आदि वेताल को अलग-अलग परिस्थितियों में मिले और अंततः वेताल ने उन्हें सुरक्षित रख्नने के लिये मित्र-द्वीप पहुंचाने का निर्णय लिया .

कहानी कुछ इस तरह से विकसित की गई है कि गहन जंगल में एक विशाल दलदल है जो बीहड़ बन को घेरे हुए है. करोड़ों वर्षों तक इसी दलदली जमीन में दबे रहने के बाद डायनोसॉर का कोई अण्डा ऊपर जमीन तक आ गया और इसी के फ़ूटने से स्टेगी का जन्म हुआ.

जंगल में रास्ता भटके हुए दो बच्चों को ढूंढने निकले वेताल का सामना स्टेगी से होता है. जानवर पर काबू पा लिया जाता है पर सवाल उठता है कि अब इसका किया क्या जाए. शहर का प्राणी संग्रहालय वेताल की बात को कोरी गप्प समझ कर उपेक्षित करता है. और कोई चारा ना देखकर अंततः इस विशालकाय प्राणी को वेताल अपने प्रक्षिक्षण में लेता है, जो कि एक कठिन कार्य है क्योंकि इतने बड़े प्राणी का मस्तिष्क आकार में केवल एक मटर के दाने के बराबर है. लेकिन वेताल पशुओं का एक अच्छा प्रक्षिक्षक है. कई महीनों के प्रक्षिक्षण के बाद आखिरकार स्टेगी को मित्र-द्वीप तक पहुंचाया जाता है जो कि उसके लिये एकमात्र सुरक्षित एवम सर्वथा उपयुक्त स्थान है. शानदार कल्पनाशीलता और रोमांचक तत्वों को समाहित किये इस कहानी से कई लोगों की यादें अवश्य जुड़ी होंगी. इन्द्रजाल कॉमिक्स में इसे पहली बार १९७९ में प्रकाशित किया गया था, "दलदल का दानव" शीर्षक से.

सन्दर्भ[संपादित करें]


बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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