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विसंगति

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विसंगति काव्य को समृद्ध करने वाला तत्त्व है जो परस्पर विरोधी लगने वाले स्थितियों के संयोजन से निर्मित होता है। विसंगति में शब्द के लक्षणा और व्यंजना व्यापार सक्रिय होते हैं। इससे रचना की भाषा में संक्षिप्तता आती है और वह अधिक सटीक बनती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]