"कुंतक" के अवतरणों में अंतर

नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
6 बैट्स् नीकाले गए ,  11 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
No edit summary
No edit summary
टैग: Large English contributions
उनकी एकमात्र रचना [[वक्रोक्तिजीवित]] है जो अधूरी ही उपलब्ध हैं। वक्रोक्ति को वे काव्य का 'जीवित' (जीवन, प्राण) मानते हैं। पूरे ग्रंथ में वक्रोक्ति के स्वरूप तथा प्रकार का बड़ा ही प्रौढ़ तथा पांडित्यपूर्ण विवेचन है। वक्रोक्ति का अर्थ है वदैग्ध्यभंगीभणिति (सर्वसाधारण) द्वारा प्रयुक्त वाक्य से विलक्षण कथनप्रकार
 
'''वक्रोक्तिरेव वैदग्ध्यभंगीभणितिरु च्यते।च्यते'''। (वक्रोक्तिजीवित 1।10)
 
कविकर्म की कुशलता का नाम है वैदग्ध्य या विदग्धता। भंगी का अर्थ है - विच्छित, चमत्कार या चारुता। भणिति से तात्पर्य है - कथन प्रकार। इस प्रकार वक्रोक्ति का अभिप्राय है कविकर्म की कुशलता से उत्पन्न होनेवाले चमत्कार के ऊपर आश्रित रहनेवाला कथनप्रकार। कुंतक का सर्वाधिक आग्रह कविकौशल या कविव्यापार पर है अर्थात् इनकी दृष्टि में काव्य कवि के प्रतिभाव्यापार का सद्य:प्रसूत फल हैं।
*बलदेव उपाध्याय : भारतीय साहित्यशास्त्र, भाग 2, काशी, सं. 2012;
*सुशीलकुमार दे: वक्रोक्तिजीवित का संस्करण तथा ग्रंथ की भूमिका, कलकत्ता
 
 
 
 
[[श्रेणी: संस्कृत ग्रंथ]]
 
[[श्रेणी: संस्कृत साहित्य]]
बेनामी उपयोगकर्ता

दिक्चालन सूची