"चौहान वंश": अवतरणों में अंतर

नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
51 बाइट्स जोड़े गए ,  4 माह पहले
Thakur tusharchauhan, Shanusar और Nakul tiger द्वारा किये 6 बदलाव अस्वीकार किये और रोहित साव27 का 5520056 अवतरण पुनर्स्थापित किया
[अनिरीक्षित अवतरण][पुनरीक्षित अवतरण]
(For history purpose)
टैग: Manual revert Reverted मोबाइल संपादन मोबाइल वेब संपादन
(Thakur tusharchauhan, Shanusar और Nakul tiger द्वारा किये 6 बदलाव अस्वीकार किये और रोहित साव27 का 5520056 अवतरण पुनर्स्थापित किया)
टैग: Manual revert
{{स्रोत कम|date=मार्च 2021}}
[[चित्र:Vigraha Raja IV of the Chauhans of Ajmer Circa 1150-1164.jpg|right|thumb|240px|[[अजमेर]] के चौहान राजा [[विग्रहराज चौहान|विग्रह राज चतुर्थ]] के काल (११५०-६४ ई) के सिक्के]]
'''चौहान वंश''' अथवा '''चाहमान वंश''' एक भारतीय गुर्जरराजपूत राजवंश था जिसके शासकों ने वर्तमान [[राजस्थान]], [[गुजरात]] एवं इसके समीपवर्ती क्षेत्रों पर ७वीं शताब्दी से लेकर १२वीं शताब्दी तक शासन किया। उनके द्वारा शासित क्षेत्र सपादलक्ष कहलाता था। वे चरणमान (चौहान) कबीले के सबसे प्रमुख शासक परिवार थे, और बाद के मध्ययुगीन किंवदंतियों में अग्निवंशी गुर्जरोंराजपूतों के बीच वर्गीकृत किए गए थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=7iOsNUZ2MXgC&pg=PA254&dq=chauhan+rajput&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjEi5vx4qnuAhWMad4KHeAzAh4Q6AEwBnoECAYQAg#v=onepage&q=chauhan%20rajput&f=false|title=The Golden Book of India: A Genealogical and Biographical Dictionary of the Ruling Princes, Chiefs, Nobles, and Other Personages, Titled Or Decorated of the Indian Empire|last=Lethbridge|first=Sir Roper|date=2005|publisher=Aakar Books|isbn=978-81-87879-54-1|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.co.in/books?id=FP_MWtoPIcoC&pg=PA22&dq=chauhan+rajput&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjEi5vx4qnuAhWMad4KHeAzAh4Q6AEwA3oECAQQAg#v=onepage&q=chauhan%20rajput&f=false|title=Against History, Against State|last=Mayaram|first=Shail|date=2006|publisher=Permanent Black|isbn=978-81-7824-152-4|language=en}}</ref>
 
चौहानों ने मूल रूप से [[शाकंभरी]] (वर्तमान में सांभर लेक टाउन) में अपनी राजधानी बनाई थी। 10वीं शताब्दी तक, उन्होंने गुर्जर प्रतिहार जागीरदारों के रूप में शासन किया। जब त्रिपिट्री संघर्ष के बाद प्रतिहार शक्ति में गिरावट आई, तो चमन शासक सिमरजा ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की। 12वीं शताब्दी की शुरुआत में, अजयराजा II ने राज्य की राजधानी को अजयमेरु (आधुनिक अजमेर) में स्थानांतरित कर दिया। इसी कारण से, चम्मन शासकों को अजमेर के चौहानों के रूप में भी जाना जाता है।
 
गुजरात के चौलुक्यों, दिल्ली के तोमरतोमरस, मालवा के परमारों और बुंदेलखंड के चंदेलों सहित, कई लोगों ने अपने पड़ोसियों के साथ कई युद्ध लड़े। 11 वीं शताब्दी के बाद से, उन्होंने मुस्लिम आक्रमणों का सामना करना शुरू कर दिया, पहले गजनवीड्स द्वारा, और फिर गूरिड्स द्वारा। १२ वीं शताब्दी के मध्य में विग्रहराजा चतुर्थ के तहत चम्मन राज्य अपने आंचल में पहुँच गया। वंश की शक्ति प्रभावी रूप से 1192 CE में समाप्त हो गई, जब घुरिड्स ने अपने भतीजे पृथ्वीराज तृतीय को हराया।
[[File:शाकम्भरीदेवी.jpg|thumb|चौहानों की कुलदेवी माँ शाकम्भरी सहारनपुर]]
 

नेविगेशन मेन्यू