दुर्गादास राठौड

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दुर्गादास राठौड़ (दुर्गा दास राठौड़) (13 अगस्त 1638 – 22 नवम्बर 1718) भारत के मारवाड़ क्षेत्र के राठौड़ राजवंश के एक मंत्री थे। वो १७वीं सदी के महाराजा जसवंत सिंह के निधन के बाद कुँवर अजित सिंह के सरांक्षक बने। उन्होंने मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब को भी चुनौती दी। ओर कही बार ओरंग़ज़ब को युद्ध में पीछे हटने ओर संधि के लिए मजबूर करा ओर कही बार युद्ध में हराया।

पूर्व जीवन[संपादित करें]

दुर्गादास marwar शासक महाराजा जसवंत सिंह के मंत्री आसकरण राठौड़ के पुत्र थे।[1] उनकी माँ अपने पति और उनकी अन्य पत्नियों के साथ नहीं रहीं और जोधपुर से दूर रहीं। अतः दुर्गादास का पालन पोषण लुनावा नामक गाँव में हुआ। ईनका जन्म सालवाॅ कल्ला में हुआ था।

अजीत सिंह को समर्थन[संपादित करें]

सन् १६७८ में जसवंत सिंह का अफ़्गानिस्तान में निधन हो गया और उनके निधन के समय उनका कोई उत्तराधिकारी घोषित नहीं था। औरंगजेब ने मौके का फायदा उठाते हुये मारवाड़ में अपना हस्तक्षेप जमाने का प्रयास किया। इससे हिन्दूओं नष्ट करने के लिए मुग़ल रणनीति का गठन हुआ और बहुत रक्तपात के बाद भी मुग़ल सेना सफल नहीं हो सकी।[1]

जसवंत सिंह के निधन के बाद उनकी दो रानियों ने नर बच्चे को जन्म दिया। इनमें से एक का जन्म के बाद ही निधन हो गया और अन्य अजीत सिंह के रूप में उनका उत्तराधिकारी बना। फ़रवरी १६७९ तक यह समाचार औरंगज़ैब तक पहुँचा लेकिन उन्होंने बच्चे वैध वारिस के रूप में मानने से मना कर दिया। उन्होंने जज़िया कर भी लगा दिया।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. (अंग्रेज़ी में) The Cambridge History of India [भारत का कैम्ब्रिज इतिहास]. प॰ २४७. http://books.google.com/books?id=yoI8AAAAIAAJ. अभिगमन तिथि: ६ मार्च २०१५.