"लल्लेश्वरी" के अवतरणों में अंतर

Jump to navigation Jump to search
327 बैट्स् जोड़े गए ,  14 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
 
[[फूल चन्द्रा]] द्वारा लल्लेश्वरी के कुछ वाख का अनुवाद नीचे प्रस्तुत हैः
 
1
:प्रेम की ओखली में हृदय कूटा
:प्रकृति पवित्र की पवन से।
:जलायी भूनी स्वयं चूसी
:शंकर पाया उसी से।।
 
2
:हम ही थे, हम ही होंगे
:हम ही ने चिरकाल से दौर किये
:सूर्योदय और अस्त का कभी अन्त नहीं होगा
:शिव की उपासना कभी समाप्त नहीं होगी।
 
[[श्रेणी:हिन्दू धर्म]]
283

सम्पादन

दिक्चालन सूची