विषैले कवक
विषैले कवक, (/, æ m ə ˈ n aɪ t ə f ə ˈ l ɔɪ d iː z / AM -ə- NY -tə fə- LOY -deez ), जिसे आमतौर पर मृत टोपी कहा जाता है, एक जहरीला कवक है। यह अमनिता जीनस की कई प्रजातियों में से एक है। यह मूल रूप से यूरोप में पाया जाता था।[1] विषैले कवक का सेवन अत्यंत हानीकारक होता है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। यह "बेसिडिओमाइसीट कवक" की प्रजाति से संबंधित है और प्राकृतिक रूप से जंगलों और घास के मैदानों में पाया जाता है।
विवरण
[संपादित करें]विषैले कवक आकार में बड़ा और फलने वाला होता है। इसके छत्ते आमतौर पर 5 से 15 सेमी तक होती है। शुरुआती अवस्था में यह गोल या अर्धगोलाकार रहती है, लेकिन उम्र के साथ धीरे-धीरे चपटी और फैलती जाती है। इसके छत्ते का रंग हल्का हरा, पीला, जैतून-हरा, कांस्य या सफेद रंग के होते है; इसमें गहरे रंग की धारियाँ पायी जाती हैं;[2] बारिश के मौसम में इसकी सतह चिपचिपी हो जाती है और इसे काटना आसान होता है।
विषाक्त
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इसके जैव रसायन पर दशकों से गहन शोध किया गया है। अनुमान है कि इसका केवल 30 ग्राम सेवन एक इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। उत्तरी अमेरिका में औसतन प्रत्येक वर्ष एक व्यक्ति इस कवक के सेवन से मरता है।[3]
लक्षण
[संपादित करें]विषैले कवक मुख्य रूप से यकृत पर असर करता है, साथ ही गुर्दे और अन्य अंगों को भी प्रभावित करते हैं। इसके सेवन के 6–12 घंटे बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं। समान्य लक्षणों में मतली, उल्टी, पेट दर्द और दस्त शामिल हैं। शुरुआत में हल्के लक्षण दिखते हैं, लेकिन समय के साथ विष शरीर पर गंभीर और जानलेवा प्रभाव डाल सकता है।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ कै, क्यूंग; टुल्लोस, रोधाम ई॰; तांग, ली पी॰; तोलगोर, बाउ; जांग, पिंग; चेन, जोउ एच॰; यांग, ज्हू एल॰ (2014-06-21). "घातक अमानिटास की बहु-स्थानीय जातिवृति: प्रजाति विविधता और ऐतिहासिक जैवभूगोल पर प्रभाव". बीएमसी विकासवादी जीवविज्ञान (अंग्रेज़ी भाषा में). 14 (1): 143. बिबकोड:2014BMCEE..14..143C. डीओआई:10.1186/1471-2148-14-143. आईएसएसएन 1471-2148. पीएमसी 4094918. पीएमआईडी 24950598.
- ↑ त्रुडेल, स्टेभ; अम्मिरती, जॅय (2009). "प्रशांत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के कवक". टिम्बर प्रेस फील्ड गाइड. पोर्टलैंड, OR: टिम्बर प्रेस. p. 87. ISBN 978-0-88192-935-5.
- ↑ चाइल्ड्स, क्रेग (फरवरी 1, 2019). "मृत कवक के मामले पूरे उत्तरी अमेरिका में फैल रहे हैं।". द अटलांटिक. अभिगमन तिथि: फरवरी 5, 2019.