वेंकट माधव

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

धर्म के साथ प्रकृति का गहरा संबंध रहा है । और ये सिद्ध होता है मेरा मानना ये है बहुत गहरा । मेरा मत किसी धर्म को मान्यता नही देता की वो पूर्ण है । इंसान की प्रवर्ति रही है प्रगति और प्रगति के साथ धर्म ने प्रगति नही की वो जटिल हो रहा है । मेरी जिज्ञाषा ही मेरा मार्ग है । और प्रकृति इस की अनुमति देती है । में सिद्धान्त की बात करुगा और सिद्धान्त सिर्फ अध्यन से बनता है । हिन्दू धर्म विलय हो रहा है हिंसक हो रहा है इस में प्रगति रुक चुकी है । धर्म योगी कम भोगी ज्यादा है ।